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डॉ आर्य की “हिंदुस्तान में हिंदू का अस्तित्व” नामक पुस्तक का हुआ विमोचन

ग्रेटर नोएडा । यहां अंसल सोसाइटी में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बाबा नंद किशोर मिश्र और सांस्कृतिक गौरव घोष के वरिष्ठ पदाधिकारी विनोद कुमार सर्वोदय द्वारा प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखक डॉ राकेश कुमार आर्य के 56 वे जन्मदिवस पर उनकी 64 वी पुस्तक ‘हिंदुस्तान में हिंदू का अस्तित्व’ का विमोचन किया […]

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कविता गीता का कर्मयोग और आज का विश्व

गीता मेरे गीतों में, गीत संख्या ….17 , देव पूजा से कल्याण

देव पूजा से कल्याण सोते हुए बालक को जैसे माता पिलाती दूध को। प्रतीति नहीं है स्वाद की पर पीता है बच्चा दूध को।। रहते हैं संसार में वैसे ही योगी जान विषय गूढ़ को। हम निर्लिप्त भाव से रहें – समझें विचार विशुद्ध को।। आंखों से देखता है योगी पर देखता नहीं संसार को। […]

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आज का चिंतन

स एष पूर्वेषामपि गुरु: कालेनानवच्छेदात् ।। 26 ।।

स एष पूर्वेषामपि गुरु: कालेनानवच्छेदात् ।। 26 ।।  आज गुरु पूर्णिमा है। इस अवसर पर सत्य सनातन संस्कृति सेवा समिति के सौजन्य से आज का पाक्षिक पौर्णमासिक यज्ञ भी संपन्न किया । इसके साथ ही गुरुओं के भी गुरु परमपिता परमेश्वर का इस बात के धन्यवाद ज्ञापित किया कि उनकी बनाई सृष्टि में हमको मानव […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

इस देश का यारों क्या कहना ?

संसार का सबसे उत्तम देश- भारत। संसार का सबसे पराक्रमी देश – भारत। संसार का सबसे शौर्य संपन्न देश – भारत। पर क्या कारण है कि इस सबके उपरांत भी भारत के लोग अपने शौर्य संपन्न पराक्रमी इतिहास को नहीं जानते ? कारण केवल एक है कि दीर्घकाल से इस देश के पराक्रमी, शौर्य संपन्न […]

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कविता

गीता मेरे गीतों में, गीत संख्या …16 संयमी मुनि

संयमी मुनि मन – वचन- कर्म से मत किसी को पीड़ा पहुंचाना। तपोव्रती और संयमी जीवन से सबके कष्ट मिटाना।। वेद ने दी मर्यादा हमको पहली – अहिंसावादी बन। दूजी है -यथार्थ ज्ञान को पाकर तू भी सत्यवादी बन।। अस्तेय, ब्रह्मचर्य, शौच, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान। ये ही सात मर्यादा हमको देतीं अपनी सही पहचान।। […]

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गीता मेरे गीतों में,.. गीत संख्या….. 15

परमात्मा के दर्शन का लाभ शत्रु हैं जो जग में आपके उन्हें जीतना होगा। मित्रता के हर एक पौधे को हमको सींचना होगा।। नहीं कोई साथ आया है , नहीं कोई साथ जाएगा। जो भी लिया जग से – यहीं पर छूट -जाएगा।। धर्म ही सच्चा साथी है – उसी को धारना होगा ….. अहंकार […]

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गीता मेरे गीतों में… कविता 14

स्थित बुद्धि हो नहीं सकता संसार उसका जो कामनाओं से युक्त है। वही जीत सकता संसार को जो कामनाओं से मुक्त है।। दिन आपाधापी में बिताना और रात में षड़यंत्र रचना। लक्षण नहीं ये वीर के – यूँ ही किसी पर व्यंग्य कसना ।। सदा सम्मान दूसरों का करे – वही वीर बुद्धियुक्त है … […]

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पुस्तक समीक्षा : ईशादि नौ उपनिषद ( काव्यानुवाद) मांडूक्य उपनिषद की व्याख्या

मांडूक्य उपनिषद की व्याख्या उपनिषद वेद रूपी गाय का घृत है। जैसे गाय के घी से अनेक रोग शांत होते हैं वैसे ही मानसिक और आत्मिक धरातल पर सता रहे अनेक प्रकार के रोग उपनिषदों के अध्ययन से शांत हो जाते हैं। उपनिषदों को सही अर्थ और संदर्भ में हमारे समक्ष प्रस्तुत करने की कला […]

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पुस्तक समीक्षा : कारवां मंजिल की ओर (सांझा कहानी संकलन)

‘कारवां मंजिल की ओर’ की सम्पादिका श्रीमति हिमाद्रि ‘समर्थ’ हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन का शुभारंभ अनंत इच्छाओं को लेकर करता है। यह अलग बात है कि उसकी अनेक इच्छाओं में से बहुत कम ही पूरी हो पाती हैं। पर यह अनंत इच्छाएं मनुष्य को कुछ कर गुजरने के लिए अवश्य प्रेरित करती हैं। वह […]

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वे अपने हो नहीं सकते….

वे अपने हो नहीं सकते जो तेरे साथ रहकर भी। पराए गीत गाते हों, तेरे जिगरे को खाकर भी।। क्यों करता बात बचकानी तनिक तो सोच ऐ बंदे ! भरोसा मत करो उन पर, जो करते काम है गंदे।। वतन के हैं वह दुश्मन , अनेकों कसमें खाकर भी … पराए गीत गाते हों, तेरे […]

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