नोएडा जेवर एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद सरस्वती अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा करने की मांग को लेकर आर्यों का सम्मेलन हुआ संपन्न

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नई दिल्ली। यहां स्थित आर्य समाज ग्रेटर कैलाश फेस 1 में देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे आर्यजनों ने अपना ऐतिहासिक सम्मेलन कर अपनी एकता और शक्ति का परिचय दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश जी महाराज ने कहा कि हमें महर्षि के साथ हुए अन्याय का विरोध पूर्ण शक्ति के साथ करना होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार से यह विशेष अपेक्षा की जाती है कि वह स्वामी दयानंद जी के साथ न्याय करते हुए नोएडा जेवर एयरपोर्ट का नाम महर्षि दयानंद सरस्वती अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा करे। अपने इस मिशन के लिए सभी ऊर्जावान आर्यों को इसी प्रकार की एकता और शक्ति का परिचय देकर आगे बढ़ना होगा। पूरे देश में जनजागरण अभियान चलाकर सारी आर्य शक्ति को संगठन की शक्ति में परिवर्तित करना होगा।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि इसके लिए हमको मैदान की लड़ाई लड़नी पड़ेगी। जब तक हम मैदान में उतरकर कार्यकर्ता के रूप में अपने आप को समर्पित नहीं करेंगे तब तक लक्ष्य प्राप्त किया जाना संभव नहीं होगा।

मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे उत्तर प्रदेश विद्यार्य सभा के प्रधान और अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने कहा कि जब स्वार्थी लोग सांगठनिक शक्ति का दुरुपयोग करने लगते हैं तो संगठन मरने लगते हैं । आर्य समाज का दुर्भाग्य यह रहा है कि इस संगठन की कमान स्वार्थी लोगों के हाथों में चली गई। यदि संगठन के मुखिया बने लोग सही समय पर प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस ओर दिलाते तो यह मांग अब से पूर्व में ही पूर्ण हो सकती थी। उन्होंने कहा कि जब निश्छल लोग आगे आएंगे और संगठन को सही दिशा देने का काम करेंगे तो सारी ऊर्जावान शक्ति एक लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने में सक्षम होगी। स्वामी जी महाराज ने कहा कि कार्यक्रम के संयोजक डॉ राकेश कुमार आर्य जिस प्रकार नि:स्वार्थ भाव से संगठन की सेवा कर रहे हैं, वह बहुत प्रशंसनीय है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि जब तक नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि दयानंद जी के नाम से नहीं होगा तब तक आर्यों को शांत नहीं बैठना है। हमें निरंतर लगे रहना है और लक्ष्य प्राप्ति की साधना में किसी प्रकार का भी आलस्य नहीं दिखाना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दानवीर ठाकुर विक्रम सिंह ने कहा कि अब संघर्ष का समय है और संघर्ष के लिए संगठन की शक्ति का बहुत महत्व है। इसलिए सभी आर्यों को हाथ में हाथ डालकर मानव श्रृंखला बनाकर आगे बढ़ना होगा। तभी हम अपने महर्षि दयानंद के साथ हो रहे दुर्भावना पूर्ण व्यवहार को समाप्त करने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि हमें यथाशीघ्र देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं उड्डयन मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से संपर्क साधना चाहिए। इसके लिए प्रतिनिधिमंडल नियुक्त किया जाए। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि ये नेता आर्य समाज की इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर इसे यथावत स्वीकार करेंगे।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद जी के नाम से इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नामकरण करने से दुनिया को भारतवर्ष के बारे में पता चलेगा कि यह ऋषियों का देश है। यह इस देश का दुर्भाग्य रहा कि 1947 के बाद एक व्यक्ति को इस देश का बापू बना दिया गया तो दूसरे को चाचा बना दिया गया। जबकि दादा अर्थात दयानंद की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। डॉ आर्य ने कहा कि यदि हम दादा को पहचान लेंगे तो भारत की आर्य संस्कृति अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा तक पहुंच जाएगी।
अपने ऋषियों की पहचान कराना और इस देश को ऋषियों का देश कहलाना ही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आगामी 14 सितंबर को सभी आर्य समाजों की ओर से अपने-अपने प्रदेशों के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के नाम संबोधित पत्र अपने-अपने जिलों पर जिलाधिकारी को और तहसीलों में उपजिलाधिकारी को देना होगा, उसके बाद की रूपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी 13 सितंबर को संघर्ष समिति की संचालक समिति के गठन के लिए एक विशेष बैठक ग्रेटर नोएडा में आहूत की जाएगी। जिसमें कर्मठ और ईमानदार लोगों को सम्मिलित किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उगता भारत समाचार पत्र के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद जी महाराज ने ही 1857 की क्रांति का सूत्रपात कराया था। उनका वह महत्वपूर्ण योगदान ही हमारे देश की आजादी को लाने का महत्वपूर्ण कारण बना था। उनके द्वारा दिए गए दिशा निर्देशन में ही आजादी की लड़ाई आगे बढ़ी। धन सिंह कोतवाल, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस तक महर्षि दयानंद के विचारों की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसे परम तपस्वी महापुरुष को भुलाना किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा पाप है। इसलिए केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार को आर्य समाज की इस मांग की ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक क्रांतिकारी और बलिदानी वीर पुरुष पर स्वामी दयानंद जी महाराज का सीधा प्रभाव है।
इसी श्रृंखला में कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ धर्मप्रकाश आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस विशेष आर्य धर्मसंसद में पारित प्रस्ताव पढ़ कर सुनाया। जिस पर उपस्थित सभी महानुभावों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन व्यक्त किया। डॉ धर्म प्रकाश आर्य ने कहा कि अब यह कारवां चल पड़ा है और यह तभी रुकेगा जब इसे सफलता मिल जाएगी। हम आर्य लोग राष्ट्र प्रेमी होते हैं। हम किसी भी प्रकार का वितंडा करना उचित नहीं मानते परंतु अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण हमारी रगों में कूट-कूट कर भरा है। स्वामी ओमानंद जी महाराज ने अपना ओजस्वी वक्तव्य देते हुए कहा कि हमें आर्यों के ऊर्जावान इतिहास से प्रेरणा लेकर अपने पूर्वजों के जैसा ही कार्य करना होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमें यथाशीघ्र उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से इस संबंध में मिलना चाहिए।

वरिष्ठ समाज सेवी और एमडीएच के प्रतिनिधि महात्मा जितेंद्र भाटिया ने कहा कि जिन लोगों ने देश के इतिहास का और आर्य संस्कृति का नाश किया उन्हीं लोगों को इस देश में विशेष सम्मान दिया गया। परंतु आज आर्य समाज जाग चुका है और अब उन सारे लोगों का चुन चुनकर सफाया किया जाएगा जो आर्य संस्कृति के हत्यारे रहे हैं।
डॉ युद्धवीर सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत आर्यों का देश है और यह पवित्र भूमि परमेश्वर ने आर्यों को ही प्रदान की है। आज आर्य अपने जन्मसिद्ध अधिकार को पाने के लिए उठ खड़े हुए हैं। जिस संगठन ने महर्षि दयानंद जी से प्रेरणा लेकर भारत के स्वाधीनता आंदोलन में बढ़ चढ़कर योगदान दिया, उसकी इतनी उपेक्षा करना दुर्भाग्य का विषय रहा है। आर्य समाज के लिए समर्पित और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से समाज और राष्ट्र की सेवा करने वाले गजराज सिंह आर्य (फरीदाबाद) ने कहा कि शिक्षा संस्कारों के माध्यम से ही स्वामी दयानंद जी को हम सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। परंतु उससे भी महत्वपूर्ण है कि अपने महापुरुष को हम उचित सम्मान दिलाने के लिए एक मंच पर जाकर आवाज लगाएं।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करने के लिए बीज भाषण के रूप में ब्रह्मचारी आर्य सागर ने अपने विचार व्यक्त किये और महर्षि दयानंद जी महाराज द्वारा शस्त्र और शास्त्र का समन्वय करके चलने की नीति को राष्ट्र के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने अपने बीज भाषण में कहा कि महर्षि दयानंद जी महाराज के द्वारा अनेक क्रांतिकारियों को तैयार किया गया जिसके परिणाम स्वरूप भारत आजाद हुआ। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर जी जैसे अनेक क्रांतिकारी थे जो महर्षि दयानंद जी के मानस पुत्र के रूप में काम करते रहे। आज यदि उन लोगों के नाम से किसी हवाई अड्डे का नाम हो सकता है तो उनके प्रेरणा स्रोत महर्षि दयानंद जी के नाम से किसी हवाई अड्डे का नाम क्यों नहीं रखा जा सकता ?
गाजियाबाद आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से सम्मेलन को संबोधित करते हुए आचार्य कृष्ण मुनि जी महाराज ने कहा कि हमको यथाशीघ्र एक धन संग्रह समिति बना लेनी चाहिए। क्योंकि कार्यक्रमों को सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए धन संग्रह समिति का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस समिति में सभी लोग पर चढ़कर अपना योगदान करें।

महिला शक्ति की ओर से इस अवसर पर इटली से चलकर आई श्रीमती सदभावना भारद्वाज और डॉ कुसुम भारद्वाज ने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वामी जी महाराज पहले व्यक्ति थे जिन्होंने नारी शक्ति का उचित सम्मान करने के लिए समाज को प्रेरित किया।
श्रीमती ब्रह्मवती देवी ने इस अवसर पर कहा कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात करवा कर अपना विशेष योगदान देना चाहेंगी।
नेपाल प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहे श्री तेजनारायण ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नेपाल और भारत दोनों भाई-भाई हैं और हमें भारत में आकर बहुत ही अपनेपन का एहसास होता है। हम यही भावना भारत के लोगों से भी चाहते हैं और चाहते हैं कि दोनों देश मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने का काम करें।
मुजफ्फरनगर आर्य प्रतिनिधि सभा के जिला प्रधान सत्येंद्र आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि आज यह बहुत ही हर्ष का विषय है कि संपूर्ण भारतवर्ष ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सारी आर्य शक्ति सकारात्मकता के साथ एक मंच पर आ रही है। इसी प्रकार मेरठ आर्य प्रतिनिधि सभा के जिलाध्यक्ष जिले सिंह आर्य ने कहा कि हम सब ऋषि के सिपाही हैं और पीछे हटना हमको स्वीकार नहीं है। बुलंदशहर से प्राचार्य गजेंद्र सिंह आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऊर्जावान नेतृत्व ही किसी संगठन को आगे बढ़ा सकता है। हम सबको यदि यह मंच मिला है तो हम इसका सदुपयोग करें और अपने महर्षि को उचित सम्मान दिलाने के लक्ष्य को प्राप्त करें। आचार्य कुंवरपाल शास्त्री, सतीश कुमार डूडेजा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सभी आर्य समाजों का आवाहन किया कि वह सब अपने-अपने स्तर पर भी अपने प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपें और प्रत्येक साप्ताहिक सत्संग में ज्ञापन तैयार कर सरकारों के लिए प्रेषित करें। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व सचिव मास्टर ज्ञानेंद्र सिंह आर्य और पारसौल से पहलवान पूरन सिंह आर्य , पूर्व राजदूत रहे डॉ विद्यासागर वर्मा, डॉ वीरपाल वेदालंकार , श्री हरिश्चंद्र शास्त्री की भी विशेष उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त अजय कुमार आर्य एडवोकेट गाजियाबाद, महावीर सिंह आर्य, महेंद्र सिंह आर्य, प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य, चमन शास्त्री, पवन आर्य, सुभाष चंद्र आर्य, यश आर्य सहित पलवल फरीदाबाद के उत्साही कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था में अपना विशेष योगदान दिया।

सभा में गुजरात बीकानेर, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, बागपत, दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल सहित देश के सुदूरस्थ क्षेत्रों से चलकर आर्यजन पहुंचे। गुरुग्राम से अनिल कुमार नरूला, फरीदाबाद से सुधीर कुमार बंसल, आर्य बेगराज नागर, समाजसेवी यशपाल आर्य, हरिद्वार से श्री हाकम सिंह आर्य , नकुड़ जिला प्रधान राजकुमार आर्य, आर्य समाज मुल्तान नगर नई दिल्ली के प्रधान राजकुमार आर्य, शाहजहांपुर से विमलेश कुमार आर्य, भुवनेश गुप्ता ,संजय गुप्ता, संभल से समाज सेवी वेदवसु आर्य, सहित बहजोई से श्री प्रदीप आर्य और उनके साथी आर्य समाज सिकंदराबाद से प्रधान रमेश सिंह आर्य, नरेंद्र राठी, नरेश आर्य समाज हाजीपुर नोएडा के प्रधान बाबूराम आर्य, आर्य समाज मुर्शदपुर के प्रधान राजेंद्र सिंह आर्य ,आर्य समाज पल्ला के प्रधान राजेंद्र सिंह आर्य प्रेमचंद आर्य, प्रदीप आर्य, वरिष्ठ समाज सेवी रामेश्वर सरपंच आर्य समाज महावड़ से प्रधान टीकम सिंह , आर्य समाज रानोली से प्रधान ब्रह्मपाल आर्य , आर्य समाज कोंडली से प्रधान जयप्रकाश आर्य, अनारसिंह आर्य ,जीतराम आर्य, आर्य समाज सूरजपुर से मंत्री धर्मवीर आर्य, सुभाष चंद्र आर्य , आर्य समाज नियाना से प्रधान हेमसिंह आर्य, आर्य समाज अमरपुर से जिला महिला टीम की अध्यक्ष संगीता आर्य, नीतू आर्या ,माता भगवती ,आर्य समाज घोड़ी बछेड़ा से प्रधान रविंद्र आर्य आर्य समाज अस्तौली से सुदेश आर्य,आर्य समाज दादरी से रामनिवास आर्य , कैलाश आर्य आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्मचारी आर्य सागर द्वारा किया गया।

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