लोकसभा के सांसदों की संख्या में वृद्धि ?

PM modi loksabha

केंद्र की मोदी सरकार इस समय संसदीय क्षेत्र परिसीमन संबंधी विधेयक लेकर आई है। यदि इस बिल को पास कर दिया जाता है तो संसद के लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी। सरकार का कहना है कि संसद में 30% महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित करना है। दूसरे, जन समस्याओं को देखते हुए भी लोकसभा के सदस्यों की संख्या बढ़ाया जाना समय की आवश्यकता है। सरकार विपक्ष दोनों अपने-अपने ढंग से इस मुद्दे को लेकर राजनीति कर रहे हैं। यदि यह कानून बनता है तो विपक्ष उसे अपने लिए किस प्रकार भुना सकता है और सत्तारूढ़ पार्टी किस प्रकार इसका राजनीतिक लाभ ले सकती है ?- सारी चर्चा केवल इसी बात पर केंद्रित है। विपक्ष चाहे कितना ही आक्रामक क्यों ना हो, परंतु वह भी चाहेगा कि संसद के सदस्यों की संख्या बढ़ानी चाहिए । जिससे कि पार्टी के अधिक से अधिक लोगों को टिकट देकर अथवा सांसद बनाकर संतुष्ट किया जा सके। हम सभी जानते हैं कि तुष्टिकरण का खेल भारतीय राजनीति में बहुत पुराना है। जो लोग सीटों की कमी के कारण सांसद बनने में पीछे रह जाते हैं, वे हर पार्टी के लिए समस्या खड़ी करते हैं। उनकी संतुष्टि के लिए यह आवश्यक है कि लोकसभा सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए। यदि इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो लोकसभा सदस्यों की संख्या बढ़ाने संबंधी इस विधेयक में कहीं देशहित खड़ा दिखाई नहीं देता, दलहित ही दिखाई देता है।

यहां पर यह भी प्रश्न है कि क्या वर्तमान लोकसभा सदस्य अपने कर्तव्यों का सही-सही पालन करने में सफल हो पाए हैं ? उत्तर मिलेगा नहीं। यदि वर्तमान सांसद ही जनहित और देशहित के प्रति अपने कर्तव्य निर्भय में असफल रहे हैं तो और संख्या बढ़ने से क्या लाभ होगा ? अपने वर्तमान जनप्रतिनिधियों को ही हम वास्तविक अर्थों में जनप्रतिनिधि नहीं बना पाए। हां, वे धनप्रतिनिधि अवश्य बन गए हैं अर्थात जिस बात की अपेक्षा संविधान और देश का मतदाता उनसे करता है उस पर वह खरे नहीं उतरे हैं और जिनकी उनसे अपेक्षा नहीं की जा सकती थी उस पर वह पूर्णतया खरे उतरे हैं। हमने कभी सांसदों के लिए राजनीतिक प्रशिक्षण देने जैसी व्यवस्था नहीं की, जो कि प्रत्येक सांसद के लिए बहुत आवश्यक थी। हमारा मानना है कि लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़ाने से कुछ नहीं होगा । वास्तव में होना यह चाहिए कि हमारे सांसद जनता के प्रति जवाबदेह बनें।

आज के परिवेश में हमें यह तथ्य स्वीकार करना चाहिए कि सांसद दीखने के लिए तो जनप्रतिनिधि हैं, परंतु वास्तव में वे पार्लियामेंट में एक पार्टी के प्रतिनिधि होकर बैठते हैं और उसी के लिए काम करते हैं। जनप्रतिनिधि पहले दिन से ही दलप्रतिनिधि बन जाता है और दल प्रतिनिधि से कब वह धन प्रतिनिधि बन गया ? – इसका किसी को पता नहीं चलता।

हमारे सांसदों में से अधिकतर मोम की गुड़िया होते हैं। एक नेता की कठपुतली होते हैं उन्हें वही कहना होता है जो उनका नेता इनसे कहलवाना चाहता है। ऐसी स्थिति में जनता के हित गौण हो जाते हैं। अपने नेता की मानसिकता को समझकर ही संसद में सांसद अपने विचार रखते हैं। इस प्रकार यद्यपि उनकी अंतरात्मा कुछ और कहने के लिए प्रेरित करती है परंतु वे दलप्रतिनिधि के अपने दायित्व का निर्वाह करते हुए जनप्रतिनिधि के अपने वास्तविक स्वरूप से पूर्णतया उदासीन हो जाते हैं। यदि यही स्थिति निरंतर जारी रहती है ( जिसके यथावत बने रहने की पूर्ण संभावना है ) तो ऐसी स्थिति में चाहे आप कितने ही सांसद बढ़ा लें , जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी।

जनता के समस्याओं को करने के लिए सांसदों को स्वतंत्रता देनी होगी, उनके मस्तिष्क को सोचने समझने के लिए खुला छोड़ना होगा। सांसदों की संख्या बढ़ाने के स्थान पर आज इस बात के लिए कानून बनाने की आवश्यकता है कि जनप्रतिनिधि लोकसभा में बैठकर जनप्रतिनिधि ही दिखाई दें अर्थात पार्लियामेंट में प्रवेश करने के पश्चात सभी पार्टियों के सांसद खुलकर अपने विचार रखें और दलगत राजनीति की बात करना अथवा अपनी पार्टी के प्रमुख नेता के साथ खड़े होकर बोलना संसदीय परंपरा के विरुद्ध माना जाना चाहिए। आज हमारे अधिकांश सांसदों के मस्तिष्क उनकी पार्टी के नेताओं के यहां गिरवी रखे हैं। हम बंधक प्रतिनिधियों के माध्यम से सीमित ,संकुचित और संकीर्ण लोकतंत्र चला रहे हैं।
यहां पर यह भी विचारणीय है कि हम अपने एक सांसद पर प्रत्येक वर्ष 42.9 लाख रुपए वर्ष खर्च करते हैं। लगभग 3000 करोड़ रूपया हम सांसदों पर अपने राजकोष से खर्च कर देते हैं। आगे इस खर्च की और भी बढ़ने की संभावना है। यदि लोकसभा के सांसदों की संख्या को 850 कर दिया जाता है तो इस खर्चे में और भी अधिक वृद्धि हो जाएगी। तब यह खर्चा 5000 करोड़ का भी हो सकता है।

इस प्रकार स्पष्ट हो जाता है कि वर्तमान सांसदों के लिए देश के राजकोष से अरबों रुपया खर्च होता है। जब भारत स्वाधीन हुआ था तो हमने सोचा था कि अब हमने 563 राजाओं से मुक्ति प्राप्त कर ली है और अब हम देखेंगे कि देश के राजकोष का सारा पैसा जनहित पर खर्च होगा। परंतु हमने कुछ समय बाद ही यह आभास कर लिया कि हमने 563 राजाओं से मुक्ति प्राप्त कर 5630 ( 4230 कुल विधायक 788 हमारे देश के सांसद और जिला पंचायत के अध्यक्ष इन सबको मिलाकर ) नए राजा तैयार कर लिए हैं।
563 राजा हटाकर हमने 10 गुणा राजा बनाए। इसके अतिरिक्त हमारे पूर्व सांसद भी राजकोष पर बोझ बने हुए हैं जिन पर देश के खजाने से बहुत बड़ी धनराशि खर्च होती है।

हमने मुक्ति प्राप्त की या अपनी पराधीनता का एक नया जाल स्वाधीनता के नाम पर अपने आप ही बुन लिया ? – यह आज तक समझ नहीं आया। जिसे हम लोकशाही के नाम पर स्वीकार कर रहे थे, वह हमारे लिए राजशाही से भी अधिक घातक सिद्ध हुआ।
हम सोचते हैं कि हम अपने जनप्रतिनिधियों को अपने आप नियुक्त करते हैं और यही लोकतंत्र है, परंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। धनतंत्र और लाठी तंत्र के माध्यम से चुनाव जीते जा रहे हैं। इस प्रकार धन-तंत्र और लूटतंत्र लोकतंत्र पर भारी हो गया है। आज केंद्र सरकार को चुनाव संबंधी सुधार करने की आवश्यकता है । इस बात की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता है कि जो वास्तव में विद्वान, चरित्रवान, ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ देशभक्त लोग हैं उन्हें जनप्रतिनिधि बनने के लिए हर प्रकार की सुविधा प्रदान की जाए। जिस दिन भारत का लोकतंत्र इस प्रकार की कार्य शैली को अपना लेगा, उस दिन समझ जाएगा कि भारत में वास्तव में लोकतंत्र है और हम वास्तव में लोकतंत्र के प्रति निष्ठावान हैं।

लुच्चे, लफंगे, बदमाश और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग यदि देश में सांसद बनने में सफल हो रहे हैं तो उनका देश की नौकरशाही में बैठे ऐसे ही बदमाश लोगों से गठबंधन होना निश्चित है। जिनके साथ मिलकर वह देश को लूटने के काम के अतिरिक्त और कुछ करने वाले नहीं हैं।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं)

Comment:

hititbet
hititbet
grandpashabet giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betwoon giriş
betwoon giriş
betasus giriş
imajbet güncel
betpipo giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino
Vdcasino
vizebet giriş
piabet giriş
imajbet giriş
avvabet giriş
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
vaycasino giriş
Betzula giriş
kralbet giriş
safirbet güncel
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kralbet giriş
kralbet giriş
imajbet güncel
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark
vdcasino giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino
betorder
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
meritking giriş
mrking giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet
milanobet
betorder giriş
milanobet
milanobet
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
vaycasino
vaycasino giriş
kralbet giriş
kolaybet
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
holiganbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
cratosroyalbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
avvabet giriş
avvabet giriş
avvabet giriş
avvabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş