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इतिहास के पन्नों से

संपादकीय




धर्म-अध्यात्म

भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में मुक्ति का महत्व क्या है ?

संसार का सुख क्षणभंगुर है।लेकिन मुक्ति का आनंद वर्णनातीत है जो केवल अनुभव किया जा सकता है । उस परमानंद के सामने सांसारिक सुख कदापि...

धर्म और अधर्म के बारे में क्या कहती है मनुस्मृति ?

#डॉविवेकआर्य अम्बेडकरवादी यह जानते हुए भी कि कुछ मूर्खों ने मनुस्मृति में श्लोकों की मिलावट की थी सृष्टि के प्रथम संविधान निर्माता महर्षि मनु के...

दुर्योधन , अर्जुन और नई भगवद गीता

ब्रजकिशोर मित्रों, एक बार एक पिता जी अपने महाधर्मनिरपेक्ष बेटे को कुछ समझाते हुए महाभारत का उदाहरण दे रहे थे।बेटा! संघर्ष को जहाँ तक हो...

“अविद्या व अन्धविश्वास दूर किये बिना मनुष्य जाति का कल्याण सम्भव नहीं”

ओ३म् ========= अविद्या, अज्ञान व अन्धविश्वास ये सभी शब्द व इनसे उत्पन्न धार्मिक व सामाजिक प्रथायें परस्पर पूरक व एक दूसरे पर आश्रित हैं। यदि...

“सृष्टिकर्ता और पालक ईश्वर कहां रहता है और क्या करता है?”

ओ३म् ईश्वर और उसके अन्य सभी गुण, कर्म और सम्बन्ध वाचक नाम वेदों से संसार में प्रसिद्ध हुए हैं। वेद, सृष्टि के आरम्भ में मनुष्यों...

राष्ट्र सेविका समिति ने भारत में राष्ट्रभक्त मातृशक्ति को किया है तैयार

भारतीय संस्कृति पूरे विश्व में सबसे महान एवं विश्व की सभ्यताओं में सबसे पुरानी संस्कृति मानी जाती है। भारतीय संस्कारों की वैज्ञानिकता पर तो आज...