ग्रेटर नोएडा में संपन्न हुआ विश्व शांति यज्ञ: वक्ताओं ने कहा- वैदिक चिंतन से ही आ सकती है विश्व शांति

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ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित ग्राम अमरपुर में विशाल विश्व शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के आयोजक रहे धनीराम आर्य ने बताया कि यह यज्ञ विश्व शांति के लिए संपन्न कराया गया । जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना और मुख्य वक्ता के रूप में आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के प्रधान डॉ राकेश कुमार आर्य उपस्थित रहे। महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना ने कहा कि वेद परमात्मा प्रदत्त धर्म पुस्तक है जो कि मनुष्य को मनुष्य बनने की शिक्षा और प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वैदिक चिंतन मनुष्य को भीतर से सहज और सरल बनाता है। उसके जीवन में आनंद की अनुभूति कराता है । प्रत्येक प्रकार की सांप्रदायिकता की संकीर्णता से उसे मुक्त कर धर्म की वास्तविक हृदयग्राही अवस्था से परिचित कराता है । इसलिए वैदिक धर्म को अपनाकर ही हम सामाजिक और वैश्विक शांति स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य की सबसे बड़ी शत्रु सांप्रदायिकता है जो कि उसके भीतर सांप्रदायिक पुस्तकों के माध्यम से आती है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में या संसार के अन्य देशों में जो संविधान काम कर रहे हैं उनमें जितना भी उत्कृष्ट मानव कल्याणकारी चिंतन मिलता है ,वह सब पहले से ही वेदों में उपस्थित है। प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि वेद के अतिरिक्त संसार के अन्य जितने भी संप्रदाय हैं उनकी अपनी मजहबी पुस्तक मनुष्य को मनुष्य न बनाकर सांप्रदायिक व्यक्ति के रूप में पहचान दिलाती हैं । डॉ आर्य ने कहा कि वेद सत्य बोलने और धर्म पर चलने की आज्ञा देता है । तैत्तिरीय उपनिषद इस बात की स्पष्ट घोषणा करता है कि मनुष्य को इसी मार्ग से शांति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि मजहब या रिलिजन धर्म के पर्यायवाची नहीं हैं। धर्म मनुष्य की आंतरिक चेतना से जुड़ा हुआ विषय है जो उसे संसार के लिए उपयोगी बनाता है। उन्होंने कहा कि महाभारत में भीष्म पितामह युधिष्ठिर को राजधर्म विषयक उपदेश देते हुए कहते हैं कि शांति प्राप्त करने के लिए मनुष्य को दूसरे व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जो उसे अपने प्रति अच्छा नहीं लगता। उन्होंने कहा कि संपूर्ण वसुधा को अपना परिवार मानने की पवित्र भावना केवल भारतवर्ष में ही मिलती है। इसके अतिरिक्त सभी सुखी हों, और सभी निरोगी हों,ऐसी प्रार्थना भी भारत के लोग ही करते हैं इन छोटी-छोटी चीजों को अपना कर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।

डॉ आर्य ने कहा कि हमारे देश में यज्ञ की संस्कृति मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। स्वस्तिवाचन और शांतिकरण के मंत्र भी हमें विश्व शांति स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए हमें अपनी जीवन शैली को यज्ञ की पवित्र जीवन शैली के साथ जोड़ना चाहिए।
भाषा प्रचारिणी सभा के जिला प्रधान ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि धर्म समन्वय सिखाता है और यह समन्वय ही शांति का पर्यायवाची है। वेद में आया शांति पाठ हमें समस्त ब्रह्मांड की शांति व्यवस्था के बारे में परिचित कराता है। उन्होंने कहा कि जब जल, आकाश, अंतरिक्ष ,वनस्पति आदि में सर्वत्र शांति की व्यवस्था कायम है अर्थात सबमें एक अनुशासित समन्वय बना हुआ है तो ऐसे ही समन्वय को हमें अपने हृदय में बसा लेना चाहिए। इससे घर, घर से गांव, गांव से समाज और समाज से विश्व में शांति स्थापित होगी। धर्म आर्यसभा के जिला अध्यक्ष स्वामी वेदानंद जी महाराज ने इस अवसर पर सबको आशीर्वाद दिया और वेद अध्ययन की प्रवृत्ति बढ़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैदिक चिंतन संसार का आदर्श और उत्कृष्ट चिंतन है। जिसके समक्ष संसार भर के सभी मजहबों की पुस्तकों के चिंतन कहीं दिखते नहीं है। महात्मा आनंद स्वामी जी ने भी अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यज्ञ की संस्कृति के साथ जुड़कर ही हम मानव समाज का कल्याण कर सकते हैं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रिंसिपल नरपत सिंह ने उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि हमारे ऋषियों ने यज्ञोपवीत के तीन धागे बनाए परंतु इनका गूढ़ अर्थ यदि हम समझ लें तो हमें कई प्रकार की मर्यादाओं का ज्ञान हो जाता है और जब व्यक्ति मर्यादाओं के मार्ग पर आगे बढ़ने लगता है तो उसके जीवन में शांति वास करने लगती है।

इस अवसर पर निर्णय लिया गया कि चातुर्मास के इन महीनों में आर्य प्रतिनिधि सभा पूरे जनपद में घूम-घूम कर चारों वेदों का यज्ञ संपन्न करावेगी। जिलाध्यक्ष डॉ आर्य ने बताया कि आगामी यज्ञों में आर्य समाज बिसरख ग्रेटर नोएडा, आर्य समाज हाजीपुर ,आर्य समाज चूहड़पुर ,आर्य समाज मुर्शदपुर, आर्य समाज अस्तौली ,आर्य समाज नवादा सहित कई अन्य आर्य समाजों में भी कार्यक्रम अभी से निश्चित किये जा चुके हैं। जिससे पूरे क्षेत्र में यज्ञ की सुगंधि फैले और लोगों को अपने सनातन धर्म को जानने का अवसर प्राप्त हो। वेद प्रचारिणी सभा के जिला अध्यक्ष प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य द्वारा इस कार्यक्रम का संचालन किया गया । जबकि यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य दशरथ कुमार रहे। जिन्होंने बहुत ही सुंदर विधि विधान से यज्ञ संपन्न करवाया। जबकि सहदेव समर्पित ने भजन के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता सरदार सिंह बंसल, महावीर सिंह आर्य, प्रिंसिपल नरपत सिंह, रंगीलाल आर्य, रामप्रसाद आर्य, हेम सिंह आर्य, गजराज सिंह आर्य, बाबूराम आर्य, अनार सिंह, आर्य जीतराम आर्य , पवन आर्य, किशन लाल आर्य, गिरिराज आर्य , कमल सिंह आर्य, सहदेव समर्पित आदि लोग उपस्थित रहे।

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