512 विक्रम में जब राजा स्कंद गुप्त की ओर से पंचायती संगठन के नाम पत्र लिखा गया तो उस समय खाप पंचायत के 500 नेता एकत्र हुए। जिनमें 500 सामंत भी एकत्रित हुए थे। दो लाख की सेना एकत्रित की गई थी और यह सारी सेना उस समय हूणों के विरुद्ध राजा को दे दी […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
512 विक्रम में जब राजा स्कंद गुप्त की ओर से पंचायती संगठन के नाम पत्र लिखा गया तो उस समय खाप पंचायत के 500 नेता एकत्र हुए। जिनमें 500 सामंत भी एकत्रित हुए थे। दो लाख की सेना एकत्रित की गई थी और यह सारी सेना उस समय हूणों के विरुद्ध राजा को दे दी […]
श्री निहाल सिंह आर्य अध्यापक द्वारा लिखित ‘सर्वखाप पंचायत का राष्ट्रीय पराक्रम ( प्राचीन विशाल हरियाणा )’ नामक पुस्तक में विद्वान लेखक ने अनेक ऐसे ऐतिहासिक और छुपे हुए तथ्यों को स्पष्ट किया है जो आज की युवा पीढ़ी को विशेष रूप से जानने योग्य हैं। इस पुस्तक से हमको पता चलता है कि आज […]
धारा 370 को हटाने के जिस फैसले को लेकर कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल बेकार की चीख चिल्लाहट दिखाते रहे हैं उस पर अब सुप्रीम कोर्ट की ‘सुप्रीम मुहर’ लगने के बाद यह स्थिति साफ हो गई है कि भविष्य में इस प्रावधान के दोबारा लौटने की कोई संभावना शेष नहीं बची है। अपने राष्ट्र […]
चौधरी चेतराम आर्य पहलवान द्वारा लिखवाई गई “मेरी पोथी नंबर 7 इंस्पेक्टर 334 ईसा पूर्व ‘ के माध्यम से उपरोक्त पुस्तक के पृष्ठ संख्या 74 पर उल्लेखित किया गया है कि जब सिकंदर का आक्रमण भारत पर हुआ तो उस समय दो लाख की संख्या में मल्ल योद्धा अपने आप ही एकत्र हो गए। इन […]
संयुक्त राष्ट्र की बढ़ती जनसंख्या के कारण भूखमरी से संबंधित रिपोर्ट के आंकड़े बहुत ही चौंकाने वाले हैं । जिसके अनुसार इस भूमंडल पर इस समय लगभग 85 करोड़ 30 लाख लोग ऐसे हैं जो भुखमरी का शिकार है । रिपोर्ट के अनुसार भुखमरी की अवस्था में जीवन यापन कर रहे इन लोगों में सबसे […]
अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों की विधानसभा के चुनावों में जिस प्रकार वहां के मतदाताओं ने देश के विपक्ष का सफाया किया है उससे सारा विपक्ष इस समय सदमे की अवस्था में है। विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को चुनाव परिणाम के पश्चात सांप सूंघ गया था। उन्हें समझ नहीं आ रहा […]
( धर्मराज युधिष्ठिर ने धर्म और नीति के मर्मज्ञ भीष्म पितामह से उनके अंतिम क्षणों में राजधर्म की शिक्षा के साथ-साथ लोक धर्म की शिक्षा भी ग्रहण की। धर्मराज युधिष्ठिर एक न्यायप्रिय प्रजावत्सल सम्राट थे। महाभारत के युद्ध से पूर्व भी वह इंद्रप्रस्थ के राजा रह चुके थे। उन्हें राजनीति और राजधर्म का स्वयं भी […]
भारत में आर्यों को विदेशी बताने वालों ने ही यहां गोरे-काले अथवा आर्य-द्राविड़ का भेद उत्पन्न किया। जिससे यह बात सिद्घ हो सके कि भारत में तो प्राचीन काल से ही गोरे-काले का भेद रहा है और यहां जातीय संघर्ष भी प्राचीन काल से ही रहा है। इसके लिए देवासुर संग्राम को या आर्य दस्यु […]
हे धर्मराज ! मनुष्य दूसरों द्वारा किए हुए जिस व्यवहार को अपने लिए उचित नहीं समझता , दूसरों के प्रति भी वह वैसा व्यवहार ना करे। प्रत्येक मनुष्य को यह समझना चाहिए कि जो बर्ताव अपने लिए अच्छा नहीं है, वह दूसरों के लिए भी अच्छा नहीं हो सकता। जिस मनुष्य की अभी स्वयं जीने […]
( धर्म जैसे जिस पवित्र शब्द के बारे में आजकल अधिकतर लोग शंकित रहते हैं और उल्टी सीधी परिभाषाएं स्थापित करते हैं। धर्म को ‘अफीम’ कहकर अपमानित करते हैं। उनकी दृष्टि में धर्म एक ऐसा नशा है जो मनुष्य से पाप कार्य करवाता है। जबकि वैदिक वांग्मय में धर्म पाप से मुक्त कर पुण्य कार्यों […]