हम आज ऐसी बातों पर लड़ रहे हेैं जो लड़ाई के मुद्दे हो ही नहीं सकते। वैचारिक लचीलेपन का दावा करने के बावजूद हम हर पचास सौ सालों में पैदा होने वाले पंथों के बीच ऐसी अभेद्य दीवारें खड़ी कर रहे हैें कि हजारों मील दूर विकसित धर्मों और पंथों के साथ संवाद करना […]