धनेन्द्र कुमार भारतीय समाज में नोट को धन के पर्यायवाची के रूप में देखा जाता है। हिंदी फिल्मों के बहुत सारे गाने इस पर आधारित हैं। जैसे ‘अपना सपना मनी-मनी’, ‘पैसा-पैसा करती है, तू पैसे पर क्यूं मरती है’, ‘सबसे बड़ा रुपैया’, ‘एक पैसा दे दो बाबू’, ‘पैसे की कहानी’, ‘छन-छन बाजे रुपैया’, ‘पैसा फेंक […]
क्या कागज के नोट अब इतिहास बनने वाले हैं ?