‘ तपन ‘ सुलगती धरती यहाँ पर तप रहा आकाश है गर्म हवाओं के थपेड़े तपन बेहिसाब है आग बरसी है धरा पर प्रचंड सूर्य ताप से झुलसते सब पेड़-पौधे सूनी दिखती राह है तीक्ष्ण अनल सूर्य का या, क्रोध हो इन्सान का अति होती जब किसी की हो पीड़ादायक सर्वदा गहन उष्ण ताप से […]