प्राकृतिक विभाजन

भारत को प्राकृतिक रचना के आधार पर चार भागों में बांटा जाता है जो इस प्रकार है-

1. उत्तर का पर्वतीय प्रदेश-इस प्रदेश में हिमालय पर्वत की श्रेणियां स्थित हैं। ये 2599 किमी लंबी हैं और असम से कश्मीर तक फेेली हुई हैं। इनकी चौड़ाई 150 से 400 किमी तक है। इनके कारण भारत में विदेशी आक्रमणकारी लोग नही आ सकते हैं। ये मानसून को रोककर भारत में वर्षा कराते हैं तथा मध्य एशिया से आने वाली ठंडी हवाओं को भारत में आने से रोकते हैं। इन से ही गंगा, सिंधु तथा ब्रह्मपुत्र नदियां निकलती हैं। ये प्रदेश जंगलों तथा पशुधन की दृष्टि से बहुत संपन्न हैं। इनकी प्राकृतिक शोभा पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

2. गंगा तथा ब्रह्मपुत्र का मैदान-2400 किमी  लंबा तथा 320 किमी चौड़ा यह मैदान भारत के मध्य में है जो गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों ने निर्मित किया है। यहां अधिक वर्षा होती है जिससे कृषि यहां का मुख्य व्यवसाय है। यहां का मैदान खनिज की दृष्टि से भी संपन्न है। इसी भाग में कुछ उद्योग तथा बड़े बड़े नगर भी पाए जाते हैं।

3. दक्षिण का पठार-विंध्याचल पर्वत से कन्याकुमारी तक यह पठार फेेला हुआ है। दक्षिणी प्रायद्वीप का पठार 460 मीटर ऊंचाई के पर्वतीय खण्ड और पहाडिय़ों की श्रंखलाओं के कारण सिंध और गंगा के मैदानों से पृथक हो जाता है। इनमें प्रमुख हैं अरावली, विन्घ्य, सतपुड़ा, मैकाल और अजंता, प्रायद्वीप के एक तरफ पूर्वी घाट है जहां औसत ऊंचाई 610 मीटर और दूसरी ओर पश्चिमी घाट है जहां यह ऊंचाई साधारणत: 915 से 1220 मीटर तक है जो कहीं कहीं 2440 मीटर से अधिक है।

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