यूरोप में मानवाधिकारों की संकल्पना भारत से गयी है। जबकि तथाकथित प्रगतिशील लेखकों और इतिहासकारों ने हमें कुछ इस प्रकार समझाने का प्रयास किया है कि यूरोप से चलकर मानवाधिकार की संकल्पना भारत पहुंची है। यूरोप ने 15 जून 1215 को अपने ज्ञात इतिहास की ऐसी पहली तिथि स्वीकार किया है जब मानवाधिकारों की ओर […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
भारत के छात्रों की राजनीति एक बार फिर गरमा रही है। जे.एन.यू. में कुछ दिनों पूर्व जो कुछ देखने को मिला था अब कुछ वैसा ही डी.यू. में देखने को मिला है-जहां कुछ छात्रों ने देशविरोधी नारे लगाये हैं, जिसका ए.बी.वी.पी. ने विरोध किया है। कम्युनिस्ट दलों के नेताओं सहित सभी धर्मनिरपेक्ष दलों ने न्यूनाधिक […]
बी.एम.सी. चुनाव परिणामों से पूर्व शिवसेना काफी उत्साहित थी। शिवसेना का आत्मविश्वास बताा रहा था कि नोटबंदी से परेशान हुए लोग मोदी सरकार को दण्ड अवश्य देंगे और वह दण्ड शिवसेना के स्वयं के लिए पुरस्कार बन जाएगा, जिससे वह बी.एम.सी. में अपना बहुमत प्राप्त करने में सफल होगी। इसी भ्रांति के कारण शिवसेना ने भाजपा […]
महाराष्ट्र की जनता ने राष्ट्रवाद बनाम छद्म धर्मनिरपेक्षतावाद के बीच स्पष्ट अंतर करने वाला जनादेश देकर भाजपा को वहां की नगर पालिकाओं/महानगरपालिका में शानदार सफलता प्रदान की है। महाराष्ट्र की जनता के इस परिपक्व निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि वह अपने राष्ट्रवादी नेतृत्व के साथ कई प्रकार के भौतिक और मानसिक कष्ट झेल […]
अंतरिक्ष अनंत है, और जितना अंतरिक्ष अनंत है-उतना ही वेद ज्ञान अनंत है। अनंत ही अनंत का मित्र हो सकता है। जो सीमाओं से युक्त है, सीमाओं में बंधा है, ससीम है, वही सांत है, उसके ज्ञान की अपनी सीमाएं हैं, परंतु ईश्वर ने हमें ‘मन’ नाम का एक ऐसा कंप्यूटर दिया है, जिसकी शक्तियां […]
भारत की राजनीति में मुसलमानों को केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में प्रयोग करते रहने की परंपरा कांग्रेस ने डाली थी। 1947 में जो मुसलमान भारत में रह गये थे-उनमें से अधिकांश के भीतर एक भय व्याप्त था कि पाकिस्तान की मांग मजहब के आधार पर की गयी थी-जिसे 1945-46 में हुए नेशनल असेम्बली के […]
यह काल नि:संदेह भारत में मुस्लिम शासन में ही आया था। अन्यथा हमारी तो मान्यता थी कि- ‘यंत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवताओं का वास होता है। हमने माता को निर्माता माना। व्यष्टि से समष्टि तक में उसकी प्रधानता को और उसकी महत्ता को स्वीकार किया। […]
पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-47
भावना मिट जायें मन से पाप अत्याचार की गतांक से आगे……… तब ऐसी बुद्घि व्यक्ति से पवित्र कार्य कराती है, व्यक्ति की धैर्य शक्ति में वृद्घि करती है, उसे सहनशील बनाती है। ठिकाने पर आयी बुद्घि से जो अनुष्ठान किया जाता है-उसमें आस्था और श्रद्घा के साथ जुड़ी बुद्घि ही विवेकशील होती है। उसी बुद्घि […]
पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-46
भावना मिट जायें मन से पाप अत्याचार की कई बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को स्वाभिमान का प्रश्न बना लेता है, और उन्हीं में बह जाता है। बात-बात पर कहने लगता है कि-यह बात तो मेरे स्वाभिमान को चोट पहुंचा गयी, और कोई भी व्यक्ति मेरे स्वाभिमान को चोटिल नहीं कर […]
पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-45
भावना मिट जायें मन से पाप अत्याचार की वैदिक संस्कृति में गृहस्थ धर्म को सर्वोत्तम माना गया है। वेद ने एक सदगृहस्थ का चित्र खींचते हुए कहा है :- ”तुम दोनों व्यवहारों में (पति-पत्नी की ओर संकेत है) सदा सत्य बोलते हुए भरपूर धन कमाओ। हमारी प्रभु से कामना है कि यह पत्नी तुझ पति […]