अरविंद केजरीवाल से राहें जुदा होने के बाद अन्ना हजारे को एक और झटका लगा है। लंबे समय से अन्ना के निजी सचिव रहे सुरेश पठारे ने भी उनका साथ छोड़ दिया है। पठारे का कहना है कि उन्होने निजी कारणों से ये फैसला लिया। लेकिन अन्ना के पूर्व ब्लॉगर राजू पारुलेकर का आरोप है […]
Month: September 2012
कानून का संरक्षण और कानून सबके लिए समान
पिछले दिनों दादरी में हुए बवाल के चलते एक युवक की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष ब्रहमानंद गुप्ता ने कहा है कि बवाल में युवक की हत्या होना दुख का विषय है। यह मानवता के विरूद्घ एक घातक अपराध है। इस पर राजनीति करना समाज के लिए […]
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार पर हो रहे चौतरफा हमलो का जबाब देने के लिए अब खुद एक अर्थशास्त्री के रूप में कमान सम्हाल ली है। परन्तु यह भी एक कड़वा सच है कि यूपीए-2 इस समय अपने कार्यकाल के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। जनता की नजर में सरकार की साख लगातार […]
तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आखिरकार यूपीए को अलविदा कह ही दिया। उनके छह मंत्रियों ने सरकार से अपना त्यागपत्र दे दिया है और सत्तारूढ़ यूपीए से समर्थन वापसी का पत्र भी राष्ट्रपति को सौंप दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बहुब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की […]
चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियश का नाम चीन में ही नही अपितु समस्त विश्व में बड़ी श्रद्घा और सत्कार के साथ लिया जाता है। उनकी ज्ञान की गंभीरता से प्रभावित होकर तत्कालीन चीन के सम्राट ने उन्हें तिब्बत के एक प्रांत का गवर्नर बना दिया था। वह ईश्वर भक्त और महान दार्शनिक थे। इसलिए वे […]
हिंदी और भारतीय भाषाओं को लेकर समाज में एक अजीब सा सन्नाटा है। संचार व मीडिया की भाषा पर कोई बात नहीं करना चाहता। उसके जायज-नाजायज इस्तेमाल और भाषा में दूसरी भाषाओं खासकर अंग्रेजी की मिलावट को लेकर भी कोई प्रतिरोध नजर नहीं आ रहा है। ठेठ हिंदी का ठाठ जैसे अंग्रेजी के आतंक के […]
हम दानव नही मानव बनें
अथर्ववेद के आठवें काण्ड के सूक्त संख्या दो मंत्र संख्या 8 का एक मंत्र है-आरादरातिं निऋतिं परोग्राहिं क्रव्याद:पिशाचान। रक्षा यत्सर्वं दुर्भूतं तत्तम इवाप हन्मसि।।जिन व्यक्तियों में दान न देने की वृत्ति होती है, जो अदानी होते हेँ वह दानव हैं, क्योंकि दान न देने की वृत्ति भोगप्रवण बनाती है, यही भोगप्रवणता मृत्यु की ओर ले […]
चारों वेदों में यज्ञों का महत्व दर्शाया गया है। यज्ञ भी अनेक प्रकार के होते हैं। जैसे अश्वमेध यज्ञ, वृष्टिïयज्ञ आदि सब यज्ञ अग्निहोत्र के द्वारा ही सम्भव होते हैं।महर्षि मनु लिखते हैं-अग्नौ प्रस्ताहुति सम्यक आदित्यं उपतिष्ठति:।आदित्यात जायते वृष्टि: प्रजा:।।यज्ञ में अग्नि के अंदर डाली हुई घी-सामग्री की आहूतियां अग्नि के द्वारा सूक्ष्म होकर सूर्य […]
प्रबंधन में है अपार संभावनाएं
मानव के अंदर अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं। परंतु उचित प्रबंधन के अभाव में उनकी योग्यताओं का सही दोहन नही हो पाता है। परिणाम स्वरूप एक योग्य इंसान का अधिकतर समय बेकार के कामों में व्यतीत हो जाता है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए मानव संसाधन को प्रबंधन के विषय में शामिल किया […]
बच्चों का रखें ख्याल
हमारे समाज के अधिकांश लोग गांवों में ही रहते हैं। उनका रहन सहन खान पान आधार व्यवहार आदि प्रकृति के अधिक नजदीक है। किंतु अब पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति के प्रभाव से हमारा समाज भी प्रभावित हो रहा है। जबकि, प्रवृत्ति, प्रकृति परिवेश और परिस्थितियां इससे मेल नही खाती हैं। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए अपने […]