हम अपने तीनों साधनों (मन, वाणी और शरीर) के माध्यम से ही कुछ क्रिया-व्यवहार करने में समर्थ हो पाते हैं। अर्थात् मानसिक, वाचनिक और शारीरिक रूप में हमारा व्यवहार का क्षेत्र पृथक-पृथक रहता है। हम अपने व्यवहार को पाँच भागों में बाँट सकते हैं जैसे कि व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, और वैश्विक। जो भी हमारे […]
हमारा व्यवहार कैसा हो ?