सुधीर मिश्र तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है- जनि कल्पना करि सुजसु नासहि नीति सुनहि करहि छमा । संसार महँ पुरुष त्रिबिध पाटल, रसाल पनस समा ।। एक सुमनप्रद एक सुमन फल एक फलइ केवल लागहिं। एक कहहिं कहहिं करहिं अपर एक करहिं कहन न बागहीं।। इन पंक्तियों में रामचन्द्र जी रावण से […]
तुलसी की रामचरितमानस में कटहल की महिमा