हरीश रावत हेमवती नंदन बहुगुणा और पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा अक्सर कहते थे, ‘पेड़ों के कटने से पहाड़ों की चट्टानें खिसक जाती हैं, मिट्टी बहकर नीचे चली जाती है, जल स्रोत्र सूख जाते हैं और जड़ी-बूटियां नष्ट हो जाती हैं। पेड़ों के कटने से ही बारिश में कमी आ रही है, जिसका खेती पर बुरा […]