इस्लाम और कुरआन :शराब का गुणगान

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दुनिया की सभी साहित्य और धर्म में शराब के बारे में कुछ न कुछ जरूर लिखा गया है .शराब बनाने और पीनेपिलाने का रिवाज हरेक देश में हजारों सालों से हो रहा है .मगर इस्लाम एकमात्र ऐसा धर्म है ,जो शराब को हराम बता कर खुद को सबसे श्रेष्ठ बताता है .यदि हम फारसी और उर्दू काव्य पढ़ें तो देखेंगे कि उनमें सिवाय शराब ,जाम ,साकी,पैमाने ,मयखाना जैसे विषय के अलावा कुछ नहीं मिलेगा .

अरब में भी शराब पीने और बनाने का रिवाज इस्लाम के पाहिले से था.धनवान अरब सीरिया और रोम से मंहगी शराब मंगवाते थे.जो उत्तम दर्जे की मानी जाती थी .सीरिया में बड़े बड़े अंगूर के बाग़ (wine yard )थे जिससे शराब बनाती थी .जब मुहम्मद बारह साल का हो गया था तो उसे उसके चाचा अबूतालिब अपने साथ व्यापार के लिए सीरिया ले जाया करते थे .वहां मुहम्मद ने शराब बनाने का तरीका ,और उसमे डालने वाले मसालों ,और शराब के बर्तनों ,के बारे में काफी जानकारी हासिल कर ली थी .यह जानकारी उसे कुरआन में जन्नत का वर्णन करने में काम आगयी .जब वह कुरआन बनाने लगा .मुहम्मद ने देखा था कि लोग शराब के लिए कुछ भी कर सकते हैं .इसलिए मुहम्मद ने सोचा कि अगर लोगों को शराब का लालच दिया जाए तो वे मुसलमान बन जायेंगे.

पहिले इस्लाम में शराब हराम नहीं थी .खुद कुरआन में शराब को अल्लाह की नेमत कहता है.-
1 -शराब बनाना रोजगार है .
“हम तुम्हें खजूरों ,अंगूर और फलों से बनी एक तेज शराब (strong wine )भी पिलाते हैं ,जिस से तुम नशा भी करते हो .और लोगों को पिलाकर अपनी रोजी भी भी कमाते हो.बुद्धीमान लोगों के लिए यह इशारा है .सूरा -अन नहल 16 :67
उस समय अरब के जादातर लोग शराब पीते थे .इनमे मुहमद के बड़े बड़े सहाबी भी थे .इनके बारे में हम पहिले ही लिख चुके हैं .लेकिन कई लोग ऐसे भी थे जो शराब पीकर मस्जिद में भी चले जाते थे और हंगामा करते थे .इस लिए उन्हें रोका गया था .-
2 -शराब पीकर मस्जिद में नहीं जाओ .
“हे ईमान वालो जब तुम नशे में हो तो मस्जिद में न जाओ ,जब तक तुम्हें यह पता नहीं हो जाए कि तुम क्या कहते हो .सूरा -निसा 4 :43
बाद में शराब के बारे में यही कहा गया कि ,यदि हो सके तो शराब नहीं पियो .अगर तुम सफल हो सको.
3 -शराब सशर्त मना की गयी है –
“हे ईमान वालो ,यह शराबखाने ,जुआ ,और बुतों के स्थान शैतान की जगह हैं ,इनसे बचो ,यदि सफल हो सको .सूरा -मायदा 5 :90
4 -शराब के पैमाने और बर्तन
“बर्तन शीशे के और चांदी के होंगे ,और नाप कर ,या अंदाज से पिलाई जायेगी –
सूरा अद दहर 76 :15
4 -बाहर से शराब लायी जायेगी .
“उन्हें खालिस शराब पिलायी जायेगी जो सीलबंद होगी -सूरा अत ततफीफ 83 :25
5 -शराब की अभिलाषा करें
“इस मुहरबंद शराब की लोगों को बढ़ चढ़ कर अभिलाषा करना चाहिए और पीना चाहिए -सूरा अत तत फीफ 83 :26
6 -पियक्कड़ों को नशा नहीं होगा .
“उनके लिए निथरी शराब के प्याले भर कर घुमाए जायेंगे ,उसमे कोई खराबी नहीं होगी सूरा -अस सफ्फात 37 :45 -47
7 -शुद्ध शराब मिलेगी
“उनको शुद्ध शराब पिलाई जाएगी सूरा अद दहर 76 :21
8 -दो प्रकार के प्याले होंगे
“आबखोरे ,और आफ़ताबे लिए निथरी शराब से भरे प्याले होंगे
.सूरा अल वाकिया 56 :18
यानी दो तरह के बर्तन होंगे ,टोंटी वाले और बिना टोंटी के .
9 -शराब की नहरें होंगी .
“जन्नत का हल यह है की वहां शराब की नदियाँ बहा दी जाएँगी .
सूरा मुहमद 47 :13
इस बयानसे शायद ही कोई व्यक्ति मानेगा कि इस्लाम में शराब हराम है .बल्कि ऐसा लगता है .जैसे अल्लाह शराब का धंदा करता है .या उसने कोई बार BAR खोल रखी है .और कुरआन में उसका विज्ञापन कर दिया हो .
हम शराब के पक्षधर नहीं हैं पर ,मुसलमानों से यही कहते हैं कि –

“कोई गुनाह न करते ,शराब ही पीते ,
ये क्या किया ,कि सब गुनाह किये ,शराब न पी ”

(181/140)

ब्रजनंदन शर्मा (लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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