Pak atankvad terror

पाकिस्तान का निर्माण सांप्रदायिक घृणा के आधार पर हुआ था। सांप्रदायिकता कभी भी मानवता की समर्थक नहीं होती है। इसके अतिरिक्त एक सामान्य सिद्धांत यह भी है कि यदि आप दूसरों के लिए कुआं खोदते हो तो एक दिन स्वयं ही उस कुएं में गिरोगे। अपने मूल देश हिंदुस्तान से नफरत करके पाकिस्तान अलग हुआ था। इतना ही नहीं , अपने इस मूल देश भारत अथवा हिंदुस्तान को बर्बाद करने के अरमान पालकर और फिर एक दिन सारे हिंदुस्तान को अपनी हुकूमत के नीचे लाने का सपना संजोकर इस देश ने आगे बढ़ना आरंभ किया। बात स्पष्ट है कि जिसका जन्म ही घृणा के आधार पर हुआ था, वह प्यार प्रीत की बात कर ही नहीं सकता था। यही कारण है कि पाकिस्तान ने एक स्वतंत्र देश के रूप में आगे बढ़ाlना तो आरंभ कर दिया, परंतु वह अपने देश में भी मानवता का विकास नहीं कर पाया। उसने बलूचिस्तान के लोगों को बलोच कहकर पुकारा। सिंध के लोगों को सिंधी, बांग्लादेश ( तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के लोगों को बंगाली और इसी प्रकार पंजाब के लोगों को पंजाबी कहकर पुकारा। जो लोग पाकिस्तान प्रेम के वशीभूत होकर हिंदुस्तान को छोड़कर उस समय पाकिस्तान पहुंचे थे, उनको उसने मुहाजिर कहकर संबोधित किया। पहले दिन से ही सेना और पंजाब के लोग राजनीति में हावी प्रभावी रहे। जिसके कारण अन्य प्रान्तों के लोग इनकी सामूहिक उपेक्षा के पात्र बन गए। परिणाम स्वरुप 1971 में पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित हुआ। जिसे हम आजकल बांग्लादेश के रूप में जानते हैं। सांप्रदायिक घृणा के आधार पर अस्तित्व में आए पाकिस्तान का यह पहला विभाजन था । इसके उपरांत भी उसने अपनी रीति नीति में परिवर्तन नहीं किया। हिंदुओं के साथ तो और भी अधिक अत्याचार वहां पर किए गए। स्वाधीनता के समय लगभग 3 करोड हिंदू वहां पर था , जो आज घटकर 20 लाख से भी कम हो गया है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान मानवतावादी राष्ट्र के रूप में कभी स्थापित नहीं हुआ। उसी का परिणाम है कि पाकिस्तान के भीतर आज भी भयानक स्तर पर अंतर विरोध विद्यमान है। लगभग गृह युद्ध से जूझता पाकिस्तान अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। इसके उपरांत भी वह इस्लाम का नेता बनना चाहता है। वहां के सेना अध्यक्ष असीम मुनीर ने कहा है कि हम अपनी सेना को इस्लाम का पाठ पढ़ाकर प्रशिक्षित करते हैं । इसका अभिप्राय हुआ कि वह अपनी सेना को भी सांप्रदायिक बनाकर देश की सुरक्षा में लगाते हैं। ऐसी सेना से आप क्या अपेक्षा करेंगे ? निश्चित रूप से वह युद्ध या दंगों के समय हिंदुओं के साथ अत्याचार ही करेगी। इसके अतिरिक्त कुछ नहीं करेगी। जिन-जिन वर्गों को ये सेना इस्लाम के फंडामेंटलिज्म के विरुद्ध कार्य करते हुए देखेगी या अपनी स्वाधीनता की मांग करते हुए देखेगी, उसे यह निर्दयता के साथ कुचलने का काम करेगी। वास्तविकता भी यही है कि वहां की सेना किसी कार्य नीति पर चलती रही है। जिसके कारण पाकिस्तान की सेना एक राष्ट्रीय सेना के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं कर पाई है।

अपनी घरेलू समस्याओं से जूझते पाकिस्तान को इसके उपरांत भी बुद्धि नहीं आई है । वह निरंतर भारत को अस्थिर करने के कार्यों में लगा रहता है। जबकि वह भली प्रकार जानता है कि भारत ने एक बार नहीं कई बार उसका मुंह पीटा है। इस बार तो भारत ने उसकी कमर ही तोड़ दी है ।भारत के पंजाब में वह आतंकवाद को बढ़ाने का काम करता रहा है। स्वाधीनता के पश्चात कश्मीर में जो कुछ भी होता रहा है, उसमें भी पाकिस्तान का ही हाथ रहा है।
इस्लाम का ‘ भाईचारा’ पाकिस्तान में काम नहीं आ रहा है। वहां पर यह अपने ही भाइयों को भी अपना चारा बना रहा है।

जो मुसलमान भारत से पाकिस्तान गए थे, उनको भी यह उपेक्षा के दृष्टिकोण से देखता है। भारत के धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं को पाकिस्तान की इस प्रकार की नीति को समझना चाहिए कि जिस देश के लोग अपने ही धर्म के लोगों को भी अपना भाई नहीं मानते हों अथवा उनके साथ भाईचारा स्थापित नहीं कर पाए हों, वे हिंदुओं के साथ क्या भाईचारा स्थापित कर पाएंगे ? भारत के कट्टरपंथी मुसलमानों पर यह बात पूर्णतया लागू होती है।

अब जब पहलगाम घटना को लेकर भारत ने पाकिस्तान की अच्छी कुटाई कर दी है तो सीजफायर को लेकर वहां की सरकार ने कहा है कि इस समय हमें अपने देश को बचाने की आवश्यकता है। भारत से युद्ध के समय पाकिस्तान की सरकार को यह आभास हो गया था कि यदि यह युद्ध थोड़ा सा भी खिंच गया तो उसके कई टुकड़े हो जाएंगे। इस्लाम जगत का नेता बनने का उसका अरमान सदा सदा के लिए ठंडा पड़ जाएगा और वह इतिहास की वस्तु बन कर रह जाएगा। इसीलिए वह अमेरिका जैसी शक्तियों के सामने जाकर गिड़गिड़ाने लगा और कहने लगा कि जैसे भी हो भारत के साथ सीजफायर करा दो। सारे संसार के लोगों ने देखा कि पाकिस्तान न केवल भारत के हाथों अपनी धुनाई करवा बैठा है अपितु उसका वास्तविक चेहरा भी सबके सामने आ गया है। वह जिस नकाब को ओढकर चल रहा था, उसका वह नकाब उतर गया है। सारे विश्व ने पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश की मान्यता देकर उसे उसकी वास्तविक पहचान दी है। पाकिस्तान के आतंकवादी चेहरे को सारा इस्लामी जगत भी जानता है यही कारण है कि अभी हाल ही में जब भारत इसकी कुटाई कर रहा था तो खुलकर कोई भी इस्लामिक देश उसके समर्थन में नहीं आया। पाकिस्तान ने यह समझ लिया था कि यदि उसने भारत के साथ इस समय अपने तनाव को कम नहीं किया तो उस पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की ओर से कई प्रकार के प्रतिबंध लगने निश्चित है। अपनी आर्थिक बदहाली से जूझता पाकिस्तान समझ गया कि भारत जैसे देश के साथ पंगा लेना कितना महंगा पड़ सकता है ? उसने भूखा रहकर परमाणु बम बनाया था, परन्तु भारत ने उसके परमाणु ब्लैकमेलिंग के खेल को असफल कर दिया।

इसी समय बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने अपनी सक्रियता बढ़ाई और पाकिस्तान के लिए भीतरी मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत की। कुछ लोगों का कहना है कि पाकिस्तान भारत के साथ तनाव बढ़ाकर कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में एक बार फिर सफल हो गया है ? उन लोगों को यह समझना चाहिए कि भारत ने पाकिस्तान की धुनाई करके सारी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को यह साफ संकेत दे दिया है कि पाक अधिकृत कश्मीर केवल और केवल भारत का है और उसमें किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था या किसी भी दूसरे देश को अब पंच नहीं बनाया जाएगा। पाकिस्तान द्वारा कब्जा किए गए कश्मीर को भारत अब लेकर ही रहेगा। इसके साथ ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान को चुनौती देकर अपनी समस्या का अंतरराष्ट्रीयकरण अवश्य कर दिया है।

यदि कल को बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होता है तो इसे पहलगाम की घटना का ही फलितार्थ माना जाना चाहिए।

भारत और पाकिस्तान का चाहे सीजफायर हो गया हो, परंतु पाकिस्तान का भीतरी सीजफायर अभी नहीं हुआ है , पहलगाम की घटना और ऑपरेशन सिंदूर का अंतिम परिणाम अभी आना शेष है। हमें थोड़ी सी प्रतीक्षा करनी होगी। थोड़ा धैर्य रखिए। पाक अधिकृत कश्मीर आपको मिलेगा और जिस दिन आप पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अंग बनाने में सफल होंगे, उसी दिन आपका ऑपरेशन सिंदूर सफल हो जाएगा। परिस्थितियां बता रही हैं कि इस अंतिम परिणाम को प्राप्त करना अब भारत के लिए दूर की कौड़ी नहीं है। इसमें भारत को कुछ अधिक करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, सांप्रदायिक घृणा के विष से भरा पाकिस्तान का घड़ा फूटना और टूटना निश्चित है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं)

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