1857 की क्रांति के बाद जब अंग्रेजों की प्रति- क्रांति हुई तो अपने कुछ स्थायी प्रभाव पैदा कर गई। कुछ लोगों की मान्यता है कि 1857 की क्रांति को हम हार गए थे या कहिए कि यह हमारी फूट के कारण असफल हो गई थी। इस पर हमारा मानना है कि ऐसा कुछ भी नहीं […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
1857 की क्रांति के बाद जब अंग्रेजों की प्रति- क्रांति हुई तो अपने कुछ स्थायी प्रभाव पैदा कर गई। कुछ लोगों की मान्यता है कि 1857 की क्रांति को हम हार गए थे या कहिए कि यह हमारी फूट के कारण असफल हो गई थी। इस पर हमारा मानना है कि ऐसा कुछ भी नहीं […]
ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग के पश्चात अब यह बात स्पष्ट हो गई है कि मध्यकाल में तुर्क और मुगल शासक भारत की संस्कृति और धर्म स्थलों को मिटाकर या अपवित्र करके भारत में सर्वत्र इस्लाम का परचम लहराने की योजना पर कार्य करते रहे थे ।अभी तक जो लोग इस बात को लेकर बार-बार […]
‘ विश्व कवि रामधारी सिंह दिनकर’ – इस ग्रंथ के प्रधान संपादक साहित्य जगत के जाने-माने हस्ताक्षर और मां भारती के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के धनी हरिबल्लभ सिंह ‘ आरसी’ (विद्यासागर) हैं। इस अद्भुत ग्रंथ के माध्यम से श्री आरसी जी ने भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित एक कवि को ही अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित […]
गीता मेरे गीतों में ( 1 ) मोहग्रस्त अर्जुन कुरुक्षेत्र के धर्मक्षेत्र में थी सेनाएं सजकर खड़ी हुईं, अपने पक्ष को प्रबल बता विजय हेतु थी अड़ी हुईं । महासागर सेना का उमड़ा- थी सर्वत्र चमकती तलवारें, हर योद्धा उनको भांज रहा ,थी अपने आपसे भिड़ी हुई ।। अर्जुन ने अब से पहले भी न […]
ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर इस समय चर्चा जोरों पर है। भारत में गंगा जमुनी संस्कृति की बात करने वाले छद्म धर्मनिरपेक्ष तथाकथित इतिहासकार और राजनीतिज्ञ इसे हिंदू मुस्लिम स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना बता रहे हैं। यह सब कुछ उस समय हो रहा है जब मस्जिद के स्थान पर काशी विश्वनाथ मंदिर को एक […]
बीती शताब्दी भारतीय उपमहाद्वीप के लिए बहुत बड़ी त्रासदी लेकर आई थी। जब 1947 की 15 अगस्त को देश को आजादी मिलने से पहले भारत का बंटवारा होकर एक नया देश पाकिस्तान के नाम से विश्व के मानचित्र पर उभर कर सामने आया था। भारत के लिए निश्चय ही 14 अगस्त 1947 एक काला दिन […]
‘ बल्लू चाय वाले की दुकान’ पुस्तक के लेखक राजकुमार इंद्रेश हैं । एक कहानी संग्रह है यह । इस कहानी संग्रह की कहानियां सचमुच यथार्थ जीवन की कहानियां हैं और वास्तविक जीवन पर आधारित हैं। कहानीकार ने उन्हें सुना और सुनकर कहानियों के रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। इस पुस्तक पर […]
‘ दो बहादुर लड़के’ ( बाल कहानी संग्रह ) हेमंत यादव ‘शशि’ द्वारा लिखी गई है। बाल साहित्यकार के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके श्री यादव की यह पुस्तक कई प्रकार के प्रेरक और सकारात्मक संदेश देती हुई दिखाई देती है। इस पुस्तक में लेखक ने कुल 16 बाल कहानियों को […]
डॉ॰ राकेश कुमार आर्य 1947 में भारत के पहले शिक्षामंत्री बने मौलाना अबुल कलाम आजाद। उन्होंने कांग्रेस के द्वारा अपनी वर्धा योजना के अंतर्गत भारत के लिए प्रस्तावित की गई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारत के शिक्षा संस्कारों को बिगाड़ने का काम आरंभ किया।उन्होंने ही इतिहास का विकृतिकरण करते हुए मुस्लिम मुगल शासकों को हिंदू […]
शिथिल करो बंधन तर्ज : – बचपन की मोहब्बत को …. माया में रमा मानव ना भगवान से मिल पाता। सत , रज, तम तीनों के महा-भ्रम में पड़ जाता।। टेक।। सत , रज , तम – तीनों से माया ने रचा जीवन। इन से ही जगत बना भोगों का पड़ा बंधन ।। जो इन […]