काम भयंकर विषधर है, नहीं बचा दंश से कोई भी। काम कुचाली भूचाली के, ना बचा वेग से कोई भी।। बहुत भयंकर डकैत देह में, बैठा हुआ है छुप करके। जागृत करता पापवासना, विवेक का दीप बुझा करके।। जितने भर भी पाप जगत में, होता सबका मुखिया काम। देह जलाता – गेह जलाता, अपयश – […]
Month: February 2025
सीमित संसाधनों से प्रभावित होती कृषि
– पूजा कुमारी लूणकरणसर, राजस्थान साल की शुरुआत में केंद्र सरकार ने किसानों को तोहफा देते हुए जहां डीएपी पर विशेष पैकेज का एलान किया तो वहीं दूसरी ओर फसल बीमा योजना के दायरे का विस्तार करते हुए 4 करोड़ अतिरिक्त किसानों को इससे जोड़ा है. इससे किसानों की एक बड़ी संख्या अब फसल नुकसान […]
आज भारत के संदर्भ में यह सपना देखा जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा किए गए विभिन्न सुधार कार्यक्रमों के बल पर वर्ष 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा। परंतु, सकल घरेलू उत्पाद में औसतन लगभग 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ क्या भारत वास्तव में […]
बढ़ते एकल परिवारों ने हमारे समाज का स्वरूप ही बदल दिया। आजकल के बच्चों को वो संस्कार और अनुशासन नहीं मिल रहे है जो उन्हें संयुक्त परिवारों से विरासत में मिलते थे, और इसी का परिणाम है कि समाज में परिवारों का टूटना, घरेलू हिंसा, असुरक्षा की भावना, आत्महत्या, बलात्कार , अपहरण आदि सामाजिक समस्याओें […]
किए का फल मिलना निश्चय
हर वृक्ष लता से पूछा मैंने, तुम किस कारण यहां खड़े ? किस कारण तुम भोग रहे हो, फल कर्मों के बहुत कड़े ? वृक्ष लता एक सुर से बोले – नियम भंग के दोषी हैं हम। कठोर मिली है कारा हमको, दूर-दूर तक छाया है तम।। पाप रहा होगा छोटा सा, फल भयंकर विषधर […]