धर्म, दर्शन, कला, संगीत और उद्योग-धंधों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश शताब्दियों तक विश्व मानचित्र पर चमकता रहा। लेकिन आज उत्तर प्रदेश की गिनती देश के सबसे पिछड़े और अराजक राज्यों में होती है। जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर के रूप में देश को सबसे ज्यादा […]
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सर्वधर्म–समभाव का भ्रम-3 राकेश कुमार आर्य हमें चाहिए कि हम धर्म के वास्तविक अर्थों को समझें, ग्रहण करें और मानवीय समाज के शत्रु संप्रदायों के दानवी स्वरूप को त्यागें। किसी भी मजहब अथवा संप्रदाय की धर्म पुस्तकों की उन व्यर्थ बातों को भूलने और मिटाने का संकल्प लें जो सृष्टिïक्रम और विज्ञान के सिद्घांतों के […]
धर्म और मजहब (सम्प्रदाय) में अंतर
1.धर्म का आधार ईश्वर और मजहब का आधार मनुष्य है,धर्म उस ज्ञान का नाम है जिसे मनुष्यों और प्राणिमात्र के कल्याण के लिए परमात्मा ने आदि स्रष्टि में प्रदान किया, मजहब वह है जिसे मनुष्यों ने समय समय पर अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए स्वीकार किया और पुन: स्वार्थ सिद्धि के लिए उसका […]
-विश्व इतिहास की अन्यतम् घटना- भारत संसार में महापुरूषों को उत्पन्न करने वाली भूमि रहा है। यहां प्राचीन काल में ही अनेक ऋषि मुनि उत्पन्न हुए जिन्होंने वेदानुसार आदर्श जीवन व्यतीत किया। इन ऋषियों में से कुछ के नाम ही विदित हैं। अनेक ऋषि मुनियों ने महान कार्यों को किया परन्तु उन्होंने न तो अपना […]
विश्व-संगठन एवं विश्व धर्म
मानव के मानव पर अत्याचार करने की प्रवृत्ति ने विश्व के देशों को देशों पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया,सम्प्रदाय को सम्प्रदायों पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया। विश्व में उपनिवेशवादी व्यवस्था का जन्म मनुष्य की इसी भावना से हुआ। अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहने और दूसरों के अधिकारों के प्रति असावधान […]
भारत में धर्म आधारित हिंसा और अमरीका
अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और पुलिस एवं सुरक्षा बल के दुव्र्यवहार के अलावा वर्ष 2014 में भारत में धर्म आधारित सामाजिक हिंसा सबसे बड़ी मानवाधिकार समस्या रही। इसकी सालाना ‘कांग्रेसनली मैनडेटेड कंट्री रिपोर्ट ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज फॉर 2014 रिपोर्ट’ के लंबे चौड़े इंडिया सेक्शन में मनमाने […]
मानव के मानव पर अत्याचार करने की प्रवृत्ति ने विश्व के देशों को देशों पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया,सम्प्रदाय को सम्प्रदायों पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया। विश्व में उपनिवेशवादी व्यवस्था का जन्म मनुष्य की इसी भावना से हुआ। अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहने और दूसरों के अधिकारों के प्रति असावधान […]