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“सृष्टि व विक्रमी नवसंवत्सर चैत्र-शुक्ल-प्रतिपदा गौरवपूर्ण दिवस”

ओ३म् ========== आज नव सृष्टिसंवत् एवं विक्रमी संवत्सर आरम्भ हुआ है। हमारे पास समय की अवधि की जो गणनायें हैं वह दिन, सप्ताह, माह व वर्ष में होती हैं। यदि सृष्टि की उत्पत्ति, मानवोत्पत्ति अथवा वेदोत्पत्ति का काल जानना हो तो वह वर्षों में बताया जाता हैै। वैदिक गणनाओं में वर्ष की अवधि सामान्यतः 360 […]

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स्वास्थ्य

“शरीर को सदा स्वस्थ तथा बलवान् बनाने के अचूक उपाय”

ओ३म् ========= आचार्य भद्रसेन जी, अजमेर (1900-1975) वैदिक साहित्य तथा येाग के उच्च कोटि के विद्वान एवं प्रचारक थे। आपने अनेक पुस्तकें लिखी हैं। आपकी एक प्रसिद्ध पुस्तक ‘योग एवं स्वास्थ्य’ है। इस पुस्तक के कई संस्करण प्रकाशित हुए हैं। इसका एक संस्करण सन् 1998 में वैदिक साहित्य के प्रसिद्ध प्रकाशक ‘विजयकुमार गोविन्दराम हासानन्द, दिल्ली’ […]

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भारतीय संस्कृति

-दयानन्द सन्देश मासिक का वेदार्थ-समीक्षा विशेषांक- “पं. राजवीर शास्त्री द्वारा वर्णित महर्षि दयानन्द के वेदभाष्य की प्रमुख विशेषतायें”

ओ३म् ========= दयानन्द सन्देश मासिक पत्रिका आर्यजगत में सिद्धान्तों की पोषक एक प्रमुख पत्रिका है। हम इसके आरम्भ काल से ही पाठक व सदस्य रहे हैं। इस पत्रिका का नवम्बर-दिसम्बर, 1976 संयुक्तांक एक विशेषांक के रूप में प्रकाशित हुआ था जिसका शीर्षक था ‘वेदार्थ-समीक्षा’। यह भी बता दें कि इस पत्रिका का प्रकाशन महान ऋषिभक्त […]

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आज का चिंतन

“ईश्वर जीवों के कर्मों का साक्षी और उन सबका फल प्रदाता है”

ओ३म् ========== क्या आप ईश्वर व उसके बनाये हुए इस संसार को जानते हैं? इसका उत्तर वह बन्धु जिन्होंने वेद व ऋषियों के शास्त्र पढ़े, जाने व कुछ समझे हैं, हां में देते हैं। कोई भी रचना तभी अस्तित्व में आती है कि जब कोई ज्ञानी मनुष्य उसकी रचना करता है। क्या कोई पेण्टिंग बिना […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “यज्ञ एवं योग मनुष्य जीवन के आवश्यक कर्तव्य होने सहित मोक्ष तक ले जाने में सहायक हैं”

=========== महर्षि दयानन्द जी ने वेदानुयायी आर्यों के पांच नित्यकर्म बताते हुए उसमें प्रथम व द्वितीय स्थान पर सन्ध्या एवं देवयज्ञ अग्निहोत्र को स्थान दिया है। प्राचीन ग्रन्थ मनुस्मृति में द्विजों को पंचमहायज्ञों को करने की अनिवार्यता का उल्लेख मिलता है। देवयज्ञ अग्निहोत्र एक ऐसा नित्य-कर्म है जिसका प्रतिदिन किया जाना गृहस्थ मनुष्य का कर्तव्य […]

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पर्व – त्यौहार

“नव-खाद्यान्न यव के स्वागत तथा उत्साह एवं उमंग का प्रतीक होली पर्व”

ओ३म् ========== आज होली का पर्व है। इस अवसर पर हम अपने सभी मित्र महानुभावों को अपनी हार्दिक शुभकामनायें देते हैं। ईश्वर सबको स्वस्थ, निरोग, बलवान, सद्बुद्धि, धन-धान्य, ऐश्वर्य से संयुक्त करें। हमारा देश बलवान व शत्रुरहित हो तथा हमारे देश के निर्धन व कमजोर सभी लोगों को रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा व सुरक्षा आदि मिले, […]

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आज का चिंतन

“परमात्मा के सिवा हमारा कोई चिरस्थाई सुखदाता सहारा नहीं है”

ओ३म् ========= हम लगभग सत्तर वर्ष पूर्व जन्में हैं। कुछ वर्ष बाद हमें संसार से चले जाना हैं। हम कहां से आये हैं और मृत्यु के बाद कहां जायेंगे, हमें इसका ठीक-ठीक ज्ञान नहीं है। वेदादि शास्त्र पढ़ने के बाद हमें यह ज्ञान होता है कि संसार में ईश्वर, जीव तथा प्रकृति का अनादि व […]

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आज का चिंतन

-वैदिक साधन आश्रम तपोवन में वृहद गायत्री महायज्ञ सम्पन्न- “परमात्मा ने इस विशाल ब्रह्मांड को बनाया हैः स्वामी चित्तेश्वरानन्द”

ओ३म् ========== वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून में पांच दिनों से चल रहा गायत्री एवं चतुर्वेद शतकीय महायज्ञ आज दिनांक 13-3-2022 को सोल्लास सम्पन्न हुआ। यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती, पं. सूरतराम शर्मा, वैदिक विद्वान डा. वीरपाल जी, प्राकृतिक चिकित्सक स्वामी योगेश्वरानन्द सरस्वती, महाशय पं. रुवेल सिह आर्य, आश्रम के प्रधान […]

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आज का चिंतन

“अथर्ववेद भाष्यकार ऋषि दयानन्द भक्त पं. क्षेमकरण दास त्रिवेदी”

ओ३म् ========= अथर्ववेद भाष्यकार पं. क्षेमकरण दास त्रिवेदी जी से समस्त आर्यजगत परिचित है। उनका वेदभाष्य विगत एक शताब्दी से वैदिक धर्मियों द्वारा श्रद्धा से पढ़ा जा रहा है। पं. क्षेमकरण दास त्रिवेदी ऐसे विद्वान हैं जो ऋषि दयानन्द के समकालीन रहे और जिन्होंने आर्य विद्वान पं. जयदेव शर्मा, पं. विश्वनाथ वेदोपाध्याय विद्यामार्तण्ड तथा पं. […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “वैदिक साधन आश्रम तपोवन में पांच-दिवसीय वृहद गायत्री यज्ञ प्रगति पर”

ओ३म् ========== वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून देश की आर्यसमाजों की योग साधना एवं वैदिक धर्म प्रचार की एक प्रमुख संस्था है। कोरोना काल में भी यहां नियमों का पालन करते हुए अर्धवार्षिक उत्सव एवं अन्य यज्ञ आदि के आयोजन होते रहे हैं। स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती, पंडित सूरतराम शर्मा, श्री प्रेमप्रकाश शर्मा, श्री विजय कुमार […]

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