स्मरण रहे कि एक बार महर्षि अरविंद ने सन् 1926 में कहा था कि “किसी भी प्रकार से मुसलमानों को तुष्ट करने का प्रयास मिथ्या कूटनीति है…. एक तरफा ध्यान करके सभी राष्ट्रीय कार्यों में लगकर राष्ट्र के विकास के मार्ग पर चलते रहते तो मुसलमान भी अपने आप धीरे धीरे राष्ट्रीय कार्यों में लगते।” […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
कौन है पराली जलाने का वास्तविक अपराधी
पिछले कुछ वर्षों से हर वर्ष दीपावली के आसपास पराली से पूरा एनसीआर पीड़ित हो उठता है । अब प्रश्न यह है कि इस पराली को जलाकर एनसीआर सहित देश के कई भागों में लोगों के लिए ‘ डेथ चेंबर ‘ बनाने की इस प्राणलेवा घटना का जिम्मेदार कौन है ? सचमुच इस प्रश्न पर […]
1976ई. में स्व. श्रीवेणीशंकर मु. वासु ने एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था-‘‘कहां गयी गोचर भूमि’’। लेख बड़ा तथ्यपरक और मार्मिक था, जो आज भी हमारी सरकार और हमारे देश वासियों की उस सामूहिक चेतना को झंकृत करने की सामथ्र्य रखता है, जो इस समय गाय के विषय में पूर्णत: उदासीन है, या मर […]
इतिहास बेचने वाले गद्दारो
भारत लहू की धार से कभी अपमानित नहीं हुआ , तू-इतिहास पर हमला कर देश को लज्जित किया- जम्मू द्वीपे आर्यवृते के भारत भूखंड पर प्रकृति की गोद में हुआ मानव जन्म प्रकृति की वाणी की पुत्री संस्कृत हुई प्रथम सूर्य की किरण से धरती पवित्र हुई भौतिकवाद की माता बनी भारत आध्यात्मिक धार,गंगा से […]
मुझे गर्व है अपने आप पर – – – – –
सचमुच मेरा भारत महान है, क्योंकि मेरा भारत ही है जो हमें एक धर्म – सत्य सनातन वैदिक , एक धर्म ग्रंथ – वेद , एक उपास्य देव – ईश्वर ( ओ३म ) , एक गुरु मंत्र — गायत्री मंत्र , एक राष्ट्र – आर्यावर्त राष्ट्र , एक विश्व ध्वज — ओ३म पताका (भगवा ) […]
भारत के महान क्रांतिकारी आंदोलन में भाई परमानंद जी का नाम एक महान क्रांतिकारी के नाम रूप में दर्ज है । व्यवहार और आचरण से बहुत ही सादगी पसंद भाई परमानंद जी को उनके इन गुणों के कारण देवतास्वरूप भाई परमानंद के रूप में जाना जाता है । आर्य समाज से जुड़े होने के कारण […]
उठो उठो जवां उठो सुधीर कारवां उठो
उठो उठो जवाँ उठो सुधीर कारवाँ उठो हुकाँर के उठो उठो जवाँ उठो जवाँ उठो सुनो पुकार मात की दहाड़ के बढे चलो नदी पड़े फलाँग लो पहाड़ पे चढ़े चलो सुगम्य राह की भला रखो न आश ही कभी कुपंथ पंथ चाह को रखो न पास भी कभी तजो सभी मलाल को विराट हो […]
-विनोद बंसल बात पांच दिसंबर 2017 की है जब देश के प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंड पीठ स्वतंत्र भारत के सर्वाधिक चर्चित 77 वर्षों से लंबित मामले पर अपनी पहली सुनवाई हेतु उपस्थित थी. इससे पहले 11 अगस्त को न्यायालय ने सभी पक्षकारों को अपने अपने पक्ष के दस्तावेज समय पर जमा […]
यदि सरदार पटेल जैसी निर्भीकता से गांधीजी कार्य करते और अंग्रेजों से उनकी गलतियों को सुधारने के लिए कठोरता से अपना पक्ष रखते तो परिस्थितियां इतनी जटिल नहीं होतीं , जितनी हो गई थीं । गांधीजी की स्थिति तो यह थी कि वह सरदार पटेल को भी निर्भीक होने से टोकते रहते थे। पर अंत […]
1 नवंबर 1984 के वे भयानक दंगे जिन्होंने अनेकों निर्दोष सिक्खों की जान ले ली थी , अभी तक चित्त से उतरे नहीं हैं । जिन लोगों ने सिख विरोधी दंगों के घाव झेले हैं , यह केवल उनका हृदय ही जानता है कि उन्होंने इन जख्मों को कैसे झेलने का प्रयास किया है ? […]