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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय – 18(क) गांधी जी की अहिंसा बनाम स्वामी श्रद्धानंद जी की क्रांति

इन्द्र विद्यावाचस्पति लिखते हैं :–” जब लम्बी दासता से बंजर हुई भारत की भूमि को सशस्त्र क्रान्ति के विशाल हल ने खोदकर तैयार कर दिया और जब सुधारकों के दल ने उसमें मानसिक स्वाधीनता के बीज बो दिए , तब यह सम्भव हो गया कि उसमें से राजनीतिक स्वाधीनता के बिना सामाजिक स्वाधीनता और सामाजिक […]

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भयानक राजनीतिक षडयंत्र

कबीर और अंबेडकरवादियों की साजिश

-अरुण लवानिया बामसेफियों और 22 प्रतिज्ञाओं वाले अंबेडकरवादियों की छटपटाहट मोदी के सत्तासीन होने के बाद और ही बढ़ गयी है।जितने भी ईश्वरवादी संत हैं उन्हें एक-एक कर नास्तिक, हिंदू द्रोही, डा. अंबेडकर के विचारों और बुध्द के समीप या बौध्द साबित करने का कुचक्र भी जोर-शोर से चल रहा है। बामसेफियों की प्रचार सामग्रियों, […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदान इतिहास हमारा) अध्याय -17 (ख ) 18 57 की क्रांति अर्थात हमारा पहला अंग्रेजों ! भारत छोड़ो आंदोलन

1857 में चला था पहला ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ 1857 की क्रांति के इस प्रकार के विस्तृत योजनाबद्ध विवरण से पता चलता है कि उस समय भारत में पहला ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ प्रारम्भ हुआ था ।यह तभी सम्भव हुआ था जब हमारे भीतर आजादी की ललक काम कर रही थी। कुछ लोगों ने 1857 की क्रान्ति […]

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आओ कुछ जाने

क्या है इतिहास की सही परिभाषा

क्या है इतिहास की सही परिभाषा इतिहास की भारतीय विद्वानों के अनुसार परिभाषा कुछ इस प्रकार स्थापित की जा सकती है :— ” इतिहास धर्म का रक्षक है , संस्कृति का पोषक है , मानवता का उद्धारक है, समाज का मार्गदर्शक है , राष्ट्र का उन्नायक है और अतीत में हुई दुर्घटनाओं से शिक्षा लेकर […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय – 17 (क) बाबा औघड़नाथ अर्थात महर्षि दयानंद और 18 57 की क्रांति

1857 का ‘अंग्रेजो ! भारत छोड़ो आन्दोलन’ सर चार्ल्स ट्रेवेलियन ने सन 1853 की संसदीय समिति के सामने ‘भारत की अलग-अलग शिक्षा प्रणालियों के अलग-अलग राजनीतिक परिणाम’ – शीर्षक से एक लेख लिखकर प्रस्तुत किया था । इस लेख में उसने लिखा था कि :- “भारतीय राष्ट्र के विचारों को दूसरी ओर मोड़ने का केवल […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा ( है बलिदान इतिहास हमारा ) अध्याय -16 ( ख) भारत में अंग्रेजों के शासन काल के 100 वर्षों में हुए विद्रोहों की सूची

महाराष्ट्र मण्डल की स्थापना 1757 में हुए पलासी के युद्ध के पश्चात किस प्रकार अंग्रेज भारत में जम गए और उन्होंने अपना साम्राज्य विस्तार करना आरम्भ किया ? – इतिहास का यह निराशाजनक तथ्य तो हमें बताया व पढ़ाया जाता है परंतु इसी समय सिंधिया , होलकर , गायकवाड और भौसले जैसे चार राजघरानों के […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श प्रेरक और अनुकरणीय है

ओ३म् =========== वैदिक धर्म एवं संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन आदर्श, अनुकरणीय एवं प्रेरक उदाहरणों से युक्त जीवन है। वह आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा, आदर्श शत्रु, आदर्श मित्र, ईश्वर, वेद एवं ऋषि परम्पराओं को समर्पित, उच्च आदर्शों एवं चरित्र से युक्त महापुरुष व महामानव थे। त्रेता युग में चैत्र […]

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इतिहास के पन्नों से

सैकड़ों रियासतों में बंटे भारत को अखंड बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका थी सरदार पटेल की

जो लोग यह मानते हैं कि भारत में कभी एक राष्ट्र की भावना नहीं रही वह भारत के इतिहास और भारतीय और भारतीय संस्कृति के प्रति शत्रुभाव रखने वाले हैं । भारत प्राचीन काल से राष्ट्र , राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता के भाव से भरा हुआ रहा है । इस भावना को भंग करने के दृष्टिकोण […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा ( है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय – 16 (क ) मथुरा के जाटों का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

बिखरा रहा स्वराज्य का गुलाल मुगल काल में अनेकों हिन्दुओं ने अपनी आजादी की रक्षा के लिए अपने बलिदान दिए। ऐसे बलिदानों में धर्मवीर हकीकत राय का नाम भी सम्मिलित है। जिसने चोटी जनेऊ न देकर अपने प्राण दे दिए और धर्म की बलिवेदी पर सहर्ष अपना बलिदान दे दिया। संसार के अधिकतम क्रूर और […]

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स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय -15 ( ख) फतेह सिंह, जोरावर सिंह और बंदा बैरागी की गौरव गाथा

फतेहसिंह जोरावरसिंह का बलिदान इसी प्रकार जोरावरसिंह व फतेहसिंह का बलिदान भी पंजाब की बलिदानी भूमि की एक पवित्र धरोहर है। अपने दोनों पुत्रों की शहादत के समय गुरु गोविन्द सिंह ने एक पौधे को उखाड़ते हुए कहा था कि जैसे यह पौधा जड़ से उखड़ आया है वैसे ही एक दिन हिन्दुस्तान से तुर्की […]

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