स्वामी भीष्म जी महाराज की घर वापसी आंदोलन में भूमिका

swami-bheesham-ji

43वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि

(आर्यसमाज के शुद्धि आंदोलन के इतिहास को जानने के लिए #डॉ_विवेक_आर्य कृत आर्यसमाज और शुद्धि आंदोलन पुस्तक पढ़े। मुख्य 550 रुपए। डाक खर्च सहित। मंगवाने के लिए whatsapp से 094855 99275 पर संपर्क करें)

स्वामी भीष्म जी महाराज ने सत्यार्थप्रकाश को पढ़कर आर्य धर्म प्रचार करने की ठान ली और यमुना के किनारे-किनारे देशाटन के लिए निकल पड़े एक स्थान पर उन्हें एक उदासीन पंजाबी साधु मिला। कुछ साल तक वे इसी साधु की कुटिया में रहे । यदा-कदा के भ्रमण के लिए इधर-उधर जाते थे। एक बार रोहतक जिले के एक ग्राम में उनकी भेंट हरद्वारी लाल मिस्त्री से हुई जो हारमोनियम बजाने में निपुण था स्वामी जी ने इस व्यक्ति से 22 रु० में हारमोनियम क्रय कर लिया तथा वाद्ययंत्र सिखने का प्रयत्न किया। उन्होंने स्वयं ही धीरे-धीरे हारमोनियम पर गाने का अभ्यास किया। एक दिन जब वे हारमोनियम पर अंगुलियां फिराते हुए गायन का अभ्यास कर ही रहे थे कि उनके मुख से निम्न पंक्ति निकल पड़ी।

“मूर्खता की चाल को दिल देख-देख डरता है”

जिस प्रकार महाकवि वाल्मीकि ने व्याध के द्वारा आहत किये गये कौंचमिथुन में से एक को देख कर करुणा विगलित हृदय से श्लोक रचना को प्रेरणा प्राप्त की थी उसी प्रकार भीष्म जी को भी काव्य रचना की प्रेरणा अनायास ही प्राप्त हुई। उन्होंने ईश्वर भक्ति में निम्न गीत लिखा “अजी कोई गाये तो कैसे गाये तेरी महिमा अपरम्पार” फिर तो एक के बाद निर्झर की भांति गीतों का प्रभाव फूट पड़ा। अब स्वामी जी भजनों के माध्यम से उपदेश देने लगे ।

दिल्ली रहते समय ‘स्वामी श्रद्धानन्द जो से आपकी भेंट हुई । कुछ समय पश्चात् भीष्म जी करेड़ा (उत्तर प्रदेश – हिन्डन नदी ) नामक ग्राम में आये तथा यहाँ धर्म प्रचार किया। स्वामी जी के प्रचार से प्रभावित हो कर ग्राम के एक धनी व्यक्ति ने पाठशाला स्थापित करने हेतु उन्हें एक मकान दान में दे दिया। भीष्म जी ने एक पण्डित की सहायता से पाठशाला आरम्भ करदी तथा वे छात्रों को सन्ध्या यज्ञ के साथ- साथ संस्कृत तथा हिन्दी का अभ्यास कराने लगे । यदा-कदा वे ग्रामों में प्रचार हेतु भी जाने में इस समय उन्होंने अपनी प्रथम भजन मण्डली का गठन किया, जिसमें ज्ञानेन्द्र झण्डु, तथा मजीद नामक तीन युवक । ज्ञानेन्द्र स्वामी जी के साथ गायन करता जबकि अन्य दो युवक क्रम: इनक तथा खड़ताल बजाते थे। यह घटना 1907 की है। उस युग में इस प्रकार के वाद्ययन्त्र भजन मण्डनियों द्वारा प्रयुक्त होते थे। आज की भांति तबले, चिमटे आदि का प्रयोग नहीं होता था। स्वामी भीष्म के भजनों में पाखंडो का खण्डन रहता था वे अपने भजनों में पौराणिकता इस्लाम को पाखण्ड पूर्ण प्रवृत्तियों का समान रूप से खण्डन करते थे । यत्र-तत्र सनातन धर्मो उपदेशक जब आर्य समाज का विरोध करने आते तो भीष्म जी उन्हें मुंह तोड़ उत्तर देते “अजी पुराणे-कुराणे तो भाई-भाई से”

स्वामी भीष्म जी ने अपने सुदीर्घ कार्य काल में समाजसेवा के विभिन्न कार्य किये, विशेषरूप से अबला उद्धारका कार्य आपने बड़े मनोयोग पूर्वक किया। हिन्दु जाति अपनी सामाजिक स्थिति के कारण नारी रक्षण में सदा असमर्थ सिद्ध हुई है। यह एक सर्व स्वीकृत तथ्य है कि आर्य समाज ने विद्यमियों के द्वारा बलात गृहीत नारियों का उद्धार कर उन्हें पुनः हिन्दू समाज में प्रवेश दिलाया। नारी उद्धार के ऐसे सैकड़ों उदाहरण भीष्म जी के जीवन में उपलब्ध होते हैं। इस सम्बन्ध के कुछ रोचक स्मरण यहां प्रस्तुत किये जा रहे हैं। –

1909 के, वर्ष की घटना है, जो स्वामी जी को सूचना मिली कि फजलदीन नामक मुसलमान के घर कुछ हिन्दू स्त्रियांजबरदस्ती रोका हुई है जब स्वामी जी को यह जानकरी मिली तो उन्होंने अपने कुछ साथियो के सहयोग से इन स्त्रियों का उद्धा किया तथा गाजियाबाद लेकर आर्य समाज के प्रधान श्री हरशरणदास जी के सहयोग से उनका विवाह हिन्दूओं से कर दिया जब 8

विवाह संस्कार सम्पन्न हो रहा था तब दस पन्द्रह मुसलमानों ने एक हो कर संस्कार कार्य में बाधक बनने की चेष्टा की परन्तु स्वामी जी के रूप को देखकर वे कुछ नहीं कर सके।

एक अन्य घटना तब की है जय स्वामी जी गाजियाबाद से रात्रि के समय पैदल लोट रहे थे उन्होंने देखा कि मार्ग में पांच विद्यम उनका रास्ता रोक कर खड़े है अकेले होने पर भी स्वामी जी घबराये नहीं और उन्होंने ललकार कर कहा तुम तो पांच ही हो में पांच सौ के लिए काफी हूँ।

स्वामी भीष्म यदा कदा दिल्ली आकर स्वामी श्रद्धानन्द जी से भेंट करते थे। स्वामी श्रद्धानन्द जी को भी अपनी शुद्धि और संगठन के कार्य के लिए भीष्म जी जैसे बलिष्ठ, निर्भीक तथा कर्त्तव्य परायण सहायक की आवश्यकता रहती थी। शुद्धि आन्दोलन के दौरान घटी एक अन्य घटना यह है कि स्वामी भीष्म ने रोहतक के समीपवर्ती ग्राम की वृद्धा को उसकी नव- युवति विधवा पोत्री के साथ देखा। ब्राह्मण वर्ण में विधवा विवाह को वर्जित माना गया है यही कारण है कि प्रायः युवति विधवा स्त्रियां विद्यर्मियों के हाथ लगती हैं” इस विधवा ब्राह्मण लड़की को भी ऐसी ही दुर्गति झेलनी पड़ी जबकि वह गुण्डों के कुचक्रों में पड़कर दिल्ली में वेश्या वृद्धि करने के लिए विवश करदी गयी अचानक भीष्म जी ने एक दिन चावड़ी बाजार में जबकि वे स्वयं “ट्राम” की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी ब्राह्मण लड़की को वेश्या के कोठे पर देखा, देखते ही वे तुरन्त यह जान गए कि यह वही ब्राह्मण लड़की है जिसे उन्होंने रोहतक के समीपवर्ती गांव में देखा था। स्वामी जी तुरन्त सीढियों पर चढ़ गये उन्हें इस बात को किंचित मात्र की परवाह नहीं थी कि काषाय- वस्त्र धारी संयासी को वेश्या की अट्टालिका पर चढ़ते देखकर लोग क्या कहेंगें यद्दपि वह लड़की अन्य वेश्याओं तथा मुसलमान से घिरी बैंठी थी परन्तु स्वामी जी उस हिन्दू लड़की को उठाकर ले आये। वे अकेले ही थे इस कारण उन्हें अनेक प्रकार के कष्ट भी उठाने पड़े परन्तु इस बात की चिंता किए बिना वे उस लड़की को लेकर स्वामी श्रद्धानन्द जी के निकट आ गये, स्वामी जी ने भीष्म जी की पीठ ठोकी और साधुवाद देते हुए कहा कि जो काम पचास आदमी भी नहीं कर सके उसे भीष्म ने अकेले कर दिखाया है। स्वामी जी ने भीष्म की इस वीरता पूर्ण कृत्य को देखकर उन्हें पुरस्कृत करना चाहा परन्तु भीष्म के लिए तो स्वकर्तव्य पालन ही सबने बढ़ा पुरस्कार था ।

उन्नीस सौ सोलह की घटना है-

स्वामी भीष्म मुजफ्फरनगर जिले के “छरौली ग्राम में प्रचारार्थ गये उनके प्रचार से प्रभावित होकर मजीद नामका एक मुसलमान तेली उनके निकट आया तथा पूछने लगा कि क्या मुसलमान भी हिन्दु बन सकता है ? इस पर स्वामी जी ने कहा कि हिन्दु मुसलमान के भेद कृत्रिम तथा मनुष्य निर्मित है। परमात्मा किसी को दाढ़ी-चोटी के साथ धरती पर नहीं भेजता, स्वामी जी की बातों से प्रभावित होकर “मजीद” शुद्ध होने के लिए तैयार हो गया, स्वामी जी उसे दिल्ली ले आए तथा उसका नाम बदलकर पं० रामदत्त भारद्वाज कर दिया अब यह व्यक्ति चांदनी चोंक में “दरीबे” के निकट खोंमचा लगाने लगा । कालान्तर में अनाथालय की एक लड़की के साथ उसका विवाह भी कर दिया गया।

स्वामी जी का सम्पूर्ण जीवन इस प्रकार की अनेक घटनाओं से भरा पड़ा है। एक अन्य घटना उल्लेखनीय है-स्वामी श्रद्धानन्द के निकट एक ब्राह्मण स्त्री यह फरयाद लेकर आई कि उसके लड़के को मुसलमान जोर जबरदस्ती से ले गये हैं। स्वामी जी चाहें तो वे लड़के को मुक्त करा सकते हैं। स्वामी श्रद्धानन्द जी ने भीष्म जी को बुलाया और सारी स्थिति बताई, स्वामी के पास जमसुद्दीन नामक एक मुसलमान रहना था जो स्वयं स्वामी जी के लिए ही जासूसी करता था इसी के माध्यम से स्वामी जी ने यह पता कर दिया कि रात्रि के समय अपने मुसलमान साथियों के साथ यह हिन्दू लड़का मटियामहल थियेटर में नाटक देखने जायेगा तुरन्त लड़के को मुसलमानों के चंगुल से मुक्त करने का कार्यक्रम बनाया गया। रात्रि के लगभग ग्यारह बजे अपने मुसलमान साथियों के साथ जब वह हिन्दु लड़का नाट्यगृह के निकट पहुंचा तो स्वामी भीष्म भी अपने दो साथी बलजीत तथा “”राजाराम” नामक पहलवान के साथ मुसलमानी वेष धारण करनाटक स्थल पर पहुंच गये। भीष्म जी ने अपना नाम मुजफ्फरखा रख लिया ज्योहि बहके के मुसलमान साथी पान खाने के लिए इधर उधर हुए स्वामी जी तथा उनके पहलवान साथियों ने लड़के को उठा लिया और चलते बने। खारी बावली की और जब ये से ये लोग जब जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें पुलिस के दो सिपाही मिले परन्तु यह लोग भी स्वामी जी से भी परिचित थे उन्होंने यही समझा कि स्वामी जी का हो कोई शिष्य पाठशाला से भागा होगा जिसे वह ले जा रहे है। इस प्रकार दुष्टों के चंगुल से मुक्त कर उसकी माता को सोंप दिया।

एक अन्य घटना का उल्लेख अप्रासंगिक न होगा। स्वामी श्रद्धानन्द जी ने भीष्म जी को एक प्रातः काल बुलाकर कहा कि सहारन पुर निवासी लाला विश्वेश्वर नाथ के माली की लड़की एक मुसलमान जकूर के साथ भागने की योजना बना रही है, उसे इस चंगुल से मुक्त करना है। स्वामी भीष्म तुरंत मुसलमानी वेष धारण कर सहारनपुर पहुंचे तथा लाला विश्वेश्वरनाथ से मिले। पता चला कि पूर्व योजना अनुसार मुसलमान प्रेमी के साथ भाग निकली है।भीष्म जी अब सहारनपुर स्टेशन पर आग गये रात्री हो चुकी थी। स्वामी जी मुसलमानी वेष में वे और किसी ऐसी मस्जिद की तलाश में थे, जहाँ रात्रि को विश्राम कर सके। शहादरा तथा सहारनपुर के बीच एक स्टेशन पर स्थित एक मस्जिद में चले गये जहाँ उन्होंने दो मुसलमान फकीरों को देखा, स्वामी भी अपना फटा कम्बल बिछाकर लेट गये इतने में एक व्यक्ति वहां पर आया जिसने उन फकीरों ने कहा कि वह एक हिन्दु लज़की को भगाकर लाया है तथा उसे अपने साले के घर पर छोड़ा है जो इस स्टेशन पर क्लर्क है तथा रेलवे के क्वार्टर न० 3 में रहता है।

आगन्तुक ने फकीरों ने यह भी कहा कि उसका यह साला बड़ा डरपोक है उसे भय है कि कहीं स्टेशन मास्टर को यह ज्ञान हो जाए कि उनके क्वार्टर में एक हिन्दू लड़की बलात् रोक गई है, आगन्तुक व्यक्ति ने फकीरो में यह भी कहा कि वे उसके साले को समझा दें। स्वामी जी वहीं सो रहे थे। वो सारी स्थिति को समझ गये। इसके पहले कि फकीर लोग इस निर्णय लेते मुसलमान वेशधारी भीष्म रेलवे क्वार्टर पर जा पहुंचे और शकुर के एक दोस्त के रूप में अपना परिचय दिया साथ यह भी कहा कि उस लड़को को उनके हवाले करदैे क्योकि पूर्व योजना अनुसार वे उसे शाहदरा से जायेंगे जहां शकुर उसकी प्रतीक्षा कर रहा होगा । शकूर के साले ने लड़की को स्वामी जी के हवाले कर दिया इस प्रकार इस लड़की को बचाकर स्वामी भीष्म स्वामी श्रद्धानन्द की सेवा में आ गये। कालान्तर में इस लड़की का विवाह स्वामी श्रद्धानन्द जी के द्वारा रेलवे के हिन्दु लड़के के साथ कर दिया गया ।

1946 की एक घटना है बलवन्त नामक एक ब्राह्मण के घर पर स्वामी जी भोजन करने गये वहां उन्हें एक मुसलमान लड़की दिखाई दी जिसके पिता की मृत्यु हो चुकी थी तथा जिसकी माता ने भी पुनः विवाह कर लिया था कुछ दुष्टों ने उस लड़की को बेचने का इरादा कर रखा था, स्वामी भीष्म जी ने इस अनाथ मुस्लिम कन्या का उद्धार करने का निश्चय किया, उन्होंने लड़की से नाम पूछा तो उसने अपना नाम “वीरो” बताया, परन्तु स्वामी जो कहने लगे तू तो मेरी खोई हुयी बचपन की प्रेमवती है, तू बड़े भाग्य से मुझे मिल गयी। लड़की ने कहा हो सकता है आपके कथन में सत्यता हो परन्तु अब तो मैं मुसलमान बन चुकी हूँ स्वामी जी बोले मुसलमान बनने से तू क्या मेरी बेटी नहीं रही ? हम तुझे पुनः शुद्ध करके हिन्दु बना लेंगे, लड़की ने कहा कि तब क्या आप मेरे हाथ का भोजन कर लेंगे ? स्वामी जी ने कहा इसमें मुझे क्या आपत्ति है। लड़की आश्चर्य चकित रह गयी इसे विश्वास हो गया कि हो न हो ये मेरे पिता ही है, स्वामी जी ने उसके हाथ से परोसी हुई रोटो खाई, तथा लड़की को अपने साथ ले आये तथा कालान्तर में उसका विवाह अपने प्रचार में ढोलक बजाने वाले नवयुवक रामचन्द्र से कर दिया। स्वामी भीष्म का हृदय दीन दुःखियों को देखकर करुणा विगलित हो जाता था।

स्त्रोत – स्वामी भीष्म अभिनन्दन ग्रंथ
सम्पादक – डॉ० भवानी लाल भारतीय,डॉ० वेदप्रकाश वेदालंकार, डॉ०रामप्रकाश,प्रो० ऋषिराम भारद्वाज,श्री नरेन्द्र जी
प्रस्तुतकर्ता – अमित सिवाहा

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
hititbet
sahabet
sahabet
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
casibom giriş
betgaranti giriş
jojobet giriş
holiganbet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
holiganbet
onwin
onwin
onwin