राष्ट्र-चिंतन* *मोदी के सामने बाइडेन के झुकने का अर्थ*

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आचार्य विष्णु हरि सरस्वती

घोर आश्चर्य और अचंभित करने करने वाला उदाहरण और कूटनीतिक घटना। किंतु पूरी तरह से सत्य। एक ऐसा सत्य जिसे पूरी दुनिया ने देखी और पूरी दुनिया के बड़े-बडे देशों के शासको ने देखा। भारत के आत्मघाती और परअस्मिता की मानसिकता से ग्रसित लोगों को इस कूटनीतिक घटना पर गर्व होगा नहीं पर दुनिया भर में रहने वाले भारतीयों और देश की देशभक्ति पर गर्व करने वाली जनता इस पर सम्मान का अनुभव जरूर कर रही है। दुनिया के सबसे बड़े शासक और दुनिया को अपनी उंगलियांें पर नचाने वाले अमेरिका के राष्टपति जो बाईडेन द्वारा नरेन्द्र मोदी के सामने खुद आकर हाथ मिलाना और झुकना क्यों नहीं बडे गर्व की बात और घटना है? यह घटना जापान की हिरोशिमा में घटी है। अमेरिका ने कभी हिरोशिमा को राख बना दिया था, परमाणु हमला कर लगभग एक लाख लोगों को मार दिया था। हिरोशिमा में जी 7 देशो का शिखर सम्मेलन आयोजित था। जी 7 देशों के शिखर सम्मेलन में बाइडेन ही क्यों बल्कि दुनिया के अन्य देशों के नामीरिरामी शासकों ने भी नरेन्द्र मोदी का स्वागत करने और मिलने में जो गर्मजोशी दिखायी, वह न केवल भारत के लिए सम्मान की बात है बल्कि भारत की बढ़ती हुई वैश्विक और कूटनीतिक शक्ति का अहसास भी कराता है।
निश्चित तौर पर नरेन्द्र मोदी को इसका श्रेय जाता है कि उन्होंने अपनी कामयाबी और दूरदर्शिता की ऐसी छाप छोडी है कि दुनिया भी चकित है और नतमस्तक भी है। कभी भारत की साप-सपेरों की पहचान थी और इस पहचान को लेकर दुनिया हमारी खिल्ली उड़ाती थी लेकिन आज हमारी पहचान हर क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ आंकी जा रही है। नरेन्द्र मोदी की सहमति और उपस्थिति के बिना दुनिया के नियामक अपनी चमक बनाये रखने में असमर्थ हैं, दुनिया के नियामकों की हर क्रिया और प्रतिक्रिया पर नरेन्द्र मोदी का समर्थन अनिवार्य जैसा ही माना जा रहा है। जो बाइडेन कहते हैं कि मोदी जी आप अमेरिका आने वाले हैं, सभा के सभी टिकट बिक गये, यहां तक कि मेरे रिश्तेदार, एक्टर और उद्योगपति तक आपकी सभा में शामिल होने और आपसे मिलने के लिए टिकट मांग रहे हैं।
कभी भारत के शासक अमेरिका के शासकों से मिलने और भीख मांगने के लिए तरसते थे, घंटों इंतजार कराते थे, फिर भी मिलने के लिए समय नहीं देते थे, अंतराष्टीय मंचों पर भारत को अपमानित करते थे और भारत को डराते-धमकाते भी थे। भारत दीनहीन की तरह यह सब बर्दाशत करता था। विश्वास नहीं है तो महाराजा कृष्ण रस्गोत्रा की पुस्तक पढ़ लीजिये। महराजा कृष्ण रस्गोत्रा इंदिरा गांधी पर एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है ए लाइफ इन डिप्लोमसी। रस्गोत्रा भारत के पूर्व विदेश सचिव थे और उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी के साथ काम किया था, विदेशी कूटनीति के क्षेत्र में रस्गोत्रा की तूती बोलती थी। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के विदेश दौरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी रस्गोत्रा निभाते थे। रस्गोत्रा ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि अमेरिका के राष्टपति निक्सन ने इंदिरा गांधी को लॉन बैठा कर 45 मिनट इंतजार कराया था, इसके बाद भी मिलने के समय निक्सन ने गर्मजोशी नहीं दिखायी थी और न ही उसने भारत की चिंताओं पर कोई नोटिस लिया था। प्रमुख अंतर्राष्टीय मंचों पर भारतीय शासकों को पीछे या फिर अंतिम पक्ति में खड़ा होना पड़ता था। जब भारत के शासक पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ विदेशों में बोलते थे और पाकिस्तान के आतंकवाद पर नियंत्रण करने की गुहार लगाते थेे तब विदेशी शासक भारत की खिल्ली उड़ाते थे। जब कोई बड़ा शासक भारत आता था तब वह पाकिस्तान जाना भी नहीं भूलता था। यानी की विदेशी शासक पाकिस्तान को नाराज नहीं करना चाहते थे।
लेकिन आज की स्थिति क्या है? आज की स्थिति यह है कि बिना भारत की सहमति और विश्वास के बिना कोई भी वैश्विक नीति का सफल होना असंभव है। दुनिया के शासको को यह अहसास हो गया है कि वैश्विक नीतियां तभी सफल होंगी जब उसमें भारत की सक्रियता अग्रणी होगी। ऐसी स्थिति रातोरात नहीं बनी हुई है। ऐसी स्थिति को बनाने में नरेन्द्र मोदी की दृढ और निडर इच्छाएं शामिल रही हैं। प्रधानमंत्री बनने से पूर्व ही मोदी ने अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दिया था, आंख में आंख मिला कर जवाब दिया था और कह दिया था कि वह अमेरिकी कूटनीतिज्ञ से मिलने की कतई इच्छुक नहीं हैं। अमेरिकी राजदूत को मिलना है तो उसे गांधीनगर आना होगा। अमेरिका ने कभी मोदी को अपने यहां आने से प्रतिबंधित कर दिया था। गुजरात दंगों को लेकर अमेरिका नरेन्द्र मोदी को हिंसक मानता था। तत्कालीन अमेरिकी राजदूत नरेन्द्र मोदी विरोधी मानी जाती थी। लेकिन उस अमेरिकी राजदूत को अपमान झेलना पड़ा था, उसका अहंकार जमींदोज हो गया था। मोदी की इच्छानुसार तत्कालीन अमेरिकी राजदूत गांधीनगर गयी थी और नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी और गुजरात दंगों पर आधारित प्रतिबंधों को लेकर मोदी से माफी भी मंाग ली थी। उस राजदूत को अमेरिका ने पद से हटा दिया था। अमेरिका जान गया था कि भारत पर नरेन्द्र मोदी युग की शुरूआत हो चुकी है।
मोदी ने अमेरिका और यूरोप ही नहीं बल्कि मुस्लिम देशों को सीधे तौर पर नाराज कर कश्मीर से धारा 370 हटा दिया। आतंकवादी पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए एयर स्टाइक किया। अमेरिका और यूरोप तथा मुस्लिम देश नाराज होकर भारत विरोधी हरकतें करते रहे, भारत को संयम बरतने की अपील करते रहे लेकिन नरेन्द्र मोदी ने इनकी एक नहीं चलने दी। यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और यूरोप की एक नहीं सुनी। अमेरिकी धमकियों से भारत डरा नहीं। नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कह दिया कि हम युद्ध विरोधी हैं पर यूक्रेन युद्ध में किसी का समर्थन और विरोध नहीं करेंगे। युद्ध रोकने के लिए संवाद की जरूरत है। अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर कोई एक नहीं बल्कि कई प्रतिबंध लगाये हैं। रूस से तेल खरीदने पर भी प्रतिबंध लगाया। लेकिन रूस से भारत ने बराबर तेल खरीदा। भारत ने कह दिया कि हम अमेरिकी प्रतिबंध मानने के लिए कतई तैयार नहीं है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को गति दिया और अपनी जनता को महंगाई से राहत दिया। रूस से तेल नहीं खरीदने के लिए अमेरिका ने कई हथकंडे अपनाये थे लेकिन भारत अपनी इच्छा से डिगा नहीं।
तथाकथित धार्मिक आजादी को लेकर अमेरिका और यूरोप के शासक और संस्थाएं रिपोर्ट जारी कर भारत पर दबाव बनाने का काम करते हैं लेकिन भारत अपनी स्वतंत्रता की जिम्मेदारी से भागता नहीं है। भारतीय विदेशी मंत्री ऐसी झूठी रिपोर्टो को लेकर इनकी आलोचना से पीछे नहीं हटते हैं और नसीहत देते हैं कि आप अपने घर की स्थिति संभालिये और देखिये, भारत में मानवाधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके पहले ऐसी भाषा भारतीय कूटनीतिज्ञों के मुंह से किसी ने सुनी थी? भारतीय कूटनीति आज पूरी स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के साथ भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं। ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है कि नरेन्द्र मोदी ने भारतीय कूटनीतिज्ञों को खुलकर खेलने और जैसे को तैसे में जवाब देने की पूरी छूट दे रखी है।
ब्रिटेन, अमेरिका और नाटो देशों को चीन और रूस से निपटना मुश्किल हो रहा है। चीन अमेरिकी कूटनीतिज्ञ को बार-बार पराजित कर रहा है। रूस ने यूक्रेन पर हमला कर नाटों को सबक सिखा दिया। अमेरिका और अन्य नाटों देशो की चौधराहट आज खतरे में है। अमेरिका और नाटो यह चाहते हैं कि भारत भी चीन और रूस के खिलाफ हमारे साथ खडे रहे। चीन के साथ हमारा मतभेद है, चीन के साथ आज हम युद्धरत है, चीन हमेशा अपने पड़ोसियों पर हिंसक नजर रखता है, गरीब और विकासशील देशों को चीन सस्ते कर्ज देकर गुलाम बना रहा है। रूस भी अब विश्वसनीय नहीं है।
फिर भी हमें अमेरिका नाटो के हित नहीं बल्कि अपने हित की रक्षा करनी है। नरेन्द्र मोदी निष्पक्षता और स्वतंत्रता के साथ दुनिया का नेतृत्व करें। नरेन्द्र मोदी की निष्पक्षता और स्वतंत्रता में ही भारत सर्वश्रेष्ठ बनेगा और दुनिया भारत की शक्ति की पहचान करेगी।

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संपर्क:
आचार्य विष्णु हरि सरस्वती
नई दिल्ली

मोबाइल … 9315206123

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