श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आर्य समाज ने लिया ‘सोया अर्जुन’ जगाने का संकल्प

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ग्रेटर नोएडा । यहां स्थित आर्य समाज नवादा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वक्ताओं ने ‘सोया अर्जुन’ जगाने का संकल्प लिया । इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान आचार्य योगेश भारद्वाज ने कहा कि देश की वर्तमान परिस्थितियों की दृष्टिगत सारे हिंदू समाज को एक करने की आवश्यकता है हमको बांटने की कोशिश की जा रही है लेकिन इन सभी देश विरोधी शक्तियों का सामना करने के लिए सामूहिक संकल्प शक्ति रुपी अर्जुन को जगाने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा कि योगेश्वर श्री कृष्ण पर जिस प्रकार के आरोप लगाए जाते रहे हैं, वह सब भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का चरित्र भ्रष्ट करने का भारत विरोधी शक्तियों का संयोजित षड्यंत्र है। जिसका सामना करने के लिए आर्य समाज को भी अपने पुराने स्वरूप को निखारना होगा। जिसमें वह अपने महापुरुषों के वास्तविक चरित्र को लोगों के सामने लाने का काम करता था। आज आर्य समाज को यथास्थितिवाद से बाहर निकलकर क्रांति का रास्ता अपनाना होगा। जब आर्य समाज क्रांति का मार्ग प्रस्तुत करेगा तो संपूर्ण हिंदू समाज इसका अनुकरण करेगा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के लोग पीछे न हटें बल्कि सामने खड़ी हुई चुनौती को स्वीकार करें अतीत में उन्होंने ऐसा किया भी है जब देश पर विदेशी लोगों का राज था और आर्य समाज के लोगों ने उस राज को समाप्त करने का निर्णय लिया था, आज फिर क्रांति के इस मार्ग का अनुगामी होना होगा। उन्होंने क्रांति शब्द की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए लोगों का आवाहन किया कि वह आर्य समाज के क्रांति पथ को भूलें नहीं क्योंकि देश आज भी अनेक प्रकार की उन परिस्थितियों में घिरा हुआ है जो कभी योगेश्वर श्री कृष्ण जी के काल में बनी हुई थीं।
आचार्य श्री ने कहा कि भारत तभी तक भारत के रूप में जीवित रह सकता है जब तक वैदिक संस्कृति का शंखनाद होता रहेगा। जिस दिन वेद और वैदिक संस्कृति क नाम लेने वाले भारत से समाप्त कर दिए जाएंगे उस दिन भारत नहीं रहेगा। इसलिए समय रहते जागना होगा और जागरूक रहकर अपनी वैदिक संस्कृति की रक्षा करते हुए राष्ट्र रक्षा करनी होगी।

आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर के जिलाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि श्री कृष्ण जी ने अपने समय में जिन आसुरी शक्तियों का विनाश किया था वह आज फिर सिर उठा रही हैं । इसलिए हमें किसी चूड़ी बेचने वाले श्याम की नहीं बल्कि देश विरोधी शक्तियों का विनाश करने वाले कृष्ण और उनके शिष्य अर्जुन की आवश्यकता है। मनुस्मृति के नाम पर जिस प्रकार हिंदू समाज को तोड़ने की कोशिश हो रही है उसे हिंदू समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण जी ने काम और क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया है। उन्होंने अर्जुन को समझाया कि जिस प्रकार दुर्योधन जैसे चरित्रभ्रष्ट लोग नारी का भरी सभा में अपमान कर रहे हैं,उन सब का प्रतिकार लेना ही धर्म की स्थापना होगी । यदि दुर्योधन आज धर्म भ्रष्ट हो गया है तो अर्जुन गांडीव फेंक कर तुझे धर्म भ्रष्ट नहीं होना है। इसके लिए तुझे पीठ फेरकर नहीं खड़ा होना है बल्कि राजदरबारों की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना अपना धर्म स्वीकार करना होगा।इसी से लोक का कल्याण होगा और लोक धर्म के मार्ग पर आ सकेगा। श्री कृष्ण जी के वास्तविक स्वरूप को स्थापित करने की आवश्यकता है ना कि उनके पौराणिक स्वरूप को। श्री कृष्ण जी जैसी पवित्र आत्मा युग युगों में दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि गीता में भगवान श्री कृष्ण जी से अर्जुन कहता है कि कृष्ण जी वह क्या वस्तु है जिससे प्रेरित होकर यह पुरुष न चाहता हुआ भी पाप आचरण करता है। श्री कृष्ण जी कहते हैं कि काम और क्रोध हमारे भीतर ऐसे छुपे हुए दो शत्रु हैं महाशत्रु हैं जो रजोगुण से उत्पन्न होते हैं और जिनके कारण मनुष्य न चाहते हुए भी पाप आचरण में जा फंसता है। मनुस्मृति में इन्हें क्रोधज और कामज पाप कहकर मनु महाराज ने स्पष्ट किया है। जो इनको पाल लेता है वह जीता हुआ ही मर जाता है। इसीलिए श्री कृष्ण जी ने इन्हें महाशन महा + अशन अर्थात सब कुछ खा जाने वाला कहा है।बड़े-बड़े राजवंशों का नाश काम और क्रोध ने करवा दिया। बड़े-बड़े सम्राटों के साम्राज्य गायब हो गए। श्री कृष्ण जी कह रहे हैं कि अर्जुन! दुर्योधन पर क्रोध नाम के महाशत्रु का प्रकोप हो चुका है। इसलिए उसका महाविनाश निश्चित है, अर्थात इस युद्ध में उसकी पराजय निश्चित है। वे अर्जुन को बता रहे हैं कि काम के वशीभूत होकर दुर्योधन ने द्रोपदी का भरी सभा में अपमान किया। अब उसका फल उसको मिलना निश्चित है। तू उस फल को देने का निमित्त बन रहा है। इसलिए परमपिता परमेश्वर की अपने ऊपर कृपा समझ। इस कृपा कवच को ओढ़कर मैदान में उतर जा, भागे मत।

भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि आज जिस प्रकार लाइव इन रिलेशनशिप जैसी बीमारियों को परोसकर हिंदू समाज को चारित्रिक रूप से भ्रष्ट किया जा रहा है उसके लिए श्री कृष्ण जी के उज्जवल चारित्रिक पक्ष को युवा पीढ़ी के सामने परोसना हम सबके लिए जरूरी हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि युवाओं को संस्कार आधारित शिक्षा दिलाने की व्यवस्था सरकारी स्तर पर होनी चाहिए।विद्वानों ने इस बात पर बल दिया कि श्री कृष्ण जी भारत की सनातन संस्कृति की उज्जवल परंपरा के प्रतीक हैं। जिनका चारित्रिक हनन करना भारतीय आत्मा के साथ खिलवाड़ किए जाने के समान है।
सभा में डॉ धर्मप्रकाश आर्य,डॉ गजराज सिंह आर्य,देव मुनि जी महाराज, पूरन पहलवान ने भी अपने विचार व्यक्त किये। जबकि सभा का संचालन वेद प्रचारिणी सभा के जिला अध्यक्ष प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य ने किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति की नीयत साफ़ रहती है तो परमपिता परमेश्वर की कृपा सारी टीम पर बनी रहती है। जिसके चलते बड़े-बड़े कार्य क्रम सफल हो जाते हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम की सफलता का श्रेय परमपिता परमेश्वर की कृपा और टीम के सभी सहयोगी सदस्यों और ग्राम वासियों को दिया। प्रिंसिपल नरपत सिंह द्वारा इस अवसर पर दूर-दूर से आए हुए लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया उन्होंने प्रतिनिधि सभा के जिला अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य से कहा कि उनके नेतृत्व में संगठन आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रम करती रहे जिससे कि अपने महापुरुषों के वास्तविक चरित्र को युवा पीढ़ी के सामने लाने में सफलता मिल सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता देव मुनि जी महाराज द्वारा की गई । जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आर्य समाज आज जिस गति से जिले में आगे बढ़ रहा है, वह संतोष का विषय है। हम चाहेंगे कि सामूहिक शक्ति का उदय हो और हम यहां से निकल कर पूरे देश को नई दिशा देने में सफल हों।

इस अवसर पर आर्य कुमार सभा के प्रधान यश आर्य और उनकी टीम के अनेक कुमारों को आर्य प्रतिनिधि सभा के जिला अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य द्वारा सम्मानित किया गया । इसके अतिरिक्त आर्य समाज नवादा की टीम के उन सदस्यों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में दिन-रात परिश्रम किया। इनमें मास्टर विजय सिंह आर्य, धर्मवीर सिंह आर्य, राजीव कुमार, नरेंद्र सिंह आदि का नाम उल्लेखनीय है। डॉ आर्य ने कहा कि ग्राम नवादा के लोगों ने जिस प्रकार सामूहिक शक्ति और एकता का परिचय दिया है उसने एक नया इतिहास बनाया है और आज इस गांव से योगेश्वर श्री कृष्ण जी के वास्तविक स्वरूप को नया निखार प्राप्त हुआ है। जिसके लिए जो जो लोग यहां पर आए हैं वे आजीवन इस कार्यक्रम को याद रखेंगे। आर्य समाज नवादा की टीम के सभी सम्मानित सदस्यों ने भविष्य में भी इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया। उनकी ओर से प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य ने लोगों को विश्वास दिलाया कि इस प्रकार के सांस्कृतिक जागरण के कार्यक्रम आगे भी होते रहेंगे।

इस अवसर पर रंगीलाल आर्य , बलबीर सिंह आर्य, प्रिंसिपल नरपत सिंह, मास्टर विजय सिंह आर्य, गजराज सिंह आर्य, मास्टर प्रताप सिंह आर्य योगाचार्य, सुभाष चंद्र आर्य, देवदत्त शर्मा, आर्य समाज अस्तौली के प्रधान गिरिराज सिंह आर्य, जलजीत सिंह आर्य, सुदेश आर्य, अनिल आर्य, रामप्रसाद आर्य, महेंद्र सिंह आर्य ,चरण सिंह आर्य, हरिकिशन आर्य, ब्रह्म सिंह आर्य, राहुल नागर, शेखर आर्य, सतवीर सिंह आर्य, मंत्री पंडित धर्मवीर आर्य, ओमवीर सिंह भाटी एडवोकेट, हेमसिंह आर्य, गिरिराज भाटी, सुभाष चंद्र आर्य, शिव मुनि जी महाराज, बाबूराम आर्य, मनु देव आर्य, विक्रम सिंह आर्य, हरस्वरूप आर्य, स्वामी विवेकानंद जी महाराज, आचार्य इंद्राज सिंह,आचार्य दशरथ कुमार, यज्ञ के ब्रह्मा रहे पूज्य स्वामी सत्यव्रतानंद जी महाराज, डॉ विद्यासागर वर्मा, जीतराम आर्य, सत्यपाल सिंह आर्य, माता भगवती देवी, रीता आर्या आदि सहित बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित थे।

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