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स्वर्णिम इतिहास हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा भगवान श्री राम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा श्रीराम, अध्याय – 8 राक्षस को जीने का अधिकार नहीं

राक्षस को जीने का अधिकार नहीं शत्रु जब अपनी दुष्टता की पराकाष्ठा पर हो तब उसके प्रति किसी भी प्रकार का दयाभाव प्रकट करना उचित नहीं होता। यदि उन परिस्थितियों में उस पर दयाभाव प्रकट करते हुए उसे छोड़ दिया गया तो वह चोटिल सांप की भांति आप पर फिर हमला करेगा और बहुत संभव […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

क्या सुब्रत मुखर्जी  मरे नहीं मारे गये ?—-डॉक्टर राकेश कुमार आर्य

    ——————————————— राजनीति पूरी तरह खूनी हो चुकी है। इसके अनेकों उदाहरण हमें समाचार पत्रों में सुनने को मिलते रहते हैं। पश्चिम बंगाल से हाल ही में वहाँ के सबसे वरिष्ठ नेता सुब्रत मुखर्जी के विषय में भी जो शंका आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं इससे स्पष्ट होता है कि वह भी मरे नहीं […]

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इतिहास के पन्नों से स्वर्णिम इतिहास हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

भारत का वास्तविक राष्ट्रपिता कौन ? श्रीराम या ……. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा : भगवान श्रीराम, अध्याय – 7 (ख)

तुम्हें देखते ही देशद्रोही भाग खड़े हों नींव रखी विनाश की नहीं रहा कुछ ज्ञान। कालचक्र को देखकर हंसते खुद भगवान।।       बाल्मीकि जी द्वारा किए गए इस प्रकार के वर्णन से स्पष्ट होता है कि शूर्पणखा इस समय बहुत अधिक भयभीत थी। उसे यह अपेक्षा नहीं थी कि उसके भाई के द्वारा भेजे गए […]

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इतिहास के पन्नों से स्वर्णिम इतिहास हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

भारत का वास्तविक राष्ट्रपिता कौन ? श्रीराम या ……. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा : भगवान श्रीराम, अध्याय -7 क तुम्हें देखते ही देशद्रोही भाग खड़े हों

तुम्हें देखते ही देशद्रोही भाग खड़े हों शूर्पणखा का कार्य अनैतिक और अनुचित था। जिसके अनुचित और अनैतिक कार्य का सही फल लक्ष्मण जी ने उसे दे दिया था। इसके पश्चात अब वे परिस्थितियां बननी आरंभ हुईं जो उस कालखंड की ऐतिहासिक क्रांति का सूत्रपात करने वाली थीं। यह घटना राक्षस वंश के लिए ऐसी […]

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आओ कुछ जाने

दुनिया में बेजोड़ है राजस्थान की स्थापत्य और वास्तुकला

विवेक भटनागर ऐतिहासिक रूप से मेवाड़ या शिबि जनपद का भारतवर्ष की राजनीति में अत्यन्त व्यापक प्रभाव है। इस जनपद का वर्णन स्ट्रेबो ने अपनी इण्डिका में शिबोई जन के रूप में किया है। यहां पर स्थापत्य का विकास क्रम इतिहासिक रूप से दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से आगे जाता है। इस क्षेत्र में प्रस्तर […]

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इतिहास के पन्नों से स्वर्णिम इतिहास हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

भारत का वास्तविक राष्ट्रपिता कौन ? श्रीराम या ……. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा : भगवान श्रीराम, अध्याय – 6

राक्षसों के संहारक बनो शूर्पणखा का कार्य अनैतिक और अनुचित था। जिसके अनुचित और अनैतिक कार्य का सही फल लक्ष्मण जी ने उसे दे दिया था। इसके पश्चात अब वे परिस्थितियां बननी आरंभ हुईं जो उस कालखंड की ऐतिहासिक क्रांति का सूत्रपात करने वाली थीं। यह घटना राक्षस वंश के लिए ऐसी घटना सिद्ध हुई […]

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पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा : अंधेरा छटेगा जरूर

‘अंधेरा छटेगा जरूर’-  पुस्तक के लेखक डॉ आदित्य कुमार गुप्त जी हैं । गुप्त जी की यह पुस्तक काव्य में है । जिसमें उन्होंने अपनी 46 कविताओं को स्थान दिया है। ‘अंधेरा छटेगा जरूर’ नामक उनकी कविता के नाम से ही इस पुस्तक का नामकरण किया गया है। वास्तव में उनकी यह कविता इस पुस्तक […]

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गौ और गोवंश

गाय के दूध से बनी छाछ को किया जाए राष्ट्रीय पेय घोषित

आज देश गोवर्धन पर्व मना रहा है। बहुत बड़ी संख्या में लोगों को यह बात पता नहीं है कि गौ संरक्षण और गोवंश के सँवर्धन के लिए ही गोवर्धन का पर्व मनाया जाता है। किसी पौराणिक अंधपरंपरा के वशीभूत होकर लोग इस त्यौहार को मना रहे हैं। वास्तव में भारत की प्राचीन कृषि व्यवस्था गौ […]

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इतिहास के पन्नों से

औरंगजेब ने भी लगाया था पटाखों पर प्रतिबंध

कांग्रेसी और कम्युनिस्ट इतिहासकारों की नजरों में औरंगजेब एक बहुत ही उदार शासक था। उसकी मानवतावादी सोच और उदारवादी दृष्टिकोण के कसीदे काटते हुए यह भारत विरोधी इतिहासकार यह भूल जाते हैं कि उसके समय में हिंदुओं पर कितने भारी अत्याचार किए गए थे ? ऐसे अनेकों सही हो पूना में अर्थात शासनादेश उपलब्ध हैं […]

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इतिहास के पन्नों से स्वर्णिम इतिहास हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

भारत का वास्तविक राष्ट्रपिता कौन ? श्रीराम या ……. जीवन शक्ति का करो सदुपयोग

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा भगवान श्रीराम, अध्याय – 5 अब रामचंद्र जी पंचवटी की ओर चल पड़ते हैं, जहां जटायु से उनकी मुलाकात होती है। जटायु कोई पक्षी नहीं था, बल्कि यह एक मनुष्य था , जो कि राजा दशरथ का मित्र था। वह श्रीराम और लक्ष्मण जी और सीता जी से वैसा ही स्नेह […]

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