60 वैरी भारी क्रोध है,करता सारा नाश। मति को करता भंग है, करता सत्यानाश।। करता सत्यानाश, जगत में होती ख्वारी। घटता है व्यक्तित्व ,पतन की हो तैयारी।। क्रोध के कारण नहीं रहे, कहलाते सम्राट। खोजे से नहीं दिखते, जिनके हमको ठाट।। 61 बुद्धि जिसकी भंग है, वही क्रोध का दास। रावण जैसे ना रहे, मिट […]
कुंडलियां … 19 बुद्धि जिसकी भंग है, …..