Categories
देश विदेश विविधा स्वास्थ्य

पड़ोसी देश चीन में एक बार फिर पैर पसारता कोरोना, भारत को भी संभलना होगा

-अशोक भाटिया

चीन में एक बार फिर से कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। हाल ही में चीन में कोविड मामलों की संख्या में रिकॉर्ड उछाल दर्ज किया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक बीते दिन चीन में 31656 नए कोरोना पॉजिटिव केस दर्ज किए गए। चीन में एक दिन में कोविड-19 के मामलों में आया ये सबसे बड़ा उछाल है। ये आंकड़े अप्रैल के मध्य में दर्ज किए गए 29,390 संक्रमणों से ज्यादा हैं। एक दिन पहले चीन में करोना के 28000 से ज्यादा नए केस दर्ज किए गए थे। चीन में कोरोना मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रविवार को छह महीने बाद कोरोना से एक बुजुर्ग की मौत हुई थी। कोरोना संक्रमितों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए चीनी सरकार ने कई शहरों में लॉकडाउन लगा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ज्यादा से ज्यादा कोरोना टेस्टिंग और क्वारंटीन पर जोर दे रही है। चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोविडि के सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। आज से राजधानी में सार्वजनिक स्थानों पर एंट्री के लिए 48 घंटे पहले की नेगेटिव पीसीआर कोविड टेस्ट रिपोर्ट दिखानी अनिवार्य कर दिया गया है यानी लोगों को अब शॉपिंग मॉल, होटल, सरकारी दफ्तर में जाने के लिए कोविड रिपोर्ट दिखानी होगी। साथ ही लोगों को जरूरी होने पर ही घर से निकलने की सलाह दी गई है। चीन में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए एहतियातन स्कूलों को बंद करा दिया गया है। बीजिंग में कोरोना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। कोविड-19 के खतरे को देखते हुए चीनी सरकार ने बीजिंग में कई जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया है। सरकार ने स्कूलों से ऑनलाइन पढ़ाई कराने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से बीजिंग में कोरोना मामलों में उछाल आया है।

चीन में कोरोना वायरस एक बार फिर से तेजी से पैर पसारते हुए देख कर चीनी सरकार ने कोरोना संक्रणम को फैलने से रोकने के लिए कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने बीजिंग समेत कई दूसरे इलाको में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए वहां शॉपिंग मॉल और रेस्टोरेंट को बंद करने का फैसला किया है। इसके अलावा कुछ पार्क और जिम को भी बंद करा दिया गया है। चीन के चाओयांग जिले के अधिकारियों ने वहां की कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की सुविधा करने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने लोगों से जरूरत नहीं होने पर घर में रहने और एक जिले से दूसरे जिले के बीच यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। इसके अलावा कई शहरों में एक बार फिर से कोरोना टेस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है।

वैसे भारत में कोरोना के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 24 घंटे में 408 नए केस आए हैं। पिछले कई दिनों से देश में कोविड के मामले सबसे निचले स्तर पर है।सभी राज्यों में कोरोना से हालात नियंत्रण में है। इस वायरस से न तो मौतें हो रही हैं और हॉस्पिटलाइजेशन भी ना के बराबर ही है। एक्टिव केस भी घटकर 6 हजार से कम रह गए हैं। पॉजिटिविटी रेट कम हो रहा है और रिकवरी दर भी बढ़ रही है।ओमिक्रॉन के कई नए वेरिएंट मौजूद रहने के बाद भी वायरस का असर नहीं दिख रहा है। किसी भी राज्य में ओमिक्रॉन के एक्स-बीबी या फिर bf।7 z वेरिएंट से केस नहीं बढ़े हैं और कोरोना के मरीजों में भी केवल फ्लू जैसे लक्षण ही मिल रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश में कोविड एंडेमिक फेज में है। अब यह भी जानना जरूरी है कि चीन में कोविड के बढ़ते मामलों का असर क्या भारत में भी जल्द ही देखने को मिलेगा? या देश में कोविड से स्थिति सामान्य ही रहेगी। इस मामले में भारतवर्ष के महामारी विशेषज्ञ बताते है कि चीन में कोविड के बढ़ते मामलों की वजह साफ नहीं है लेकिन अभी वहां कोई नया वेरिएंट रिपोर्ट नहीं हुआ है। ऐसे में वहां बढ़ते केस का असर भारत में नहीं होगा क्योंकि देश में फिलहाल ओमिक्रॉन के कई वेरिएंट मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद भी हालात सामान्य हैं। नए केस नहीं बढ़ रहे हैं और कोविड एक फ्लू की तरह ही है।उम्मीद है कि चीन के बढ़ते मामलों से भारत में कोविड के पैटर्न में कोई खास बदलाव नहीं होगा। अगर चीन में कोई नया वेरिएंट रिपोर्ट होता और उसकी वजह से केस बढ़ते तो अन्य देशों में भी खतरा हो सकता था लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं है। इसलिए चीन में बढ़ते मामलों से पैनिक नहीं होना है।लेकिन आने वाले कुछ दिनों में कोविड से बचाव के नियमों का पालन करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो थोड़े बहुत केस बढ़ सकते हैं हालांकि उम्मीद है कि मौतें या हॉस्पिटलाइजेशन नहीं बढ़ेगा। ऐसे में किसी नई लहर का खतरा नहीं है।गौरतलब है कि आने वाले दिनों में देश में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान बाजारों और पार्टी स्थल पर लोगों की काफी भीड़ होगी। ऐसे में वायरस को फैलने का मौका मिल सकता है। इसलिए जरूरी है कि इस दौरान लोग लापरवाही न करें। खासतौर पर बुजुर्ग ।

वैसे देखा जाय जो करीब-करीब 32,000 की संख्या बताई जा रही है। उससे भी कहीं ज्यादा संख्या फ्रांस में भी है जहां माना जाता है कि प्रतिदिन की संख्या करीब-करीब 49,000 संक्रमित लोगों की है। उसी तरह से जर्मनी में भी 25,000 के आसपास है और एक दिन पहले उनकी भी संख्या काफी ज्यादा थी। ब्राजील की भी संख्या करीब करीब 57,000 पाएंगे। साउथ कोरिया की संख्या, जो पड़ोसी राष्ट्र है चीन का, वहां भी 54,000 के आसपास है। और सबसे चौंकाने वाली बात जापान की है जहां 1,17,840 नए मामलों की संख्या प्रतिदिन की पाई जाती है। उससे अगर आप दो दिन पहले भी देखेंगे तो कहीं थोड़ा कम, थोड़ा ज्यादा इन सारे राष्ट्रों की संख्याएं हैं। जिस तरह चीन ने पूर्णतया लॉकडाउन किया तो ये राष्ट्र उस तरह नहीं कर रहे। उन्होंने पार्शियली लॉकडाउन किया।

दूसरी बात हम देख सकते हैं। कई पाश्चात्य समाचार पत्रों में भी आया है, कह सकते हैं कि एक पाश्चात्य झुकाव है, कह रहे हैं कि उनका वैक्सिनेशन फेल कर गया है। इस चलते वो काफी चिंतित है और अभी भी सूचना सही नहीं बता रहे हैं। इस तरह की बातें जब होती है तो कई बातें होती हैं। बात से बात निकलती है। शी जिनपिंग के बारे में एक बात कही जाती है कि एक कठोर रवैया उन्होंने अपनाया है, जीरो टॉलरेंस जिन्होंने कहा है, जीरो कॉविड की बात की है। ये उनका जो व्यक्तित्व है, उसका परिचायक है, उसको किस तरह से रिफ्लेक्ट कर रही है। वो कुछ अपना कुछ ठोस दिखाना चाहते हैं विश्व को कि अगर चीन ने शुरुआत की है तो चीन इसी तरह से अंत करेगा। आकलन है, अटकलें हैं, सही उत्तर देना उस हद तक मुश्किल लगता है, लेकिन हम इसी पर एक विश्लेषण करके ही इस आधार पर निकल सकते हैं कि समस्या वहां कुछ गंभीर प्रतीत होती है। नहीं तो वो इस तरह से अर्थव्यवस्था पर वो काबू नहीं करेंगे, अंकुश नहीं लगाएंगे।

गौर करने वाली बात यह भी है कि जब 34,000 संख्या हमारे यहां भी आई थी तो एक तरह से हमने पाबंदियां खोलना शुरू किया था। पाबंदियां थीं, आप मास्क लगा के चलिए, आप थोड़ी दूरी रखिए। कहीं पर बैठक कर रहे हैं तो एक-एक सीट छोड़कर बैठिए। हाथ धोते रहिए। ऐसा नहीं है कि चीन ने ये नहीं किया था लेकिन अब वे क्यों ऐसा कर रहे हैं कि जब पूरी दुनिया खुल रही है तो वो अपने आप को बंद कर रहे हैं। इसे ज्यादा भयावह स्थिति मानी जा सकती है ।यद्यपि यूरोपियन देशों के चैंबर ऑफ कॉमर्स ने उनसे आग्रह किया है कि ऐसा कदम मत उठाइए। इससे सबका नुकसान हो रहा है । इस तरह की कठोर कार्रवाई के अलावा भी रास्ते हैं। इस रास्ते को अख्तियार कीजिए। हो सकता है यूरोप को उनकी सूचनाएं ज्यादा सही मिली हैं। आर्थिक रूप से वो काफी नजदीकी से पिछले 40 से 50 सालों से जुड़ चुके हैं। उनकी बात सही हो सकती है कि अनावश्यक भी पाबंदी लग गई हो लेकिन ऐसा पागलपन कोई देश क्यों करेगा, यह भी समझने की बात है।

चीनियों का जो अप्रोच था, वो परिदृश्य बहुत अलग था। वो दूसरी दुनिया को हेय दृष्टि से देख रहे थे। चीन तकनीकी रूप से काफी संपन्न राष्ट्र है। काफी आगे निकल चुका है। इसके चलते किसी से न सीखने की आवश्यकता उन्होंने समझी और न ही किसी से मदद लेने की आवश्यकता समझी। हमने अपना भी वैक्सीन डिवेलप किया। दरअसल चीन व भारत में बहुत अंतर है । हमने एक मिक्स की की नीति अपनायी जिससे कि हमने बड़े ही पुरजोर तरीके से अपने वैक्सीनेशन प्रोग्राम को लागू किया और इसका टेस्ट भी हुआ। सबसे बड़ी चीज है वेरिफिकेशन। चीन में इस तरह के वेरिफिकेशन की संभावना ही नहीं है। वहां के नागरिकों को स्वतंत्रता नहीं है कि वो अपने आप को पूछ सकें कि भाई हमारे यहां जो वैक्सीन है, क्या सचमुच सुचारू है? क्या सचमुच चल रही है? हमारे यहां तो खुद ही इसके टेस्ट को आम किया। उसके बाद भी, पोस्ट टेस्ट जिसे कहते हैं, विधियां भी अपनाई गईं। सबने अपने अपने तरीके से अपनी टिप्पणियां भी की। जहां कम लग रहा था, ज्यादा लग रहा था। इस तरह खुले समाज के प्रति, एक खुले राष्ट्रीय जनतांत्रिक राष्ट्र के प्रति, नागरिकों के प्रति एक कर्तव्य बोध होता है, वो है ज्यादा। चीन में वो कर्तव्यबोध नहीं प्रतीत सा हुआ। वो अपने दंभ पर, इस तरह की हर एक जो कोशिश हो सकती थी, उसको उन्होंने निरस्त खुद किया। जब उनकी संख्या बढ़ रही है तब चिंतित हैं कि ये भयावह रूप ले सकता है। आपने तो अपने आप को अलग-थलग कर लिया। दुनिया से बंद कर लिया। खास तौर से वैक्सीनेशन पर जब सारी दुनिया एक दूसरे से सहयोग कर रही थी, हमने भी अपनी वैक्सीन डिप्लोमेसी से दुनिया के दूसरे देशों को भी भेजा। जो हमारे यहां पुणे में मैन्युफैक्चर हो रहा था या हैदराबाद में हो रहा था, तो हमने भेजा। क्वाड में भी, बाकी जितने हो सकते थे संगठन, जो मल्टीलैटरल, मिनी लेटरल, जितने तरह के संगठनों के माध्यम से, हमने अपनी एक मानवीय भूमिका निभाई। हम चीन के प्रति भी निभा सकते थे लेकिन चीन ने अपने आप को जोड़ना उचित नहीं समझा दूसरे देशों से। हो सकता है इसी के चलते एक बड़ा आकलन हो रहा है। उसके चलते वो थोड़ा सा स्तब्ध है और डरा हुआ है। इसे वो चाह रहा है कि रोककर, आइसोलेट करके और फिर से उसकी समीक्षा करे। यहां हम कह सकते हैं कि ये उनका एक प्रारूप हो सकता है जिसकी ज्यादा संभावना प्रतीत होती है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
hitbet
interbahis giriş
hitbet giriş
betgaranti giriş
jojobet
betgaranti giriş
jojobet
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
xslot giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
xslot giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
betwild giriş
betwild giriş
vdcasino giriş
kolaybet
vdcasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
betwild giriş
xslot giriş