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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-52

गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज मोक्ष कब तक मिला रहता है अब हम इस विषय पर विचार करते हैं कि मनुष्य को मोक्ष कब मिलता है? गीता के आठवें अध्याय में ही इस पर प्रकाश डालते हुए योगीराज श्रीकृष्णजी ने स्पष्ट किया कि ब्रह्म का एक दिन मानव के एक हजार युगों का […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

कश्मीर पर कांग्रेस की भाषा

कश्मीर पर कांग्रेस की भाषाकश्मीर को लेकर कांग्रेस का वास्तविक चेहरा एक बार पुन: सामने आया है। कांग्रेस के पी. चिदंबरम ने कहा है कि कश्मीर को अधिक स्वायत्तता दिये जाने की आवश्यकता है। इस पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे कांग्रेस की पाकिस्तान परस्त भाषा कहा है। वास्तव में कांग्रेस इस […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

कोरेगांव की जातीय हिंसा

भारत के विषय यह एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि आजादी के 70 वर्ष पूर्ण होने के उपरान्त भी हम जातीय हिंसा के बार-बार शिकार होते हैं। बार-बार कुछ अनमोल जानें चली जाती हैं और हम उनके चले जाने के पश्चात यहां छाती पीट-पीटकर राजनीति अपना विधवा विलाप करती रह जाती है। हम बार-बार यह शपथ […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-51

गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज परमपुरूष अर्थात परमात्मा को पाने का सच्चा साधन योगेश्वर श्रीकृष्ण ‘अभ्यास योग’ को ही बताते हैं। वह कहते हैं कि जो साधक ‘अभ्यास योग’ के माध्यम से चित्त को एकाग्र कर उसे कहीं दूसरी जगह भागने नहीं देता है-वह निरन्तर चिन्तन करते रहने से दिव्य परमपुरूष को पा […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-50

गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज एकाक्षर ब्रह्म गीता के आठवें अध्याय में ब्रह्म, कर्म, अध्यात्म, अधिभूत, अधिदैव, अधियज्ञ तथा अन्तकाल की सुन्दर व्याख्या की गयी है। अर्जुन ने गीता के आठवें अध्याय के आरम्भ में प्रश्न कर लिया है कि पुरूषोत्तम वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसे […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

पाकिस्तान को लेकर भारत सोये नहीं

ईसाई नये वर्ष 2018 की शुरूआत पाकिस्तान के लिए कष्टकारी रही है। इस देश की वास्तविकता को सारा संसार अब समझ रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान को ‘नया साल मुबारिक’ बोलते हुए अपने इस मित्र को दी जाने वाली 25 करोड़ 50 लाख डॉलर की सहायता राशि रोक दी है। अब पहली बार ‘ट्रम्प प्रशासन’ […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-49

गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ईश्वर विषयक भ्रम जो लोग विभिन्न देवी देवताओं की पूजा में लगे रहते हैं, या विभिन्न व्यक्तियों को ईश्वर मानकर उनकी पूजा करते रहते हैं-उन्हें श्रीकृष्ण जी बुद्घिहीन मानते हैं। कहते हैं कि जो बुद्घिहीन लोग मुझ अव्यक्त को व्यक्त हुआ मानने लगते हैं, अर्थात भिन्न-भिन्न देवताओं के […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-48

गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ज्ञान-विज्ञान और ईश्वर का ध्यान आत्र्त-जिज्ञासु भजें अर्थार्थी दिन रात। युक्तात्मा ज्ञानी भजै उसकी अनोखी बात।। श्रीकृष्ण दूसरे प्रकार के भक्त का नाम जिज्ञासु बताते हैं। जिज्ञासु का अर्थ है-जानने की इच्छा रखने वाला। यह भक्त अपना ज्ञानवद्र्घन करने के लिए मेधा की उपासना करता है। वह ईश्वर […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-47

गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज आज के संसार में प्रकृतिवादी लोग ऐसी ही मानसिकता और सोच रखते हैं। प्रकृतिवादी नास्तिक बन गये हैं। उन्हें प्रकृति से आगे ईश्वर के होने की बात स्वीकार ही नहीं है। वे मानते हैं कि ये प्रकृति ही सब कुछ है और यह स्वयं यन्त्रवत चल रही है। […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-46

गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज महर्षि पतंजलि ‘योग दर्शन’ में कहते हैं कि संसार और शरीर आदि के अनित्य पदार्थों को नित्य, मिथ्या-भाषण, चोरी आदि अपवित्र कर्मों को पवित्र, विषय सेवन आदि दु:ख को सुख रूप, शरीर और भौतिक जड़ पदार्थों को चेतन समझना यह अविद्या है। अनित्य को नित्य मानकर करै जो […]

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