33 धरती बंजर हो रही, गाय कटें दिन रात। जीवन बोझिल हो गया, देख मनुज के घात।। देख मनुज के घात, समझ कुछ नहीं आता। जितना समझावें, इसे उल्टा चलता जाता।। अपने पैरों आप कुल्हाड़ी मारे मूरख होय। माता की हत्या करे ,सुख का भागी कोय ? 34 गीता गंगा गाय का, मेल बड़ा अनमोल। […]