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इतिहास के पन्नों से

संपादकीय

धर्म-अध्यात्म

हम सब कुछ नहीं कर सकते

  हर व्यक्ति के अंदर एक मजबूत पक्ष होता है उसे अपने उस पक्ष को ढूंढनें की कोशिश करनी चाहिए। कई क्षेत्रों मे हाथ बटाने...

कालसर्प योग एवं मंगली दोष

शास्त्रों ने जो भी नीति नियामक हमारे सामने रखे हैं उनमें से एक है *'देयं परं किं ह्यभयं जनस्य. . . . '* जिस पर...

वेदों को अपना लेने से विश्व की सब समस्याओं का समाधान

ओ३म् =============== हमारा विश्व अनेक देशों में बंटा हुआ है। सभी देशों के अपने अपने मत, विचारधारायें तथा परम्परायें आदि हैं। कुछ पड़ोसी देशों में...

ईश्वर हमारे माता-पिता और आचार्य भी है

ओ३म् =========== ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनादि, अनन्त, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय एवं सृष्टिकर्ता है। वह जीवात्माओं...

अन्य कार्य करते हुए ईश्वर के उपकारों का चिंतन आवश्यक है

ओ३म् ========== मनुष्य को जीवन में अनेक कार्य करने होते हैं। उसे अपने निजी, पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों की पूर्ति के लिये समय देना पड़ता...