भारतीय सांस्कृतिक जीवन में मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम को जो महत्व प्राप्त है, वही स्थान उनकी अद्र्धांगिनी सीता माता को भी प्राप्त है तथा जिस प्रकार समाज में रामनवमी का महात्म्य है, उसी प्रकार जानकी नवमी या सीता नवमी का भी महात्म्य माना जाता है । लोक मान्यतानुसार सीता नवमी के पावन पर्व पर व्रत रख […]
Month: February 2018
गीता का पंद्रहवां अध्याय और विश्व समाज यह जो प्रकृति निर्मित भौतिक संसार हमें दिखायी देता है-यह नाशवान है। इसका नाश होना निश्चित है। यही कारण है कि गीता के पन्द्रहवें अध्याय में प्रकृति को ‘क्षर’ कहा गया है। इससे जो कुछ बनता है वह क्षरण को प्राप्त होता है। बच्चा जन्म लेता है, फिर […]
अच्छे जीवन की चाहत से धोखा
मनीषा सिंह हमारे समाज में यह ग्रंथि लंबे समय से बनी हुई है कि विदेश का मतलब जीवन से लेकर हर चीज में गुणवत्ता की गारंटी है। हजारों परिवारों में यह चाहत दिखाई देती है कि काश, उनकी लडक़ी की शादी विदेश में बसे किसी भारतीय से हो जाए। लेकिन इस सपने की सच्चाई यह […]
गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज क्या है त्रिगुणातीत? जब श्रीकृष्णजी ने त्रिगुणों की चर्चा की और लगभग त्रिगुणातीत बनकर आत्म विजय के मार्ग को अपनाकर जीवन को उन्नत बनाने का प्रस्ताव अर्जुन के सामने रखा तो अर्जुन की जिज्ञासा मुखरित हो उठी। उसने अन्त:प्रेरणा से प्रेरित होकर श्रीकृष्णजी के सामने अपनी जिज्ञासा प्रकट […]
गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज मलीन बस्तियों में रहने वाले लोगों को हमें उनके भाग्य भरोसे भी नहीं छोडऩा चाहिए। उनके उत्थान व कल्याण के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कार्य होते रहने चाहिएं। उनके विषय में हमने जो कुछ कहा है वह उनकी दयनीय अवस्था को ज्यों का त्यों बनाये […]
मौजूदा विकास बनाम पर्यावरण
राजू पांडेय वर्ष 2018 के द्विवार्षिक ‘एनवायरनमेंटल परफॉर्मेन्स इंडेक्स’ में भारत 180 देशों में 177वें स्थान पर रहा। दो वर्ष पहले हम 141वें स्थान पर थे। रिपोर्ट यह बताती है कि सरकार के प्रयास ठोस र्इंधन, कोयला और फसल अवशेष को जलाने से उत्पन्न वायु प्रदूषण को रोकने में नाकाफी रहे हैं। मोटर वाहनों द्वारा […]
गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज श्रीकृष्णजी कहते हैं कि प्रकृति से उत्पन्न होने वाले सत्व, रज, तम-गुण इस अविनाशी देही को अर्थात आत्मा को शरीर में या क्षेत्र में बांध लेते हैं। इससे एक बात स्पष्ट होती है कि संसार की हर वस्तु में ब्रह्म का बीज है। वह बीज ही हमें विकसित […]
राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनिकीकरण बन्दा बैरागी और गुरू गोविन्दसिंह जैसे महापुरूष हिंदुओं का और सिखों का सैनिकीकरण करने के पक्षधर थे। उन्हीं का चिंतन प्रबल होते-होते आगे चलकर वीर सावरकर जैसे लोगों की लेखनी से जब मथा गया तो उसी से यह अमृतवाक्य हमें प्राप्त हुआ कि ‘राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं […]
मिताली जैन पिछले कुछ समय में लोगों के बीच योगा का क्रेज काफी बढ़ा है। अब लोग अपनी परेशानियों का हल दवाइयों में नहीं, बल्कि योगासनों में ढूंढते हैं। योगाभ्यास न सिर्फ आपके फिजिकल व मेंटल स्ट्रेस को कम करके आपको बीमारियों से मुक्त कराता है, बल्कि यह आपके सौंदर्य को बढ़ाने में भी काफी […]
रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य में अखरोट (वालनट) की भूमिका पर यहां चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने चर्चा की और कहा कि अखरोट का सेवन हृदय रोगों, कैंसर, आयु से जुड़े रोगों और मधुमेह जैसी समस्याओं में सकारात्मक परिणाम देता है तथा पोषक तत्वों की विविधता के साथ यह पूरे साल उपयोग के लिये आदर्श […]