Categories
आओ कुछ जाने

स्वाधीन भारत और आजादी के मायने

डॉ. सत्यवान सौरभ

आज़ादी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सबक यह है कि भारत को विकसित बनाने के लिए हमें पांच प्रमुख क्षेत्रों में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करने की जरूरत है। इनमें कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा व स्वास्थ्य सुरक्षा, सूचना व संचार तकनीक, भरोसेमंद इलेक्ट्रॉनिक पॉवर, महत्वपूर्ण तकनीक में आत्मनिर्भरता। ये पांचों क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े तो हैं ही, एक-दूसरे पर प्रभाव भी डालते हैं। इसलिए इनमें बेहतर सामंजस्य होना चाहिए। यह देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही हममें यह सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए कि हम कुछ नया अविष्कार करके ही अपने देश में अच्छा बदलाव ला सकते हैं, क्योंकि विज्ञान और तकनीक से ही मानव कल्याण, शांति और खुशहाली आ सकती है।

– डॉo सत्यवान सौरभ

भारत ने वैश्विक पहचान हासिल करने के लिए ढेर सारी चुनौतियों को पार करते हुए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक बनने के लिए छोटे कदम उठाए। भारत ने आजादी के बाद से एक लंबा सफर तय किया है, कई सही और गलत फैसलों से परहेज किया है, जो कई ऐसे स्थलों को पीछे छोड़ता है जो विभाजन की पीड़ा से एक मजबूत, शक्तिशाली और विकासशील राष्ट्र की यात्रा को परिभाषित करते हैं। हाल ही के दशकों में भारत धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्थान पर ऊपर चढ़ता जा रहा है और इसके कारण विश्व की एक प्रमुख महाशक्ति के रूप में इसका वैश्विक प्रभाव भी नजर आने लगा है. पिछले चार दशकों में एक जबरदस्त ताकत के रूप में उभरकर सामने आया है और भारत ने भी काफ़ी ऊँचाइयाँ हासिल कर ली हैं. इसके कारण विश्व की आर्थिक शक्ति का केंद्र यूरोप और उत्तरी अमेरिका से हटकर एशिया की ओर स्थानांतरित होने लगा है.

उदीयमान प्रबल शक्ति के बावजूद भारत अक्सर वैचारिक ऊहापोह में घिरा रहता है. यही कारण है कि देश के उज्ज्वल भविष्य और वास्तविकता में अंतर दिखाई देता है. हालांकि भारत महाशक्ति बनने की प्रक्रिया में प्रमुख बिंदुओं पर खरा उतरता है, लेकिन व्यापक अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में घरेलू मुद्दों के कारण वह कमजोर पड़ जाता है. हालांकि भारत के कई नेता गति को आगे बढ़ाने और सामाजिक राजनीतिक संकट से बचने में विफल रहे, यह भी राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की कमी का मामला था। भारत में विविधता के कारण, कहीं न कहीं आना मुश्किल है। हालांकि, अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) यानी एक समान नागरिक संहिता लगने के प्रयासों को रूढ़िवादी वर्गों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने दावा किया कि इससे सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा होगा।

पानी की तरह किलोमीटर पर भारत में भाषा बदल जाती है। इसलिए,हिंदी केवल आधिकारिक भाषा के रूप में लाना मुश्किल था और 1965 में तमिलनाडु के हिंदी-विरोधी आंदोलन जैसे हिंसा और गरमागरम बहस देखी गई। जनसंख्या नियंत्रण कानून 2019 का जनसंख्या नियंत्रण विधेयक, जिसे 2022 में वापस ले लिया गया था। दो संतान नीति को आजादी के बाद से 35 बार संसद में पेश किया गया है। इन मसौदे की आम जनता द्वारा भारी आलोचना की गई थी। कृषि अर्थशास्त्री और अन्य हितधारक दशकों से कृषि बाजार में सुधार की वकालत कर रहे हैं। इसने संकट से बचने के लिए तीन प्रमुख कृषि सुधार कानून जिन्हें निरस्त कर दिया गया को फिर से चुपके मोड में आगे बढ़ाने के बारे में सरकार को झिझक दिया। लेबर कोड पर नियम आज तक टाले गए। कोड के परिणामस्वरूप कम टेक-होम पे और आसान छंटनी होगी। निःसंदेह सरकार को सुधार के मार्ग पर बहुत सावधानी से चलना होगा।

लोकतंत्र की सफलता में पहला है मतदान को अनिवार्य बनाना, जैसा कि कम से कम 30 लोकतंत्रों में किया गया है, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वर्तमान में, भारत में मतदान प्रतिशत कम है। आईपीसी की धारा 124ए का घोर दुरुपयोग एक उपहास है लेकिन अधिकांश राजनीतिक दल नहीं चाहते कि कानून के इस प्रावधान को हटाया जाए। सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम के लिए राज्य सशस्त्र पुलिस और केंद्रीय अर्ध-सैन्य पुलिस का उपयोग करना चाहिए। घुसपैठ, भाड़े के सैनिकों, आतंकवादियों और आतंकवादियों से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के नागरिक क्षेत्रों से सशस्त्र बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास ले जाने के लिए अधिनियम को हटाना एक मजबूत मामला है।

राजनीतिक हस्तक्षेप और पुलिस जांच में अपर्याप्तता को देखते हुए, भारत ने औपनिवेशिक काल से यूरोप में प्रचलित जिज्ञासु प्रणाली में आरोप लगाने वाली प्रणाली से एक संरचनात्मक परिवर्तन करने का समय आ गया है। जस्टिस वी.एस. मलीमथ ने रिफॉर्म ऑफ क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम पर अपनी रिपोर्ट में भी इसका सुझाव दिया है। जीएम खाद्य फसलों के लिए भारत अभी भी आनुवंशिक रूप से इंजीनियर या आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (जीएम) फसलों पर अनिर्णीत है। राजनीतिक इच्छा देश की खाद्य सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी सहित एक आधुनिक कृषि नीति ढांचे को अपनाने और लागू करने की कमी है। राजनीतिक प्रतिष्ठान ने राजनीतिक कार्यकर्ता आंदोलन से खुद को बचा लिया है। भारत में सामाजिक राजनीतिक अशांति के बावजूद नेताओं द्वारा कई कठोर निर्णय सुधार किए गए जैसे 1991 के सुधारों के दौरान नेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति को याद रखना चाहिए। हम उस नेतृत्व की सराहना करते हैं जिसने भारत को “चट्टान से गिरने” से बचाया और भुगतान संकट के आसन्न संकट के साथ फंड और बैंक की मजबूरी के तहत सुधारों का प्रबंधन किया।

1960 में भारत में हरित क्रांति ने गेहूं और दालों की अधिक उपज देने वाली किस्मों के विकास के साथ खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि देखी। 1976 सामूहिक नसबंदी अभियान संजय गांधी द्वारा शुरू किया गया था और एक वर्ष में लगभग 6.2 मिलियन पुरुषों की नसबंदी की गई थी, जिसमें लगभग 2000 लोग सर्जरी के कारण मारे गए थे। 1990 वीपी सिंह सरकार द्वारा कुछ जातियों को जन्म के आधार आरक्षण पर सरकारी नौकरी देने के विरोध में पूरा देश विरोध की चपेट में था, बावजूद इसके निर्णय जारी रहा। भारत ने 1998 में पोखरण में परमाणु बम परीक्षण किए, “ऑपरेशन शक्ति” कोडनेम के साथ निरस्त्रीकरण के वैश्विक दबाव में कठोर निर्णय लिया। इसने भारत को एक पूर्ण परमाणु राष्ट्र बना दिया। 2016 में, सरकार ने 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण की घोषणा की। कई किसान, व्यापारी और युवा वर्ग सभी आंदोलन कर रहे थे लेकिन काले धन के खिलाफ एक कदम के रूप में इसे आगे बढ़ाया गया माल और सेवा कर: यह प्रमुख केंद्रीय और राज्य करों को शामिल करने के बाद परिणामी कर था। कश्मीर की पहेली सुलझाना राज्य के पूर्ण एकीकरण के लिए अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण लंबे समय से लंबित था और इसे जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर सीधे रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए सालों पहले किया जाना चाहिए था।

आज़ादी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सबक यह है कि सुधारों की प्रक्रिया को अधिक परामर्शी, अधिक पारदर्शी और संभावित लाभार्थियों को बेहतर ढंग से संप्रेषित किया जाना है। यह समावेशिता ही है जो भारत के लोकतांत्रिक कामकाज के केंद्र में है। हमारे समाज की तर्कशील प्रकृति को देखते हुए, सुधारों को लागू करने में समय और विनम्रता लगती है। लेकिन ऐसा करना सुनिश्चित करता है कि हर कोई जीत जाए। भारत को विकसित बनाने के लिए हमें पांच प्रमुख क्षेत्रों में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करने की जरूरत है। इनमें कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा व स्वास्थ्य सुरक्षा, सूचना व संचार तकनीक, भरोसेमंद इलेक्ट्रॉनिक पॉवर, महत्वपूर्ण तकनीक में आत्मनिर्भरता। ये पांचों क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े तो हैं ही, एक-दूसरे पर प्रभाव भी डालते हैं। इसलिए इनमें बेहतर सामंजस्य होना चाहिए। यह देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही हममें यह सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए कि हम कुछ नया अविष्कार करके ही अपने देश में अच्छा बदलाव ला सकते हैं, क्योंकि विज्ञान और तकनीक से ही मानव कल्याण, शांति और खुशहाली आ सकती है।

छोटे से छोटे भ्रष्टाचार का सीधा प्रभाव जनता पर पड़ता है। करप्शन फ्री इंडिया के सपने को साकार करने के लिए इंडिया बात करने लगा है। कभी फिल्म और स्पोर्ट्स में दिलचस्पी रखने वाला भारत अब भ्रष्टाचार मुक्त देश बनना चाहता है। आज भी भारत में बहुत से स्थान ऐसे हैं जहां लड़कियों को सिर्फ इस लिए नहीं पढ़ने दिया जाता क्यों कि वो लड़की हैं। ऐसे भी ये कहना गलत नहीं होगा कि इस देश का हर नागरिक स्वतंत्र नहीं है। यदि वास्तव में देश को आगे बढ़ाना है तो लिंग भेद को समाप्त करना होगा। आज का भारत मर्डर, रेप जैसे बड़े क्राइम्स के साथ साथ बहुत से छोटे क्राइम्स से भी परेशान है। कहीं न कहीं इन क्राइम्स के पीछे एक बड़ा कारण बेरोजगारी भी है लेकिन सोच बदलकर कर रोजगार मुहैया करवाकर क्राइम पर कंट्रोल किया जा सकता है।

देश जितना हिन्दू- मुसलमान सोशल मीडिया पर दिखाई देता है उतना है नहीं। आज का भारत किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है। बदलते भारत के लोगों में अपने विवेक के आधार पर निर्णय करके देश को प्राथमिकता देने जैसी बातें प्रमुखता से सामने आईं। बिना साक्षरता के कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता। ऐसे में सभी शिक्षित हों तभी सारी समस्याओं से आजादी पाई जा सकती है।। साक्षरता के साथ-साथ देश भर में बढ़ती बेरोजगारी युवाओं को गुलामी का अहसास देती है, आखिर वो कब इस से आजाद होगा। सोचना होगा।

– डॉo सत्यवान सौरभ

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino
vdcasino
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş