पिछले दिनों संसद में हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में कहा कि गुसलखाने में भी रेनकोट पहन कर नहाने की कला कोई डा० मनमोहन सिंह से सीखे । इससे सोनिया कांग्रेस के सभी वरिष्ठ और कनिष्ठ नेता बहुत ग़ुस्से में आ गए । परम्परागत तरीक़े से हाहाकार करते हुए सभा […]
Month: February 2017
यह काल नि:संदेह भारत में मुस्लिम शासन में ही आया था। अन्यथा हमारी तो मान्यता थी कि- ‘यंत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवताओं का वास होता है। हमने माता को निर्माता माना। व्यष्टि से समष्टि तक में उसकी प्रधानता को और उसकी महत्ता को स्वीकार किया। […]
पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-47
भावना मिट जायें मन से पाप अत्याचार की गतांक से आगे……… तब ऐसी बुद्घि व्यक्ति से पवित्र कार्य कराती है, व्यक्ति की धैर्य शक्ति में वृद्घि करती है, उसे सहनशील बनाती है। ठिकाने पर आयी बुद्घि से जो अनुष्ठान किया जाता है-उसमें आस्था और श्रद्घा के साथ जुड़ी बुद्घि ही विवेकशील होती है। उसी बुद्घि […]
आशा से ही मनुष्य कर्म करता है
बिखरे मोती-भाग 173 गतांक से आगे…. महर्षि सनत्कुमार ने कहा-ध्यान से बड़ा विज्ञान है। विज्ञान द्वारा ही ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद आदि, द्यु, पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, अग्नि तथा धर्म-अधर्म सत्य-असत्य इत्यादि का ज्ञान होता है। इसलिए हे नारद! तू विज्ञान की उपासना कर। नारद ने फिर पूछा, विज्ञान से बढक़र क्या है? भगवन। महर्षि […]
पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-46
भावना मिट जायें मन से पाप अत्याचार की कई बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को स्वाभिमान का प्रश्न बना लेता है, और उन्हीं में बह जाता है। बात-बात पर कहने लगता है कि-यह बात तो मेरे स्वाभिमान को चोट पहुंचा गयी, और कोई भी व्यक्ति मेरे स्वाभिमान को चोटिल नहीं कर […]
बिखरे मोती-भाग 172 गतांक से आगे…. यह सुनकर सनत्कुमार ने देवर्षि नारद से पूछा-जो कुछ तुम जानते हो, पहले वह बताओ? नारद ने कहा, मैंने चारों वेद, उपवेद, इतिहास, पुराण, गणित, नीति शास्त्र, तर्कशास्त्र अथवा कानून , देवविद्या (निरूक्त) भौतिक रसायन व प्राणीशास्त्र नक्षत्र विद्या (ज्योतिष) निधि शास्त्र (अर्थशास्त्र) ब्रह्मविद्या इत्यादि को पढ़ा है। यह […]
पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-45
भावना मिट जायें मन से पाप अत्याचार की वैदिक संस्कृति में गृहस्थ धर्म को सर्वोत्तम माना गया है। वेद ने एक सदगृहस्थ का चित्र खींचते हुए कहा है :- ”तुम दोनों व्यवहारों में (पति-पत्नी की ओर संकेत है) सदा सत्य बोलते हुए भरपूर धन कमाओ। हमारी प्रभु से कामना है कि यह पत्नी तुझ पति […]
मन के संग जब तन जुड़ै, तब होवै तल्लीन
बिखरे मोती-भाग 171 गतांक से आगे…. सूर्य तो निरंतर दीप्तिमान है। पृथ्वी की दैनिक गति के कारण जो भूभाग सूर्य के सामने होता है वहां दिन होता है और जिस भूभाग पर सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं वहां रात होती है। ठीक इसी प्रकार जीव (मैं अर्थात आत्मा) ब्रह्म, प्रकृति अनादि हैं। इनकी […]
सर्वोच्च न्यायालय ने चुनावों में धर्म, जाति, सम्प्रदाय या वर्ग विशेष के नाम पर वोट मांगने को या वोट देने के लिये प्रेरित करने को भ्रष्ट प्रक्रिया करार देकर भारतीय लोकतंत्र में पहली सबसे खतरनाक बीमारी को दूर करने का प्रयास किया है। बावजूद इसके दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी ने बहुजन […]
एक सामान्य सी अपेक्षा रहती है कि हर संवैधानिक एवं अन्य संस्थान स्वतंत्र व पारदर्शी रूप से कार्य करे। बेशक किसी भी संगठन की ढांचागत व्यवस्था उसमें निष्पक्ष प्रदर्शन की नींव डालती है, लेकिन न्याय के लक्ष्य को हासिल करने में उस संगठन में कार्यरत व्यक्तियों की भी अहम भूमिका रहती है। जब कोई नाकारा […]