कविता – 1 बढ़ते चलो – बढ़ते चलो, नित सीढ़ियां चढ़ते चलो, गीता को हृदयंगम करो मत दीनता धारो कभी। मत हार को उच्चारो कभी …. जीवन मिला है जीतने को, नैराश्य भाव मेटने को, मत फटकने दो उदासियों को और ना हारो कभी।। मत हार को उच्चारो कभी …. संपूर्ण पृथ्वी लोक में, कोई […]
मत हार को उच्चारो कभी …