परमात्मा के प्रति समर्पण का क्या महत्त्व है? का त उपेतिर्मनसो वराय भुवदग्ने शन्तमा का मनीषा। का वा यज्ञैः परि दक्षं त आप केन वा ते मनसा दाशेम।। ऋग्वेद मन्त्र 1.76.1 (कुल मन्त्र 823) (का) क्या (ते) आपका (उपेतिः) उपाय, तरीका, पूजा (मनसः) मन का (वराय) वरण किया (सुधार के लिए) (भुवत्) हो (अग्ने) सर्वोच्च […]