गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज महर्षि पतंजलि ‘योग दर्शन’ में कहते हैं कि संसार और शरीर आदि के अनित्य पदार्थों को नित्य, मिथ्या-भाषण, चोरी आदि अपवित्र कर्मों को पवित्र, विषय सेवन आदि दु:ख को सुख रूप, शरीर और भौतिक जड़ पदार्थों को चेतन समझना यह अविद्या है। अनित्य को नित्य मानकर करै जो […]
Month: January 2018
दीपावली के अवसर पर महर्षि दयानंद को निर्वाण मिला था। अत: इस पावन पर्व पर महर्षि दयानंद का स्मरण हो आना स्वाभाविक है। उनका भारतीय स्वातन्त्र्य संग्राम में अनुपम और अद्वितीय योगदान था। भारत में राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले महर्षि दयानंद के विषय में ‘भारतीय स्वातन्त्र्य संग्राम में आर्यसमाज का योगदान’ के विद्वान लेखक […]
आइटी उद्योग के स्याह पहलू
एक वक्त था जब देश में हुई आइटी क्रांति ने रोजगार को पंख लगा दिए थे। एक ऐसे दौर में, जब देश का पड़ा-लिखा नौजवान कोई मामूली वेतन वाली नौकरी करने या फिर बेरोजगार रहने को मजबूर था, आइटी क्रांति की बदौलत देश-विदेश में उम्दा रोजगार का हकदार बना था और अपनी प्रतिभा का परचम […]
गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ज्ञान-विज्ञान और ईश्वर का ध्यान गीता के सातवें अध्याय का शुभारम्भ करते हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि हे पार्थ! मुझ में मन को आसक्त करके अर्थात कर्मफल की आसक्ति के भाव को छोडक़र और संसार के भोगों या विषय वासनाओं को त्यागकर जिस प्रकार तू मुझे […]
देश का आधुनिकता और ऐश्वर्य के नाम पर भौतिकवाद ज्यों-ज्यों पांव पसारता जा रहा है-मानव जीवन पर उसका उतना ही घातक प्रभाव पड़ता जा रहा है। उदाहरण के लिए आप ए.सी. को लें। ए.सी. के प्रयोग से निकलने वाली एक घातक गैस मानव स्वास्थ्य को बड़ी गहराई से और घातक रूप से प्रभावित कर रही […]