अमर शहीद हेमू कालाणी सिंध प्रांत के युवाओं में देशप्रेम का भाव जगाते रहे

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अखंड भारत का सिंध प्रांत वैसे तो सूफियाना अंदाज एवं आध्यात्म के लिए जाना जाता है, परंतु, सिंध प्रांत में व्यापार भी बहुत उन्नत स्तर पर होता रहा है एवं प्राचीन भारत में सिंध प्रांत के निवासी सामान्यतः सुखी, समृद्ध एवं सम्पन्न रहे हैं। साथ ही, भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में सिंधवासियों का भरपूर योगदान भी रहा है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले सैकड़ों सिंधवासियों के नाम बहुत आदर के साथ लिए जाते हैं परंतु मुख्यतः इस सूची में शामिल नाम हैं – शहीद हरकृष्ण, शहीद संत कंवरराम, वीर हासाराम पमनानी, श्रीकिशन माटा, नेभनदास फतनानी, तेजूमल बालानी, सच्चा नन्द फेरुमल थावानी, आदि। सिंध के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने तो इस पावन यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति भी दे दी थी। भारत के इन्हीं वीर सपूतों में अमर शहीद हेमू कालाणी का नाम भी बड़े आदर के साथ लिया जाता है क्योंकि उन्हें बहुत ही कम उम्र, मात्र 19 वर्ष की आयु में दिनांक 21 जनवरी 1943 को क्रूर अंग्रेजी शासन द्वारा फांसी दे दी गई थी।

अमर शहीद हेमू कालाणी का जन्म अविभाजित भारत के सक्खर, सिंध प्रांत में 23 मार्च 1923 को हुआ था। आपके पिताश्री का नाम श्री पेसूमल जी कालाणी एवं माताश्री का नाम श्रीमती जेठीबाई कालाणी था। जब हेमू कालाणी की आयु मात्र सात वर्ष की थी, तब इस अल्पआयु में भारतमाता का तिरंगा लेकर अपने मित्रों के साथ अंग्रेजों की बस्ती में जाकर निर्भीक होकर भारत माता को परतंत्रा की बेड़ियों से मुक्त कराने की दृष्टि से की जा रही सभाओं की व्यवस्थाओं में उत्साहपूर्व भाग लेते थे। हेमू कालाणी अपनी पढ़ाई-लिखाई पर भी पूरा ध्यान देते हुए एक अच्छा तैराक तथा धावक बनने का प्रयास कर रहे थे। तैराकी की कई प्रतियोगिताओं में तो वे कई बार पुरस्कृत भी हुए थे। बचपन से ही हेमू कालाणी एक कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। हेमू कालाणी अपने बचपन काल से ही राष्ट्रवाद की भावना से भी ओतप्रोत थे एवं अपनी किशोरावस्था में ही विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आग्रह विभिन्न ग्रामों में निवास कर रहे नागरिकों से करते थे एवं उस समय पर भी सिंध प्रांत के नागरिकों में स्वावलम्बन का भाव जगाने का प्रयास आपके द्वारा किया जा रहा था। कुछ समय बाद तो हेमू कालाणी ने अंग्रेजों की क्रूर हुकूमत को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प ही ले लिया था और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रियाकलापों में भी भाग लेना शूरू कर दिया था। अत्याचारी अंग्रेजों द्वारा संचालित सरकार के विरुद्ध छापामार गतिविधियों में भाग लेकर उनके वाहनों को जलाने में हेमू कालाणी अपने साथियों का नेतृत्व भी करने लगे थे। यह भी एक अजीब संयोग ही कहा जाएगा कि हेमू कालानी की जन्मतिथी एवं अमर शहीद भगतसिंह जी की पुण्यतिथी एक ही है, अर्थात 23 मार्च।

वर्ष 1942 में, पूरे भारत वर्ष के साथ ही, सिंध प्रांत की जनता ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध उग्र आंदोलन की शुरुआत की थी जिससे क्रांतिकारी गतिविधियों में बहुत तेजी आई। हेमू कालाणी भी अन्य कई नवयुवकों के साथ इस आंदोलन से जुड़ गए थे और उन्होंने इस दौर में सिंधवासियों में जोश और स्वाभिमान का संचार कर दिया था। चूंकि हेमू कालाणी अपने बचपन काल से ही सिंध प्रांत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्पर्क में रहे थे अतः एक बार वर्ष 1942 में उन्हें अपने साथियों के माध्यम से यह गुप्त जानकारी मिली कि बलूचिस्तान में चल रहे उग्र आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से 23 अक्टोबर 1942 की रात्रि में अंग्रेजी सेना, हथियारों एवं बारूद से भरी, रेलगाड़ी में सिंध प्रांत के रोहड़ी शहर से होकर सक्खर शहर से गुजरती हुई बलूचिस्तान के क्वेटा शहर की ओर जाने वाली है। प्राप्त हुई इस गुप्त सूचना के आधार पर हेमू कालाणी ने अपने कुछ साथियों को इकट्ठा कर आनन फानन में एक योजना बनाई कि किस प्रकार रेल की पटरियां उखाड़कर इस रेलगाड़ी को गिराया जाए ताकि अंग्रेजी सेना का भारी नुकसान हो सके। बस फिर क्या था, रात्रि काल में अत्यंत गुपचुप तरीके से कुछ साथी मिलकर उस स्थान पर पहुंच गए जहां रेल की पटरियों को नुकसान पहुंचाने का निर्णय लिया गया था। वहां पहुंचकर उन्होंने रिंच और हथौड़े की सहायता से रेल की पटरियों की फिशप्लेटों को उखाड़ने का कार्य प्रारम्भ कर दिया। परंतु पास ही में पुलिस की एक टुकड़ी पहरा दे रही थी। उन्होंने रेल की पटरियों पर किए जा रहे प्रहार की आवाजें सुन लीं और वे तुरंत वहां पहुंच गए जिस स्थान पर हेमू कालाणी अपने साथियों के साथ रेल के पटरियों को नुकसान पहुंचाने का कार्य कर रहे थे। पुलिस को आते देख हेमू कालाणी के दो साथी तो भाग खड़े हुए परंतु हेमू कालाणी पुलिस द्वारा पकड़ लिए गए।

हेमू कालाणी पर कोर्ट में केस चलाया गया और इस कोर्ट में जब जब भी उनसे पूछा गया कि आपके साथ और कौन से साथी थे तो उन्होंने कोर्ट में जवाब दिया कि मेरे साथी तो केवल रिंच और हथौड़ा ही थे। सक्खर की कोर्ट ने हेमू कालाणी को, उनकी मात्र 19 वर्ष की अल्पायु होने के कारण, देशद्रोह के अपराध में आजीवन कारावास की सजा प्रदान की। जब उक्त निर्णय को अनुमोदन के लिए हैदराबाद (सिंध) स्थित सेना मुख्यालय में भेजा गया तो सेना मुख्यालय के प्रमुख अधिकारी कर्नल रिचर्डसन ने हेमू कालाणी को ब्रिटिश राज का खतरनाक शत्रु मानते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को फांसी की सजा में परिवर्तित कर दिया। हेमू कालाणी की अल्पायु को देखते हुए सिंध के गणमान्य नागरिकों ने कोर्ट में एक पिटीशन फाइल की एवं अंग्रेज वायसराय से आग्रह किया कि हेमू कालाणी को दी गई फांसी की सजा को निरस्त किया जाय। अंग्रेज वायसराय ने इस आग्रह को एक शर्त के साथ स्वीकार किया कि हेमू कालाणी रेल के पटरियों को नुकसान पहुंचाने वाले अपने अन्य साथियों के नाम अंग्रेज प्रशासन को बताएं। परंतु, हेमू कालाणी ने वायसराय की इस शर्त को नकारते हुए खुशी खुशी फांसी पर चढ़ जाना बेहतर समझा और इस प्रकार 21 जनवरी 1943 को प्रातः सात बजकर 55 मिनट पर अंग्रेजों द्वारा श्री हेमू कालाणी को फांसी दे दी गई। हेमू कालाणी ने ‘इंकलाब-जिंदाबाद’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए खुद अपने हाथों से फांसी का फंदा अपने गले में डाला, मानो वे फूलों की माला पहन रहे हों। जब फांसी दिए जाने के पूर्व हेमू कालाणी से उनकी अंतिम इच्छा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मां भारती की गोद में पुनः जन्म लेने की इच्छा प्रकट की। मात्र 19 वर्ष की आयु में अमर शहीद हेमू कालाणी का प्राणोत्सर्ग सदैव याद रखा जाएगा एवं अंग्रेजो को भारत से भगाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिन हजारों वन्दनीय वीरों को जब जब याद किया जाएगा तब तब उनमें सबसे कम उम्र के बालक क्रांतिकारी अमर शहीद श्री हेमू कालाणी को भी सदैव याद किया जाएगा।

अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के वीर योद्धा अमर शहीद श्री हेमू कालाणी की अक्षुण याद बनाए रखने के उद्देश्य से एवं उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनकी एक आदमकद प्रतिमा स्वतंत्र भारत की संसद में स्थापित की गई है एवं भारत सरकार द्वारा उनकी स्मृति में एक डाक टिकट भी जारी किया गया है।

अमर शहीद हेमू कालाणी द्वारा मां भारती के श्रीचरणों में अर्पित किए गए अपने प्राणों के बलिदान को 21 जनवरी 2023 को 80 वर्ष पूर्ण हो गए हैं एवं 23 मार्च 2023 को आपका 100वां जन्म दिवस होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से अखिल भारतीय स्तर पर सेवा कार्य कर रही संस्था ‘भारतीय सिंधु सभा’ द्वारा दिनांक 31 मार्च 2023 को भोपाल नगर में अमर शहीद हेमू कालाणी को श्रद्धांजली अर्पित करने के उद्देश्य से बहुत बड़े स्तर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्य सरसंघचालक माननीय श्री मोहन भागवत जी भी भाग लेंगे। इस आयोजन में पूरे देश से सिंधी समाज के 125,000 से अधिक नागरिक भाग लेकर अमर शहीद हेमू कालाणी को अपनी श्रद्धांजली अर्पित करेंगे।

प्रहलाद सबनानी
सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक

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