कविता – 45 ” मेरी बेटी श्वेता की डोली 27 नवम्बर 2020 की सुबह हमें भीगी पलकों के साथ छोड़कर ससुराल के लिए विदा हो गई। मेरा साहस नहीं हुआ कि विदा होती अपनी लाडो के सिर पर हाथ रख सकूं। हो सकता है कि मेरी प्यारी बेटी को भी यह बुरा लगा […]
बेटी का अहसास और पिता