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संपादकीय

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 10 , 10वीं लोकसभा – 1991 – 1996

विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के पतन के पश्चात जब चंद्रशेखर को कांग्रेस ने अपना मोहरा बनाकर देश का प्रधानमंत्री बनाया तो आरंभ से ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस समय नई लोकसभा के चुनाव बहुत निकट हैं । कांग्रेस 1980 के इतिहास को दोहराने की तैयारी कर रही थी, जब इंदिरा गांधी […]

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संपादकीय

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 9 , 9वीं लोकसभा – 1989 – 1991

वी0पी0 सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, जो कि 31 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री के रूप में सम्मिलित हुए थे। वह बहुत ही महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व थे। प्रारंभ से ही उनकी दृष्टि प्रधानमंत्री के पद पर लगी हुई थी। कांग्रेस में प्रधानमंत्री का पद एक परिवार से अलग किसी दूसरे […]

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संपादकीय

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 8, 8वीं लोकसभा – 1984 – 1989

देश की सशक्त नेता श्रीमती इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को उन्हीं के अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई थी। श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जुलाई 1982 को ज्ञानी जैल सिंह को देश का राष्ट्रपति बनवाया था। ज्ञानी जैल सिंह ने उस समय कहा था कि यदि मेरी नेता अर्थात इंदिरा गांधी मुझे झाड़ू […]

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संपादकीय

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 7 , 7वीं लोकसभा – 1980 – 1984

देश उस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। जनता पार्टी के नेताओं की निजी महत्वाकांक्षाओं ने देश को निराश किया था। ऐसे में नए चुनाव संपन्न हो रहे थे। ‘जात पर, न पात पर, इंदिरा तेरी बात पर, मोहर लगेगी हाथ पर….’ यह नारा उस समय देश के जनमानस को छू रहा था। […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

सावरकरजी के हिन्दुत्व और नेहरूजी की ‘हिन्दुस्तान की कहानी’ का सच

Nehru ji ki jayanti 27 Mai per Vishesh नेहरू जी की जयंती 27 में पर विशेष स्वतंत्रता आंदोलन के काल में हमारे क्रांतिकारी जब भी कोई ‘आतंकी घटना’ कर ब्रिटिश सरकार को हिलाने का प्रशंसनीय कार्य करते थे तभी हमारे कांग्रेसी नेताओं की कंपकंपी छूट पड़ती थी। उस कंपकंपी से मुक्ति पाने के लिए गांधीजी […]

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इतिहास के पन्नों से हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

28 मई जयंती पर विशेष: गांधीजी से चार गुणा अधिक जेल में रहे सावरकरजी

हमारे क्रांतिकारियों ने हर वर्ष की भांति 1933 के प्रारंभ से ही कई स्थानों पर बम विस्फोट कर करके सरकार की नाक में दम कर दिया था। सरकार का उन दिनों वश चलता तो वह एक क्रांतिकारी को भी छोड़ती नही। परंतु क्रांतिकारियों के पीछे जनता जनार्दन का व्यापक समर्थन था, इसलिए सरकार पूर्णत: क्रूर […]

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इतिहास के पन्नों से संपादकीय

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 6, छठी लोकसभा – 1977 – 1980

आपातकाल के दौरान जनता पर किए गए अत्याचारों से खिन्न भारत का मतदाता कांग्रेस के विरुद्ध हो चुका था। इंदिरा गांधी ने यद्यपि पांचवी लोकसभा का कार्यकाल 1 वर्ष बढ़ा लिया था परंतु अंत में उन्हें जनमत के सामने झुकना पड़ा और देश में आम चुनाव की घोषणा कर दी गई। 16 से 20 मार्च […]

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इतिहास के पन्नों से

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 5 , 5 वीं लोकसभा – 1971 – 1977

कांग्रेस में हुए विभाजन के उपरांत इंदिरा गांधी के लिए सत्ता में बने रहना बड़ा कठिन हो रहा था। उन्हें कई प्रकार की चुनौतियां मिल रही थीं। सिंडिकेट उनके लिए सिरदर्द बन चुका था। क्योंकि सिंडिकेट के नेता उनके लिए दिन प्रतिदिन कई प्रकार की चुनौतियां खड़ी करते जा रहे थे। देश की अर्थव्यवस्था को […]

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संपादकीय

ममता बनाम चौधरी में उलझी बंगाल की राजनीति

कहा जाता है कि राजनीति में कभी कोई किसी का स्थाई शत्रु या मित्र नहीं होता। यहां लोगों के संबंध पानी के बुलबुले के समान होते हैं । जब तक किसी के साथ रहकर स्वार्थ पूरे हो रहे होते हैं तब तक वह मित्र होता है पर जैसे ही राजनीतिक स्वार्थ पूरे हो जाते हैं […]

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संपादकीय

भारत की 18 लोकसभाओं के चुनाव और उनका संक्षिप्त इतिहास, भाग 4

चौथी लोकसभा – 1967 – 197 देश की चौथी लोकसभा के चुनाव 1967 में संपन्न हुए। पंडित जवाहरलाल नेहरू के पश्चात होने वाले यह पहले आम चुनाव थे। लाल बहादुर शास्त्री जी को किसी आम चुनाव का सामना नहीं करना पड़ा। उनके पश्चात देश की कमान श्रीमती इंदिरा गांधी के हाथों में आई। श्रीमती इंदिरा […]

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