पश्चिमी बंगाल में इस समय ममता बैनर्जी का शासन है। जब से इन्होंने पश्चिमी बंगाल में शासन सत्ता अपने हाथों में संभाली है, तब से वहां आतंकी घटनाएं बढ़ गयीं हैं, कई लोगों के हौसले बढ़ गये हैं और अब वहां की एक मस्जिद के इमाम ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सिर कलम […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
गतांक से आगे…….. इस उपदेश में राम का संकेत है कि राजा के निर्णयों की गोपनीयता सदा बनी रहनी चाहिए। यदि तुम्हारे निर्णय या तुम्हारे मन की बात समय से पहले लोगों को पता चल जाती है तो निश्चय ही इसे आपकी असावधानी माना जाएगा। आपको यह ध्यान रखना होगा कि दीवारों के भी कान […]
गतांक से आगे…….. यह मिलन पारिवारिक है दो भाईयों का मिलन है, पर इसमें चर्चा ऐसी चली है कि जो परिवार को भी और समाज व राजनीति को भी कुछ संदेश दे रही है कि अपने से छल करने वालों के प्रति भी सहज और सरल रहो, वर्तमान में जीओ, और आये हुए अतिथि का […]
दिल्ली को ‘स्वर्ग’ बनाने के पश्चात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अब पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के सपने देखने लगे हैं। हम उनके इन सपनों को मुंगेरीलाल के हसीन सपने नहीं कहेंगे, क्योंकि सपने देखना हर व्यक्ति नैसर्गिक अधिकार है, और लोकतंत्र व्यक्ति के सपनों का न केवल सम्मान करता है, अपितु उन्हें साकार कराने […]
इस समय सभी प्रदेश वासियों के मन मस्तिष्क में एक ही प्रश्न कौंध रहा है कि इस बार प्रदेश के सिंहासन का स्वामी कौन बनने जा रहा है? सपा के कलह ने राजनैतिक समीकरणों को कुछ हिलाया तो है, पर इस सारे घटनाक्रम से अखिलेश यादव जिस प्रकार निपटे हैं और उन्होंने अपनी सपा को […]
इधर हम सभी नोटबंदी और उत्तर प्रदेश में सपा की नौटंकी देखने में व्यस्त रहे और उधर जम्मू कश्मीर की विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने एक बार पुन: राष्ट्रगान का अपमान कर डाला। इधर हम पांच राज्यों के चुनावों की तैयारियां कर रहे हैं और उधर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला […]
हमारे देश में प्रजातंत्र की मजबूत जड़ों के होने की बात अक्सर कही जाती है, पर जब हम उत्तर प्रदेश में हो रही राजनीति की वर्तमान दुर्दशा के चित्रों को बार-बार घटित होते देखते हैं, तो यह विश्वास नहीं होता कि भारत में प्रजातंत्र की गहरी जड़ें हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेशों को कुछ […]
राजनीति कैसे-कैसे खेल कराती है और कैसे आदमी अपने ही बनाये-बुने मकडज़ाल में फंसकर रह जाता है-इसका जीता जागता उदाहरण मुलायम सिंह यादव हैं। एक समय था जब नेताजी भारत की राजनीति को प्रभावित करते थे और दिल्ली दरबार उनके आदेश की प्रतीक्षा किया करता था, आज वही व्यक्ति निढाल, बेहाल, थका मादा सा और […]
आजकल देश में ‘असहिष्णुता’ कुछ अधिक ही चर्चा में है। ‘असहिष्णुता’ को लेकर यदि बात राजनीति की की जाए, तो यहां भी ‘असहिष्णुता’ का अपना ही इतिहास है। 1980 के बाद राजनीतिक ‘असहिष्णुता’ अधिक बढ़ी। कभी-कभी तो यह राजनीतिक अस्पृश्यता के रूप में भी देखी गयी। 1980 इंदिरा गांधी जब दोबारा प्रधानमंत्री बनीं तो विपक्ष […]
अभी हमने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को उनकी जयंती के अवसर पर याद किया है। उन्हें आपातकाल का लोकनायक माना गया है, उनके नाम के स्मरण मात्र से आपातकाल की स्मृतियां और आपातकाल के प्रति जिज्ञासाएं अनायास ही उभर आती हैं। आपातकाल की घोषणा के विषय में यह प्रश्न भी स्वाभाविक रूप से आता है कि […]