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इतिहास के पन्नों से

संपादकीय




धर्म-अध्यात्म

जीवन में सोलह संस्कारों का महत्व और संक्षिप्त परिचय*

१. गर्भाधानम् संस्कार : - "गर्भस्याऽऽधानं वीर्यस्थापनं स्थिरीकरणं यस्मिन् येन वा कर्मणा, तद् गर्भाधानम् ।" गर्भ का धारण, अर्थात् वीर्य का स्थापन, गर्भाशय में स्थिर...

एक व्यस्त व्यक्ति हमेशा वक्त निकाल लेता है, लेकिन आलसी को कभी समय नहीं मिलता, खुद देखे हम व्यस्त हैं या अस्तव्यस्त

डॉ. स्वामी ज्ञानवत्सल मनुष्य जीवन में संबंधों का अत्यधिक महत्व है। माता-पिता, पत्नी, पुत्र-पुत्री और मित्र आदि के साथ आपके कैसे संबंध हैं- उसका प्रभाव...

संस्कारों की दौलत ही सच्चा धन

योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ आजकल समाज में संस्कारों की कमी देखकर कभी-कभी मन उद्वेलित हो उठता है। समाचारपत्रों में ऐसे समाचार देखकर कि कोई वृद्धा...

जो शास्त्र से नहीं माने, उन्हें शस्त्र से मनाया गया, वीरता से भरा है अखाड़ों का इतिहास, जानें इनका महत्व और उद्देश्य

अभिनय आकाश  अखाड़ों की शुरुआत आदि गुरु कहे जाने वाले शंकराचार्य ने की थी। कुछ ग्रंथों के मुताबिक अलख शब्द से ही 'अखाड़ा' शब्द की...

श्राद्ध कर्मकांड पर विभिन्न समाज सुधारकों के विचार संत कबीर के श्राद्ध पर विचार _____ _________

जब संत कबीर बालक थे तथा गुरू रामानंद के आश्रम मे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब की एक घटना है :- ब्राहमण धर्म के...

छ: दर्शनों में परस्पर विरोध व अविरोध पर विचार

छः दर्शनों को लेकर आज यहां पर विचार होगा, यह देखकर हमारे अन्तःकरण में अत्यन्त उल्लास उत्पन्न हो रहा है। प्रत्येक वर्ष यदि इसी प्रकार...

हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

राजनीति की हर पेचीदगी को सुलझाना जानती थी मुझे राजे सिंधिया

राजनीति से पहले संगठन को प्राथमिकता देते थे नानाजी देशमुख

लोकनायक जयप्रकाशजी ने भारतीय राजनीति को ही नहीं बल्कि आम जनजीवन को दी नई दिशा

मेरी नई पुस्तक “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा : भगवान श्री राम”

महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा