शरीर की अनित्यता माधव बोले- पार्थ ! बिना लड़े शत्रु को क्यों गर्वित करता है ? तू धर्म धुरीण धनुर्धर होकर क्यों धर्म – ध्वजा झुकने देता है ? मां का पावन पयपान किया है -उसे ना अपयश का पात्र बना, हे अर्जुन ! कायर बनकर शत्रु को तू क्यों उत्साहित करता है ? जितने […]