Categories
इतिहास के पन्नों से

पाकिस्तानी फौज ने जब मीरपुर में मार डाले थे 18000 हिंदू

उगता भारत ब्यूरो

1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन की कई दर्दनाक कहानियां है। ऐसी ही एक कहानी है तत्कालीन कश्मीर रियासत के एक शहर मीरपुर की। यहां के हिन्दू लोगों ने खुद को पाकिस्तानी सेना से बचाने के लिए तत्कलीन कश्मीर के प्रमुख शेख अब्दुल्ला से गुहार लगाई। लेकिन अब्दुल्ला ने इसे अनसुना कर दिया और उन्हें पाकिस्तानी सेना के हाथों मरने को छोड़ दिया। इसका परिणाम ये हुआ कि पाकिस्तानी सेना ने 27 अक्टूबर को मीरपुर पर हमला कर 18000 हिन्दुओं और सीखों की हत्या कर दी। पाक फौज करीब पांच हजार लड़कियों और महिलाओं का अपहरण कर पाकिस्तान ले गई। इन्हें बाद में मंडी लगाकर पाकिस्तान और खाड़ी के देशों में बेच दिया गया। वर्तमान में मीरपुर पाकिस्तान में है, लेकिन वहां पुराने मीरपुर का नामोनिशान बाकी नहीं है। पुराने मीरपुर को पाकिस्तान ने झेलम नदी पर मंगला बांध बना कर डुबो दिया है।आइए इस घटना को विस्तार से जानते है।
बंटवारे के समय मीरपुर के सभी मुसलमान 15 अगस्त के आसपास बिना किसी नुकसान के पाकिस्तान चले गए थे। देश के विभाजन के समय पाकिस्तान के पंजाब से हजारों हिंदू और सिख मीरपुर में आ गए थे। इस कारण उस समय मीरपुर में हिंदुओं की संख्या करीब 40 हजार हो गई थी। मीरपुर जम्मू-कश्मीर रियासत का एक हिंदू बाहुल्य शहर था। मुसलमानों के खाली मकानों के अलावा वहां का बहुत बड़ा गुरुद्वारा दमदमा साहिब, आर्य समाज, सनातन धर्म सभा और बाकी सभी मंदिर शरणार्थियों से भर गए थे। यही हालत कोटली, पुंछ और मुजफ्फराबाद में भी हुई।
मीरपुर राजा हरि सिंह की सेना की एक टुकड़ी के सहारे था। पाकिस्तानी इलाकों से भागे हुए हिंदू और सिख यहां आ रहे थे। राजा हरि सिंह के भारत में विलय पर सहमत न होने के कारण भारत सरकार भी अपनी सेना वहां नहीं भेज पा रही थी। तत्कालीन कश्मीर सरकार के प्रमुख शेख अब्दुल्ला ने भी यहां की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाए और न ही हिंदुओं की रक्षा के लिए सेना की टुकड़ी ही भेजी। 27 अक्टूबर 1947 को पाक सेना ने मीरपुर पर हमला किया, लेकिन 17 दिन बाद 13 नवंबर को शेख अब्दुल्ला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मिलने दिल्ली पहुंचे। 16 नवंबर तक बड़ी संख्या में भारतीय सेना कश्मीर पहुंच गई। लेकिन कश्मीर के भारत में विलय पर बात न बनने के कारण सेना आगे नहीं बढ़ सकी।
मीरपुर के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे। मेहरचंद महाजन ने शेख अब्दुल्ला को बताया कि मीरपुर में 25 हजार से ज्यादा हिंदू-सिख फंसे हुए हैं। उन्हें सुरक्षित लाने के लिए कुछ किया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की जो आठ सौ सैनिकों की चौकी थी, जिसमें आधे से अधिक मुसलमान थे, वे अपने हथियारों समेत पाकिस्तान की सेना से जा मिल थे। मीरपुर के लिए तीन महीने तक कोई सैनिक सहायता नहीं पहुंची। शहर के 17 मोर्चों पर बाहर से आए हमलावरों को महाराजा की सेना की छोटी-सी टुकड़ी ने रोका हुआ था। सैनिक मरते जा रहे थे।
25 नवंबर को हवाई उड़ान से वापस आए एक पायलट ने भारतीय सेना को बताया कि पाकिस्तानी सेना ने शहर को लूटना शुरू कर दिया है। पायलट ने बताया कि मीरपुर के लोग काफिले में झंगड़ की ओर चल पड़े हैं। शहर से आग की लपटें उठ रही हैं। रास्ते में पाकिस्तान की फौज ने घेर कर उनका कत्लेआम कर दिया। किसी परिवार का एक व्यक्ति मारा गया था, किसी के दो व्यक्ति। कई ऐसे थे जिनकी आंखों के सामने उनके भाईयों, माता-पिता और बच्चों को मार दिया गया था। कई ऐसे थे जो रो-रो कर बता रहे थे कि कैसे वे लोग उनकी बहन-बेटियों को उठाकर ले गए।
मीरपुर में उत्तर की ओर गुरुद्वारा दमदमा साहिब और सनातन धर्म मंदिर थे। इनके बीच में एक बहुत बड़ा सरोवर और गहरा कुंआ था। लगभग 75 प्रतिशत लोग कचहरी से आगे निकल चुके थे। स्त्रियों, लड़कियों और बूढ़ों को पाकिस्तानी कबाइलियों (सैनिकों) ने एक मैदान में घेर लिया। आर्य समाज के स्कूल के छात्रावास में 100 छात्राएं थीं। छात्रावास की अधीक्षिका ने लड़कियों से कहा अपने दुपट्टे की पगड़ी सर पर बांध लो और भगवान का नाम लेकर कुंओं में छलांग लगा दें। बाद में उन्होंने खुद भी छलांग लगा दी। वहीं बहुत से लोग अपनी हवेली के तहखानों में परिवार सहित जा छुपे, लेकिन वहशियों ने उन्हें ढूंढ निकाला। पाकिस्तानी सैनिकों ने पुरुषों और बूढ़ों को मार दिया और महिलाओं को उठा ले गए।
उस दौरान पाकिस्तानी सेना सारी हदें पार कर चुकी थी। 25 नवंबर के आसपास पांच हजार हिंदू लड़कियों को वे लोग पकड़ कर ले गए। बाद में इनमें से कई को पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अरब देशों में बेचा गया। पाक सेना ने बाकी लोगों का पीछा करने के बजाय नौजवान लड़कियों को पकड़ लिया और शहर को लूटना शुरू कर दिया। मीरपुर को लूटने में लगे पाक सैनिकों ने काफिले का पीछा नहीं किया। काफिला अगली पहाड़ी पर पहुंच गया। वहां तीन रास्ते निकलते थे। तीनों रास्तों पर काफिला बंट गया। जिसको जहां रास्ता मिला, भागता रहा।
पहला काफिला सीधे रास्ते की तरफ चल दिया जो झंगड़ की तरफ जाता था। दूसरा कस गुमा की ओर चल दिया। पहला काफिला दूसरी पहाड़ी तक पहुंच चुका था, लेकिन उसके पीछे वाले काफिले को पाक सेना ने घेर लिया। उन दरिंदों ने लड़कियों को एक तरफ कर दिया और बाकी सबको मारना शुरू कर दिया। कबाइली और पाक सैनिक उस पहाड़ी पर जितने आदमी थे, उन सबको मारकर अगले काफिले की ओर बढ़ गए। इस तरह18,000 से ज्यादा लोग मारे गए।
साभार

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
jojobet giriş
hititbet
sahabet
sahabet
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
betgaranti giriş
holiganbet
sahabet
sahabet
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
holiganbet
onwin
onwin
onwin
grandpashabet giriş
sahabet giriş
casibom giriş
onwin giriş
bettilt giriş