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संपादकीय

धर्म-अध्यात्म

अन्य कार्य करते हुए ईश्वर के उपकारों का चिंतन आवश्यक है

ओ३म् ========== मनुष्य को जीवन में अनेक कार्य करने होते हैं। उसे अपने निजी, पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों की पूर्ति के लिये समय देना पड़ता...

मंदिर में पंचतत्वों की उपस्थिति को हम कैसे पहचानें?

डॉ. आनन्द वर्धन (लेखक म्यूजियम एसोशिएशन ऑफ इंडिया के सचिव हैं।) दुनिया की सभी सभ्यताओं और संस्कृतियों में धार्मिक प्रतीकों का व्यापक प्रयोग किया गया...

यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है जिसे करने से वायुमंडल शुद्ध होता है : डॉक्टर अन्नपूर्णा

ओ३म् =========== यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है। इस कारण वेदभक्त आर्यसमाज के अनुयायी वेदाज्ञा के अनुसार नियमित यज्ञ करते हैं व दूसरों को करने की प्रेरणा...

जीवात्मा का जन्म मरण उसके कर्मों में ईश्वर के अधीन है

ओ३म् =========== हम मनुष्य शरीरधारी होने के कारण मनुष्य कहलाते हैं। हमारे भीतर जो जीवात्मा है वह सब प्राणियों में एक समान है। प्राणियों में...

वेद ईश्वर प्रदत्त ज्ञान और विद्या के ग्रंथ है

ओ३म् ========== संसार में जितनी भी ज्ञान की पुस्तकें हैं वह सब मनुष्यों ने ही लिखी व प्रकाशित की हैं। ज्ञान के आदि स्रोत पर...

मनु महाराज ने यह व्यवस्था दी कि ब्राह्मण शूद्र बन सकता और शूद्र ब्राह्मण हो सकता है

रवि शंकर मनुस्मृति में वर्ण की ही चर्चा है, जाति की नहीं। परंतु मनु में जन्मना जाति का निषेध अवश्य पाया जाता है। उदाहरण के...