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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा

देश के इतिहास का महानायक पेशवा बाजीराव बल्लाल

आप इतिहास की किताबों में समूचा मध्यकाल भले खिलजी, सैयद, लोदी या मुगल नाम से पढ़ लें, पर समूचे मध्यकाल में आपको एक भी बाहरी योद्धा ऐसा नहीं मिलेगा जिसने अपने जीवन मे दस बड़ी लड़ाइयां लड़ी हों। यहाँ तक कि गजनवी जैसे लुटेरे भी योद्धा कहे जाते हैं जो चोरों की तरह घुसते और […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा

क्या है चाणक्य नीति में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी

प्रो लल्लन प्रसाद चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन काल भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इसके विधाता निर्माता, सलाहकार सब कुछ आचार्य कौटिल्य थे। राज्य को उन्होंने एक सशक्त प्रशासनिक ढांचा दिया, विभागध्यक्षों में स्पष्ट कार्य विभाजन किया, उनकी कार्यशैली, आपसी सहयोग के नियम, उनके कामों के निरीक्षण की प्रणाली, उनको प्रोत्साहन तथा दण्ड […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विभीषिका दिवस मनाए जाने की घोषणा का औचित्य

राजेन्द्र शर्मा सवाल तो यह है कि क्या ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ की नरेंद्र मोदी की कल्पना, इस भयानक त्रासदी को याद रखने के अब तक के प्रयासों की मुख्यधारा के काम में कुछ जोड़ती है, उसे आगे बढ़ाती है? शायद नहीं। बेशक, यह दिन विभाजन की विभीषिका के स्मरण के लिए है। लेकिन, ऐसी […]

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इतिहास के पन्नों से भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा

भारतीय इतिहास और प्रतिभा का विकृतिकरण

  #डॉविवेकआर्य . कुछ दिन पहले मैं किसी मित्र की MA की इतिहास की पुस्तक पढ़ रहा था.उसमे लिखा था प्राचीन भारत में जाति को वर्ण कहा जाता था. संस्कृत भाषा में वर्ण का अर्थ है रंग. अतः रंग के आधार पर उत्तर भारतीयों ने गौरे रंग वालों को ब्राह्मण कहा. उत्तर भारत के काले […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा

एंटोनियो माइनो उर्फ सोनिया गांधी की कारस्तानी बरपी है अर्णब पर

राष्ट्र-चिंतन *अर्नब से ज्यादा जहरीला तो* *रबिस,बरखा,प्रनब राजदीप आदि हैं* *विष्णुगुप्त* आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सरेआम चोर कह सकते हैं, आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सरेआम दंगाई कह सकते हैं, आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सरेआम भ्रष्ट कह सकते हैं, आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जहरीला कह सकते हैं, आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

मेरी पुस्तक ‘भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा’ ( है बलिदानी इतिहास हमारा ) अब छपकर हुई तैयार

इस पुस्तक का उपसंहार इस प्रकार है :- स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात भारत जब अपने वर्तमान दौर में प्रविष्ट हुआ तो भारत की सत्ता की कमान गांधीजी के राजनीतिक शिष्य नेहरू जी के हाथों में आई। दुर्भाग्यवश नेहरु जी ने भारत की छद्म अहिंसा को इस देश का मौलिक संस्कार बनाने का प्रयास किया । […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदान इतिहास हमारा) अध्याय – 19 (ग) अंग्रेजों ने भारत क्रांति -भय से छोड़ा था , गांधी के कारण नहीं

अंग्रेज चाहते थे देश को कई टुकड़ों में बांटना भारत के इतिहास का यह एक विडम्बना पूर्ण तथ्य है कि जिस स्वतन्त्रता की लड़ाई को यह देश 1235 वर्ष तक ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’ – के आधार पर लड़ता रहा , उसी स्वतन्त्रता के मिलने का जब समय आया तो स्वतन्त्रता के आन्दोलन पर […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा ( है बलिदान इतिहास हमारा ) अध्याय — 19 ( ख ) श्रद्धानंद , वीर सावरकर और महात्मा गांधी

श्रद्धानन्द जी की हत्या और गांधीजी 23 दिसम्बर 1926 को स्वामी श्रद्धानन्द जी महाराज को एक धर्मांध मुसलमान ने गोली मार दी थी । तब गांधी जी ने स्वामी श्रद्धानंद जी के हत्यारे के प्रति भी भाई जैसे सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। गांधीजी ने अपनी मुस्लिम तुष्टीकरण की मानसिकता का परिचय देते हुए […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा )अध्याय – 19 (क) अंत में हमारा बलिदानी इतिहास ही जीता

अन्त में हमारा बलिदानी इतिहास ही जीता गांधी जी और उनकी कांग्रेस जहाँ ब्रिटिश राजभक्ति के लिए जानी जाती है वहीं मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए भी जानी जाती है। गांधीजी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति की आलोचना करते हुए स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने 1937 में 30 दिसम्बर को अहमदाबाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा के […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय – 18( ग) महात्मा गांधी के खिलाफत आंदोलन का सच

गांधीजी और खिलाफत गांधीजीने ‘खिलाफत आन्दोलन’ का समर्थन कर अपनी मुस्लिम भक्ति को भी प्रकट किया था । जबकि यह सच है कि ‘खिलाफत आन्दोलन’ का भारत की स्वाधीनता से कोई लेना-देना नहीं था , परन्तु गांधी जी ने इन सब बातों को एक ओर रखकर ‘खिलाफत आन्दोलन’ में रुचि दिखाई । कुछ लोगों ने […]

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