बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में सम्पन्न हुई परिवर्तन योगेश संस्थान की ’37वीं सुदर्शन सभा’: डॉ आर्य को तक्षशिला विद्वत्ता सम्मान से किया गया सम्मानित

Sudarshan sabha

वाराणसी। काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, 14 जून, 2026 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के परिसर में ’37वीं सुदर्शन सभा’ का भव्य आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम ‘परिवर्तन योगेश संस्थान व उसके उपखण्ड ‘महर्षि सत्य सनातन अखाड़ा’ और ‘महर्षि सत्य सनातन हिंदी विद्यापीठ’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस सभा में सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य को तक्षशिला विद्वत्ता सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके अतिरिक्त सभा के माध्यम से देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्वानों, शिक्षकों, पत्रकारों और आध्यात्मिक साधकों को उनकी सेवाओं के लिए भी सम्मानित किया गया। डॉ आर्य ने मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि परिवर्तन योगेश संस्थान और उसके उपखंड मिलकर जिस अभियान को चला रहे हैं वह निश्चय ही भारत को विश्व गुरु बनाएगा। उन्होंने कहा कि भारत का सही इतिहास पढ़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश का पहला शिक्षा मंत्री एक ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो पहले से ही भारत से द्वेष भाव रखता था, वह उचित नहीं था । तत्कालीन सरकार के प्रधानमंत्री नेहरू के द्वारा लिया गया यह निर्णय देश के लिए घातक सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास के साथ की गई छेड़छाड़ को आज सही करने का समय है। हमें अपने सनातन मूल्यों के प्रति अपने बच्चों को जागरूक करने की आवश्यकता है। सनातन की चिंता करने से काम नहीं चलेगा, सनातन के चिंतन को बच्चों के भीतर भरने से काम चलेगा। डॉ आर्य ने कहा कि जो लोग आज यह सोचते हैं कि भारत के इतिहास की शुरुआत सिंधु सभ्यता से हुई, वह भारत के इतिहास के साथ बहुत बड़ा छल करते हैं। हमें ध्यान रखना चाहिए कि मनु महाराज ने सरयू के किनारे पर अयोध्या नगरी को बसाकर भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास का शुभारंभ किया था। उन्होंने कहा कि हम राम और कृष्ण की संतान हैं।जिन्होंने कभी भी राष्ट्र विरोधी, धर्म विरोधी और देश विरोधी शक्तियों को सहन नहीं किया बल्कि उनके विरुद्ध कठोरता का प्रदर्शन किया । आज भी हमें इसी प्रकार देश ,धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य करना है।
कार्यक्रम के आयोजक संयोजक रहे योगेश तरेहन ने कार्यक्रम के बारे में बताया कि इस कार्यक्रम में वक्ताओं का मुख्य उद्देश्य भारत की सनातन परंपराओं की रक्षा करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में जो लोग विशेष कार्य कर रहे हैं उनकी प्रतिभा को और अधिक मुखरित करना रहा। वक्ताओं ने राष्ट्रवादी शक्तियों को मजबूत करने पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि काशी हमारी सनातन परंपरा का केंद्र रहा है। आज भी यह हमारे लिए आध्यात्मिक तीर्थ स्थल जैसा है। यहां आकर हमें सनातन परंपराओं का बोध होता है। इसी उद्देश्य के लिए समर्पित होकर सुदर्शन सभाएं काम कर रही हैं। जिस प्रकार सुदर्शन चक्र का उद्देश्य नकारात्मक शक्तियों का विध्वंस और सकारात्मक शक्तियों का विकास करना था वही उद्देश्य इस सुदर्शन सभा का है। आज देश में जितनी भर भी नकारात्मक शक्तियां अपनी सोच को फैलाने का काम कर रही हैं उन सब पर प्रतिबंध लगाना भारत की सुदर्शन संस्कृति का विस्तार करना होगा।
कार्यक्रम का समापन करते हुए मंच संचालक श्री चंद्रभूषण मिश्र ने कहा कि बनारस की यह पवित्र धर्म भूमि इस आयोजन में विभिन्न प्रतिभाओं को सम्मानित करके अपने आप को धन्य अनुभव कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की पवित्र भूमि का संदेश प्राचीन काल से ही काशी की इस धर्म भूमि से प्रसारित होता रहा है। आज भी इसके लिए हम सबको मिलकर काम करने की आवश्यकता है। जिन लोगों ने भारत के सनातन को क्षतिग्रस्त किया है उनके मंसूबे आज भी यथावत काम कर रहे हैं । हम सबको सावधान होकर देश को प्रगति की राह पर ले जाने के लिए मानवतावादी सोच अपना कर भी राष्ट्रवादी बनना होगा। राष्ट्रवादी बनने का अभिप्राय है कि यदि कोई शक्ति हमारा विनाश करना चाहती है तो उसके विरुद्ध सजग और सावधान रहना है।

37वीं सुदर्शन सभा में सम्मानित होने वाली प्रमुख श्रेणियों में सम्मिलित व्यक्तियों के नाम

भारत रत्न काशी महामना पुरस्कार: डॉ. हरि सिंह कड़वासरा, डॉ. अनुभा पुंडीर, डॉ. श्रीधर गजानन ग्रामोपाध्ये, डॉ. आनंद प्रकाश मिश्रा, आचार्य भविन बी देसाई, डॉ. महेंद्र आनंद चिलबुले, डॉ. त्रिवेणी शंकर मिश्रा, आत्मानंद जी महाराज एवं डॉ. हिमांशु शर्मा। भारत साहित्य रत्न: चंद्रिका राम, डॉ. नवीन चतुर्वेदी, श्रीमती करुणा शर्मा, डॉ. ब्रजेंद्र कुमार बाजपेयी, डॉ. आनंद प्रकाश मिश्रा एवं डॉ. राजेश तकयार।
श्रेष्ठ शिक्षक एवार्ड : डॉ. विजय रुक्मिणी महादेव घुबले और डॉ. विशाल कुमार यादव।
ज्योतिष रत्न: आचार्य भाविन बी देसाई, संजय एच. तिवारी, डॉ. विक्रम कर और डॉ. श्री. गणेश सतीशराव चिंचोलीकर। कथा भास्कर : कथा व्यास श्रद्धेेेय महर्षि श्री राजेन्द्र प्रसाद विश्वकर्मा।
राष्ट्र गौरव श्री सम्मान : शिवानी सोनी।
हिन्दू राष्ट्र रत्न सम्मान :सौ भारती अभिजित जामोदे निवाणे, वंदना घनश्याम मेटकर एवं हीरा सिंह धानिक।
श्री नारद पत्रकार सम्मान : मुकेश सल्होत्रा (चेयरमैन – नेशन खबर न्यूज़ चैनल) .
सनातन गौरव सम्मान :आचार्य डॉ. देव कुमार पाण्डेय मणिकर्णिका : डॉ. कालिन्दी बृजेश त्रिपाठी।
अन्य प्रमुख संस्कार/उपाधियाँ :
पीठाधीश्वर: महामंडलेश्वर निरंकारनंद महाराज जी बड़ोदरा गुजरात द्वारा देय ॐ रुद्राक्ष दीक्षा : आचार्य भाविन बी देसाई, डाॅ विजय रुकिमणी महादेव घुबळे, वंदना घनश्याम मेटकर एवं संजय एच. तिवारी।
पट्टाभिषेक: डॉ. विकास शर्मा, अभिनव पाण्डेय जी महाराज और सत्येन्द्र कुमार शुक्ला ‘मनु’।
परम् गुरु उपाधि: उदयनाथ महाराज। सद्गृहस्थ संत : डॉ. हरिश्चंद्र मिश्र। आचार्य पद/उपाधि एवं आदर्श चरित्र भारत रत्न :डॉ. जय शंकर राय। विद्या सागर (डीलिट समतुल्य): डॉ. रवि द्विवेदी।
यह आयोजन शिक्षा, साहित्य, ज्योतिष और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। आयोजन समिति सदस्य : ॐ ऋषि चंद्रभूषण मिश्र, डॉ. योगेश तरेहन, सीमा सिंह. डॉ. रवि चतुर्वेदी, डॉ. हरिश्चन्द्र मिश्र, पत्रकार संजय शर्मा डॉ. भावना शर्मा, राजेश कुमार सौंखिया एवं मुकेश सल्होत्रा। कार्यक्रम में सहभागिता रही – विश्व हिन्दू परिषद, पिता संस्था, न्यू ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन, उत्तर प्रदेश पत्रकार परिषद एवं उर्मिला श्री ट्रस्ट।

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