कविता — 11 ‘राष्ट्रनीति’ का उद्देश्य यही है …… स्वाधीन हुए भारत को अब सात दशक हैं बीत गए। भय, भूख ,भ्रष्टाचार मिटे ना कितने ही नेता चले गए।। राजनीति अपना धर्म देश में निश्चित करने से चूक गई। संप्रदायवाद और उग्रवाद ने अस्मत जनता की लूट लई।। बढ़े कटुता- कलह देश में और क्लेश […]
‘राष्ट्रनीति’ का उद्देश्य यही है ……