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धन वही नहीं जो तिजोरियाँ भरता है

धन के बारे में आम तौर पर यही माना जाता है कि रुपए-पैसे और सोना-चाँदी ही धन है जिन्हें बैंक या घरों के भण्डार में सायास सहेजकर सुरक्षित रखा जाता है अथवा विनिमय में प्रयुक्त होता है। और माना जाता है कि चोर-डकैतों की निगाह इसी धन पर होती है। धन अपने आपमें दुनियावी आकर्षण […]

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आरंभ हुआ व्यवस्था परिवर्तन का दौर

डॉ0 वेद प्रताप वैदिक की कलम  से प्रांतीय चुनावों से मुक्त होते ही सरकार ने तेजी से काम करना शुरु कर दिया है। इसके तीन स्पष्ट संकेत हमारे सामने हैं। पहला श्रम−सुधार की घोषणा, महत्वपूर्ण सचिवों की अदला−बदली और ‘मनरेगा’ का रुपांतरण! यदि इन तीनों परिवर्तनों को एक साथ रखकर देखें तो आशा बंधती है […]

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क्यों हर किसी को शह और मात देने की स्थिति में हैं मोदी ?

पुण्‍य प्रसून वाजपेयी नरेन्द्र मोदी जिस राजनीति के जरिये सत्ता साध रहे हैं, उसमें केन्द्र की राजनीति हो या क्षत्रपों का मिजाज । दोनों के सामने ही खतरे की घंटी बजने लगी है कि उन्हे या तो पारंपरिक राजनीति छोड़नी पडेगी या फिर मुद्दों को लेकर पारपरिक समझ बदलनी होगी । लेकिन मजेदार सच यह […]

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लक्ष्मी वहीं,  जहाँ उपभोक्ता खुश

दीपावली के माहौल में हर तरफ लक्ष्मीजी को खुश करने और रखने के लिए सभी प्रकार के जतन किए जा रहे हैं। लक्ष्मी को रिझाने के लिए झाड़ु बुहारी, साफ-सफाई,रंग-रोगन, लिपाई-पुतायी, पाठ-पूजा, अनुष्ठान, रंगीन रोशनी और सजावट से लेकर वह सब कुछ किया जा रहा है जो इंसान के बूते में है। गरीब से लेकर […]

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विशेषणों का मोह त्यागें

इंसान होना अपने आप में महान उपलब्धि  और ईश्वरीय वरदान है। जिस इंसान में इंसानियत आ गई वह मनुष्य होने का लक्ष्य भी हासिल कर लिया करता है और इंसानियत के जरिये अपने आपका ऎसा वजूद कायम कर लेता है कि उसके जाने के बाद भी अर्से तक उसे किसी न किसी रूप में याद […]

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राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती राजे बनीं सबसे लोकप्रिय महिला राजनेता

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2014। राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सोशल मीडिया में देश की सबसे लोकप्रिय महिला राजनेता बन गई हैं। सोशल नेटवकिर्ंग वेबसाइट फेसबुक पर उनके प्रशंसकों की संख्या बुधवार को 30 लाख को पार कर गई। फेसबुक फॉलोअर्स की संख्या के लिहाज से वे राजस्थान के नेताओं में सबसे आगे हैं। […]

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कुछ कहना चाहते हैं अपने लोग

आजकल अपने लोगों को अपनी बातें कहने के लिए अपने लोग नाकाफी या नाकाबिल दिखने लगे हैं। हम न अपने लोगों के पास रहना चाहते हैं, न अपने लोगों को सुनना चाहते हैं। जो अपने हैं उनके सुख-दुःखों में न हिस्सा बँटाना चाहते हैं, न किसी के काम ही आना चाहते हैं। हमें न अपने […]

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पशु बलि ,संस्कृति और न्यायालय

– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री            संस्कृति दरअसल मानव प्रगति की यात्रा का ही दूसरा नाम है । जीव जीव का भोजन है , यह आदिम प्रवृति की सब से बड़ी पहचान है । आदिम प्रवृत्तियों पर नियंत्रण ही सांस्कृतिक उत्थान की पहचान है । सभी जीवों में से मानव को ही सबसे ज़्यादा बुद्धिमान […]

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मंदिर को धुलाने का प्रसंग और अम्बेडकर की राह

– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री               नीतिश कुमार को हटा कर जीतन राम माँझी बिहार के मुख्यमंत्री बने थे । वैसे वे लम्बे अरसे से राजनीति में हैं और गाहे बगाहे मंत्री इत्यादि भी बनते रहते हैं , लेकिन नरेन्द्र मोदी की आँधी के आगे जब नीतिश कुमार के लिये मुख्यमंत्री रह पाना संभव नहीं […]

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वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा

अमर शहीद रामप्रसाद ‘बिस्मिल’   अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां होगा । रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियां होगा ।।   चखायेगे मजा बरबादिये गुलशन का गुलची को । बहार आयेगी उस दिन जब कि अपना बागवां होगा ।।   वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है । सुना है आज […]

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