दिलीप लाल हर कला की एक खासियत होती है। संगीत हो, लेखन हो, चित्रकारी हो, या फिर कोई और कला हो, सबको उसकी ऊंचाई तक ले जाने बड़ी साधना करनी पड़ती है। भाषण देना भी एक कला है। इसे निखारने के लिए भी इन शर्तों से होकर ही साधक को गुजरना पड़ता है। नियमित अभ्यास […]