Categories
आज का चिंतन

दूसरों को सम्मान देकर ही उनके वास्तविक प्रेम को पाया जा सकता है

*दूसरे लोगों को उचित सम्मान दीजिए। और उनके वास्तविक प्रेम का लाभ लीजिए।* संसार में सब प्रकार के लोग हैं। आपसे कम योग्यता वाले, आपके समान योग्यता वाले और आपसे अधिक योग्यता वाले भी हैं। आपको इन सब के साथ व्यवहार करना पड़ता है। जो आपसे कम योग्यता वाले हैं, उनके साथ आप वैसा व्यवहार […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

जब किया गया था राष्ट्रीय कलंक का परिमार्जन

6 दिसम्बर/इतिहास-स्मृति   भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया। इनमें से श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर (अयोध्या), श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) और काशी विश्वनाथ मन्दिर के सीने पर बनी मस्जिदें सदा से हिन्दुओं […]

Categories
आज का चिंतन

देश में गुरुकुल होंगे तभी आर्य समाज को वेद प्रचारक विद्वान मिल सकते हैं

    –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने सृष्टि के आरम्भ में वेदों का ज्ञान दिया था। इस ज्ञान को देने का उद्देश्य अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न व उसके बाद जन्म लेने वाले मनुष्यों की भाषा एवं ज्ञान की आवश्यकताओं को पूरा करना था। सृष्टि के आरम्भ से लेकर महाभारत काल पर्यन्त भारत वा आर्याव्रत सहित विश्व भर की भाषा संस्कृत ही थी जो कालान्तर में अपभ्रंस व भौगोलिक कारणों से अन्य भाषाओं में परिवर्तित होती रही और उसका परिवर्तित रूप ही लोगों में अधिक लोकप्रिय होता रहा। भारत में सृष्टि के आरम्भ से महाभारत काल के कुछ काल बाद तक जैमिनी ऋषि पर्यन्त ऋषि–परम्परा चलने से देश में संस्कृत का पठन पाठन व व्यवहार कम तो हुआ परन्तु काशी, मथुरा व देश के अनेक नगरों व ग्रामों में भी संस्कृत का व्यवहार व शिक्षण चलता रहा। तक्षशिला और नालन्दा आदि अनेक स्थानों में विश्वविद्यालय हुआ करते थे जहां प्रभूत हस्तलिखित ग्रन्थ हुआ करते थे जिन्हें विदेशी मुस्लिम आतताईयों ने जला कर नष्ट किया। इससे यह ज्ञात होता है कि भारत में संस्कृत का पठन–पाठन काशी, मथुरा, तक्षशिला एवं नालन्दा आदि अनेक स्थानों पर चलता रहा था। स्वामी शंकराचार्य जी दक्षिण भारत में उत्पन्न हुए। वह भी शास्त्रों के उच्च कोटि के विद्वान थे। आज भी उनका पूरे संसार में यश विद्यमान है। ऋषि दयानन्द के समय में भी काशी व मथुरा सहित देश के अनेक भागों में संस्कृत के अनेक विद्वान थे। वह शास्त्रीय सिद्धान्तों की दृष्टि से […]

Categories
इतिहास के पन्नों से देश विदेश

तिब्बत : चीखते अक्षर, भाग -14

उद्योग 1976 तक तिब्बत में उद्योगों की संख्या 272 बताई जाती थी। उनमें एक डेरी प्लांट जिसमें डिब्बाबन्द सुखाये गये दूध का उत्पादन होता है, चमड़े के कारखाने और ऊन की मिलें सम्मिलित हैं। हालाँकि, जैसा कि दूसरे उद्योगों के साथ होता है, उत्पादित की गई सामग्री तिब्बत से बाहर चीन, हांगकांग और नेपाल ले […]

Categories
इतिहास के पन्नों से देश विदेश

तिब्बत : चीखते अक्षर, भाग -13

  जातीय भेदभाव सात वर्ष की अवस्था से तिब्बती बच्चे चीनियों के हाथों संस्थागत भेदभाव झेलते हैं। अगर वे विद्यालय में जाते हैं तो वे पाते हैं कि जरा से बहाने से उन्हें निष्कासित कर दिया जाता है जब कि चीनी बच्चों को हमेशा ही प्रोत्साहित किया जाता है। किसी भी व्यक्ति का ‘वर्ग’ उसके […]

Categories
आज का चिंतन इतिहास के पन्नों से

‘रामराज्य’ से भी पूर्व विद्यमान था रामराज्य ?

  सामान्यतया हमारी ऐसी धारणा है कि जब रामचंद्र जी इस धरती पर आए तो उनके शासनकाल को रामराज्य की उपाधि दी गई । जबकि ऐसा नहीं है । रामराज्य की परिकल्पना राम से भी पूर्व से चली आ रही है । वास्तव में जहां सत्य ,न्याय ,धर्म ,नीति और विधि के आधार पर शासन […]

Categories
आर्थिकी/व्यापार

अर्थव्यवस्था में झलकना ही चाहिए भारत की संस्कृति का प्रतिबिंब

  जवाहरलाल कौल शास्त्र के रूप में अर्थशास्त्र जैसा अमेरिका में पढ़ाया जाता है, उसी प्रकार हमारे देश में भी पढ़ाया जाता रहा है। उसके नियम, उसके सूत्र और उसकी धारणाएं सब वैश्विक हैं। सैद्धांतिक स्तर पर यह ठीक भी है, लेकिन व्यवहार में यह सही नहीं है। व्यवहार में उन नियमों, कायदों और सूत्रों […]

Categories
इतिहास के पन्नों से

कहां राजा भोज कहां गंगू तेली -का सच

  राजीव रंजन प्रसाद हमें तो वास्कोडिगामा ने खोजा है, भारतीय उससे पहले थे ही कहाँ? पढाई जाने वाली पाठ्यपुस्तकों का सरलीकरण करें तो महान खोजी-यात्री वास्कोडिगामा ने आबरा-कडाबरा कह कर जादू की छडी घुमाई और जिस देश का आविष्कार हुआ उसे हम आज भारत के नाम से जानते हैं? माना कि देश इसी तरह […]

Categories
आओ कुछ जाने

आज भी मानवता के लिए उपयोगी है भारत का ज्ञान विज्ञान

  सुद्युम्न आचार्य विश्व भौतिकी के लिये भारत में किये गये अनेक प्राचीन अविष्कार दैनिक जीवनोपयोगी उपकरणों से सम्बन्धित है। इतिहास के किसी भी युग में उनका तिरस्कार नहीं किया गया। आधुनिक युग में भी उनका विकल्प खोजा नहीं जा सका। उदारहणत: स्थल में चलने के लिये चक्र तथा जल में चलने के लिये नौका […]

Categories
उगता भारत न्यूज़

‘भाग्यनगर’ से चमका भाजपा का भाग्य : पिछली बार से मिली 12 गुना अधिक सीटें

  ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) की 150 सीटों पर नतीजों का ऐलान हो चुका है। सामने आए परिणामों में टीआरएस ने 56 सीटें हासिल की है, लेकिन पिछली बार के मुकाबले उसे तगड़ा नुकसान हुआ है। सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन भाजपा का रहा। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बीजेपी ने तीसरे नंबर पर धकेल दिया है। इन […]

Exit mobile version
mariobet giriş
mariobet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
hilarionbet giriş
hilarionbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
hilarionbet giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
celtabet giriş
celtabet giriş
milanobet giriş