राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं। राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं। तम घोर था निराशा का दीप बुझा था आशा का अब देखो चहुँ ओर सब […]
गीत : ‘राम आए हैं’
बहुत से लेख हमको ऐसे प्राप्त होते हैं जिनके लेखक का नाम परिचय लेख के साथ नहीं होता है, ऐसे लेखों को ब्यूरो के नाम से प्रकाशित किया जाता है। यदि आपका लेख हमारी वैबसाइट पर आपने नाम के बिना प्रकाशित किया गया है तो आप हमे लेख पर कमेंट के माध्यम से सूचित कर लेख में अपना नाम लिखवा सकते हैं।
राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं। राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं, आए हैं, राम आए हैं। तम घोर था निराशा का दीप बुझा था आशा का अब देखो चहुँ ओर सब […]
पंडित सत्यदेव विद्यालंकार महात्मा मुंशीराम जी [बाद में स्वामी श्रद्धानंद जी] आपस के संघर्ष को टालने में सदा चतुराई से काम लिया करते थे। गुरुकुल को संस्कृत की पाठशाला बनाने किंवा विश्वविद्यालय बनाने का मतभेद दिन-पर-दिन जोर पकड़ता गया। यदि महात्मा जी गुरुकुल में बने रहते तो संभव था कि वह मतभेद संघर्ष में […]
आशीर्वाद दीजिए 🙏😊🙏 हूँ घिरा कब से हुआ, अज्ञान के अँधियार में कोई तो दिखलाए राह, बस हूँ इसी विचार में सारी उम्र वन में उस, मृग की भांति ही फिरा ढूँढता बाहर मगर जो, खुद की महक से था घिरा तूने सब, पाने की हमेशा, बाहर से ही आस की मन में कभी सोचा […]
– मुरली मनोहर श्रीवास्तव वर्ष 2005 से पहले बिहार को लालटेन युग से जाना जाता था। यहां पर बिजली की खास्ता हालत थी। गांव की बात छोड़िए, शहर में 24 घंटे लोग बिजली के लिए तरसते थे लेकिन वर्ष 2005 में श्री नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद धीरे-धीरे ही सही बिहार में बिजली की स्थिति में सुधार देखने को मिलने […]
फूलदेव पटेल मुजफ्फरपुर, बिहार सदियों से यह माना गया है कि शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है. मानव सभ्यता का अस्तित्व शिक्षा से ही जुड़ा हुआ है. हमारी सभ्यता व संस्कृति का विकास भी मानव की जिज्ञासा, ज्ञान की चाह तथा विभिन्न नवीन कौशलों को जानने की ललक के कारण ही नित्य नवीन […]
प्राण हमारे अन्दर आनन्द कब पैदा करते है? हृदय में परमात्मा को स्थापित करने के दो प्रधान कारण कौन से हैं? जीवन में प्रगति का क्रम क्या है? बृहत्स्वश्चन्द्रममवद्यदुक्थ्य1मकृण्वतभियसारोहणंदिवः। यन्मानुषप्रधनाइन्द्रमूतयः स्वर्नृषाचोमरुतोऽमदन्ननु।। ऋग्वेद 1.52.9 (बृहत्) बड़ा (स्वश्चन्द्रम्) आत्म प्रकाश के साथ (अमवत्) उत्तम ज्ञान, उत्तम मन (यत्) जब (उक्थ्यम्) प्रशंसनीय (परमात्मा) (अकृण्वत्) स्थापित (हृदय में) (भियसा) […]
आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी यह वह भूमि है, जहां पर ब्रह्म, विष्णु और महेश तीनों देव का निवास स्थान रहा है। भगवान विष्णु ने भगवान राम रूप में यहां वनवास काटा था, तो ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के लिए यहां यज्ञ किया था और उस यज्ञ से प्रगट […]
डॉ डी के गर्ग ये लेख २ भागो में है। कृपया अपने विचार बताये और जनहित में शेयर करें। भाग -2 सत्य को समझने के बाद अब नारायण शब्द का भावार्थ समझते हैं। नारायण : आपो नारा इति प्रोक्ता आपो वै नरसूनवः। ता यदस्यायनं पूर्वं तेन नारायणः स्मृतः॥ —यह मनुस्मृति [अ॰ १।१०] का श्लोक […]
आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी चित्रकूट का मतलब :- चित्रकूट- दो शब्दों के मेल से बना है- चित्र और कूट । संस्कृत में चित्र का अर्थ है अशोक एवं कूट का अर्थ है शिखर या चोटी। इस वन क्षेत्र में कभी अशोक के वृक्ष बहुतायत मिलते थे। इस कारण इसे चित्रकूट कहा गया होगा। यहां […]
कमरुन निसा लेह, लद्दाख मासिक धर्म, मानव अस्तित्व का एक प्राकृतिक पहलू है, जिसे अक्सर कलंक और चुप्पी में छिपा दिया जाता है. दरअसल जागरूकता की कमी ने ही शर्म और गोपनीयता की संस्कृति को बढ़ावा दिया है. हमारे देश के अधिकतर हिस्सों में आज भी इस पर चर्चा करना बुरा समझा जाता है. यहां तक […]